Dengue in Children: आजकल डेंगू का बुखार शहरों एवं गाँवों दोनों में फैल रहा है, और इसका सबसे ज़्यादा खतरा बच्चे झेल रहे हैं। वयस्कों के विपरीत, जिनका शरीर अचानक तरल पदार्थ की कमी को बेहतर ढंग से सहन कर लेता है, उन बच्चों की हालत जल्दी बिगड़ सकती है।
शुरुआत में जो बुखार एक हानिरहित बुखार के तौर पर होता है, वह कुछ ही दिनों में एक गंभीर चिकित्सा आपात स्थिति में बदल सकता है। ऐसे में सभी डॉक्टर माता-पिता से यह आग्रह कर रहे हैं कि जैसे ही डेंगू के बारे में पता चले, तो बच्चों में हल्की-फुल्की बीमारी को नज़रअंदाज़ बिलकुल न करें।
इन लोगों को खतरा (Dengue in Children)
आपको बता दें कि डेंगू एडीज़ एजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। हालाँकि यह सभी उम्र के लोगों के लिए एक खतरनाक बीमारी होती है, लेकिन बच्चों में यह बीमारी ज्यादातर अलग तरह से नजर आ रही होती है क्यूंकि छोटे बच्चों में, उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली अभी भी संक्रमण से लड़ना सीख रही होती है।

शरीर कभी-कभी वायरस के प्रति ज़रूरत से ज़्यादा ही प्रतिक्रिया करने लगता है, जिसकी वजह से प्लाज़्मा रिसाव होता है। दरअसल, उनके रक्त की मात्रा कम होती है, इसलिए थोड़ा सा रिसाव भी उन्हें सदमे में डाल सकता है। यह बच्चों के लिए डेंगू को और भी खतरनाक बनाता है।

डेंगू के लक्षण (Dengue in Children)
जिन्हें ज्यादातर सिरदर्द, तेज़ बुखार और जोड़ों में दर्द होता है, उन बच्चों में इसके हल्के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता पेट दर्द, हल्का बुखार, उल्टी, असामान्य थकान महसूस करना और भूख न लगना आदि जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। क्यूंकि ये किसी आम वायरल संक्रमण जैसे लग सकते हैं।

खतरा यह है कि ऐसे में अपना कीमती समय बर्बाद हो जाता है। माता-पिता को डेंगू के मौसम में ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी जाती हैं। अगर बुखार 2 दिन से ज़्यादा रहे, मसूड़ों से खून आये, लगातार उल्टी या बहुत ज़्यादा नींद आना जैसे चिंताजनक लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किये चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी जाती है।
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