Surajkund Jhula Accident: हरियाणा के प्रसिद्ध सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले में हुआ झूले का हादसा अब महज एक तकनीकी खराबी नहीं माना जा रहा, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही, ठेकेदारों की मनमानी और कमजोर निगरानी तंत्र की गंभीर तस्वीर पेश कर रहा है। जिस मेले को हर साल देश-विदेश से आए कलाकारों, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, वही मेला इस बार सुरक्षा में चूक के कारण सुर्खियों में है।
Surajkund Jhula Accident: कैसे हुआ हादसा? प्रत्यक्षदर्शियों की आंखों देखी
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा उस वक्त हुआ जब हाई-स्पीड झूला पूरी रफ्तार से घूम रहा था। अचानक तेज आवाज आई और झूला असंतुलित हो गया। कुछ सेकेंड के भीतर चीख-पुकार मच गई। लोग सीटों पर फंसे रह गए, जबकि नीचे मौजूद परिजन बदहवास हालत में मदद के लिए चिल्लाते दिखे।
कई लोगों का कहना है कि झूले पर क्षमता से ज्यादा सवारियां बैठाई गई थीं, लेकिन ऑपरेटर ने किसी की बात नहीं सुनी। हादसे के बाद कुछ देर तक झूला हवा में ही अटका रहा, जिससे सवार लोगों में डर और बढ़ गया।
Surajkund Jhula Accident: सुरक्षा इंतजामों की पोल खुली
हादसे के बाद यह भी सामने आया कि मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मी और मेडिकल स्टाफ तुरंत हालात संभालने में नाकाम रहे। एंबुलेंस आने में देरी हुई, जिससे घायलों को अस्पताल पहुंचाने में काफी वक्त लग गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इतना बड़ा मेला होने के बावजूद इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम सिर्फ नाम का था।
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Surajkund Jhula Accident: पुलिस की कार्रवाई और जांच का दायरा बढ़ा
झूले के मालिक और ऑपरेटर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब जांच का दायरा बढ़ा रही है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस यह भी खंगाल रही है कि –
- क्या झूले को लगाने से पहले किसी इंजीनियर से तकनीकी जांच कराई गई थी
- क्या प्रशासन को सुरक्षा खामियों की जानकारी पहले से थी
- क्या रिश्वत या मिलीभगत के चलते नियमों को नजरअंदाज किया गया
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ी तो मेले के आयोजकों और संबंधित प्रशासनिक अफसरों से भी पूछताछ की जाएगी।
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Surajkund Jhula Accident: पीड़ित परिवारों का दर्द
घायलों के परिजनों में भारी गुस्सा है। एक घायल बच्चे के पिता ने कहा, ‘हम बच्चों को खुशी देने मेला लाए थे, लेकिन यहां जान जोखिम में पड़ गई। अगर कुछ हो जाता तो जिम्मेदार कौन होता?’ परिवारों ने सरकार से कड़ी कार्रवाई और मुआवजे की मांग की है।
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Surajkund Jhula Accident: मेले की चमक के पीछे छिपा खतरा
सूरजकुंड मेला हर साल करोड़ों का कारोबार करता है, लेकिन इस हादसे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि, क्या मुनाफा इंसानी जान से ज्यादा अहम हो गया है? विशेषज्ञों का मानना है कि अस्थायी झूलों और राइड्स के लिए सख्त राष्ट्रीय स्तर के नियम होने चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
Surajkund Jhula Accident: आगे क्या?
फिलहाल प्रशासन ने कुछ झूलों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है और सुरक्षा जांच के आदेश दिए हैं। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि –
- क्या यह कार्रवाई स्थायी बदलाव लाएगी?
- या फिर कुछ दिनों बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा?
सूरजकुंड मेले का यह हादसा एक बार फिर चेतावनी है कि अगर सिस्टम नहीं जागा, तो अगली खबर और भी भयावह हो सकती है।
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