दिल्ली-हरियाणा हाईवे पर रुकने वाला हर यात्री मुरथल के ढाबों को गर्मागर्म पराठों और चटपटी सब्जी के लिए जानता है, लेकिन अब यहां रुकने की एक और वजह जुड़ गई है — मुरथल रोबोट वेटर। सोनीपत के इस मशहूर पड़ाव पर स्थित रेशम ढाबे ने अपनी सर्विस को टेक्नोलॉजी से जोड़ते हुए एक रोबोट को टेबल तक खाना पहुंचाने का जिम्मा सौंप दिया है, और यह कदम अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।
रोबोट का काम करने का तरीका
रसोई में ऑर्डर तैयार होते ही फूड ट्रे रोबोट के ऊपरी हिस्से में फिट कर दी जाती है। इसके बाद यह मशीन अपने बिल्ट-इन नेविगेशन सिस्टम की मदद से पहले से मैप किए गए रास्ते पर चलती हुई सीधे संबंधित टेबल तक पहुंच जाती है। इसे संचालित करने में सॉफ्टवेयर चिप और रिमोट कंट्रोल यूनिट की भूमिका अहम है, ताकि भीड़भाड़ की स्थिति में स्टाफ इसकी दिशा को मैन्युअली एडजस्ट कर सके। लाल चमकती एलईडी लाइट्स और फाइबर बॉडी इसे बाकी उपकरणों से अलग पहचान देते हैं, और एक बार चार्ज होने पर यह करीब डेढ़ से दो घंटे तक बिना रुके सेवा दे सकता है।
हाईवे ढाबों में तकनीक की यह एंट्री क्यों मायने रखती है
देश भर के शहरी रेस्टोरेंट्स में सर्विस रोबोट पहले से मौजूद हैं, लेकिन हाईवे किनारे के पारंपरिक ढाबे — जहां माहौल पूरी तरह देसी और मिट्टी से जुड़ा माना जाता है — वहां ऐसी तकनीक का इस्तेमाल अब भी अपवाद है। मुरथल जैसे इलाके में, जहां रोजाना हजारों गाड़ियां रुकती हैं और मुकाबला दर्जनों ढाबों के बीच होता है, ऐसी पहल ग्राहकों को आकर्षित करने और ब्रांड को याद रखने लायक बनाने की रणनीति के तौर पर देखी जा रही है।
ग्राहकों की प्रतिक्रिया
रोबोट को टेबल की ओर बढ़ते देख ज्यादातर ग्राहक पहली नजर में हैरान रह जाते हैं। कई लोग मोबाइल कैमरा निकालकर वीडियो बनाते हैं या सेल्फी लेते नजर आते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इस सुविधा के लिए ढाबा प्रबंधन कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूल रहा — यानी सामान्य मेन्यू रेट में ही यह अनुभव शामिल है, जिससे स्थानीय और बाहर से आने वाले, दोनों तरह के ग्राहक इसे आसानी से आजमा पा रहे हैं।
तकनीक के पीछे की टीम
ढाबा प्रबंधन के मुताबिक, इस रोबोट को बेंगलुरु की एक विशेष टीम से डिजाइन करवाया गया है, और इसके संचालन के लिए ढाबे में अलग से स्टाफ भी नियुक्त किया गया है, जो जरूरत पड़ने पर रिमोट के जरिए इसकी निगरानी करता है। मकसद साफ है — पारंपरिक स्वाद को बरकरार रखते हुए ग्राहकों को एक नया, आधुनिक अनुभव देना।
नतीजा: स्वाद वही, प्रस्तुति नई
मुरथल की पहचान अब तक सिर्फ पराठों और देसी थाली तक सीमित थी, लेकिन रोबोट वेटर के आने से यहां खाना परोसने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। जायका पहले जैसा ही बरकरार है, मगर परोसने का यह नया अंदाज हाईवे से गुजरने वाले यात्रियों के लिए बातचीत का ताजा मुद्दा बन गया है — और शायद आने वाले समय में बाकी ढाबों के लिए भी एक मिसाल।


