MLA Govind Parmar Passes Away: गुजरात की राजनीति से शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण नाम हमेशा के लिए विदा हो गया। आणंद जिले की उमरेठ विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक गोविंद परमार का 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन (MLA Govind Parmar Passes Away) की खबर सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। अचानक घर पर उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने कई दिनों तक उनका इलाज किया, लेकिन आखिरकार शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।
अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में चल रहा था इलाज
परिवार के करीबी सूत्रों के मुताबिक, गोविंद परमार (MLA Govind Parmar Passes Away) कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। शुक्रवार से पहले उनकी तबीयत अचानक ज्यादा खराब हो गई थी। परिजनों ने उन्हें तत्काल आणंद के एक अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी। हालांकि इलाज के बावजूद उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद आखिरकार उनका निधन हो गया। इस खबर के सामने आते ही उनके समर्थकों और बीजेपी कार्यकर्ताओं में शोक का माहौल बन गया।
बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक
गोविंद परमार के निधन (MLA Govind Parmar Passes Away) की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में बीजेपी नेता, कार्यकर्ता और उनके समर्थक उनके निवास पर पहुंचने लगे। सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। गुजरात सरकार के मंत्री जगदीश विश्वकर्मा ने भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शोक संदेश साझा करते हुए लिखा कि उमरेठ के लोकप्रिय विधायक गोविंदभाई परमार के निधन की खबर बेहद दुखद है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत नेता की आत्मा को शांति मिले और उनके परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति प्रदान हो।
1953 में जन्म, लंबे राजनीतिक अनुभव के लिए जाने जाते थे
गोविंद परमार का जन्म वर्ष 1953 में हुआ था। वे मध्य गुजरात की राजनीति में एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता के रूप में जाने जाते थे। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई चुनाव लड़े और जनता का विश्वास हासिल किया। चार बार विधायक बनने का गौरव उनके नाम रहा। स्थानीय राजनीति में उनकी पहचान एक जमीनी नेता के रूप में थी, जो अपने क्षेत्र के लोगों से सीधे जुड़कर काम करने के लिए जाने जाते थे।
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निर्दलीय से शुरू हुआ विधानसभा तक का सफर
गोविंद परमार (MLA Govind Parmar Passes Away) की राजनीतिक यात्रा काफी दिलचस्प रही। उन्हें पहली बड़ी सफलता 1995 में मिली, जब उन्होंने आणंद जिले की सरसा विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद 1998 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और सरसा सीट से दोबारा जीत दर्ज की। इस जीत ने उन्हें क्षेत्र की राजनीति में मजबूत पहचान दिलाई। हालांकि बाद के वर्षों में उन्हें चुनावी हार का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने राजनीति में अपनी सक्रियता जारी रखी।
परिसीमन के बाद बदला क्षेत्र, बीजेपी से दो बार बने विधायक
साल 2008 में विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन के बाद सरसा विधानसभा सीट को उमरेठ विधानसभा क्षेत्र में शामिल कर दिया गया। बाद में गोविंद परमार भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर उमरेठ सीट से जीत हासिल की और दोबारा विधायक बने। उनकी जीत ने यह साबित किया कि क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता बरकरार थी।
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क्षेत्र की राजनीति में खाली हुई जगह
गोविंद परमार के निधन (MLA Govind Parmar Passes Away) से उमरेठ क्षेत्र की राजनीति में एक बड़ा खालीपन पैदा हो गया है। लंबे समय तक सक्रिय राजनीति में रहने के कारण वे क्षेत्र के लोगों के बीच काफी लोकप्रिय थे। उनकी पहचान ऐसे नेता के रूप में थी जो स्थानीय मुद्दों को लेकर लगातार सक्रिय रहते थे। अब उनके निधन के बाद न सिर्फ बीजेपी बल्कि पूरे क्षेत्र की राजनीति में एक अनुभवी नेता की कमी महसूस की जा रही है।
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