गाजियाबाद में करोड़ों रुपये की लागत से बने Haj House का उद्देश्य था मुस्लिम समुदाय से जुड़े सभी श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराना, जिससे हज यात्रा के दौरान उन्हें रुकने, ठहरने और आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए किसी तरह की कठिनाईयों का सामना न करना पड़े। परन्तु 52 करोड़ की लागत से बना यह भवन अब अपने मूल मकसद से भटकता हुआ दिखाई दे रहा है।
Haj House का मकसद
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हज हाउस का प्रयोग अब धार्मिक यात्रियों की सुविधाओं के लिए नहीं बल्कि शादियों, रिसेप्शन एवं निजी कार्यक्रमों के लिए किया जा रहा है। बड़े हॉल व पर्याप्त जगह की वजह से लोग इसे विवाह समारोह एवं अन्य आयोजनों के लिए बुक कर रहे हैं। यही नहीं, बहुत बार यहां भव्य सजावट और लाइटिंग भी देखने को मिल रही है।

आसपास के कुछ लोगों का यह कहना है कि जब इस भवन को तैयार किया गया था, तो इसे हज यात्रियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण बताया गया था। लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि यहां शादी-ब्याह का शोरगुल ज्यादा सुनाई देता है। इस पर लोगों का सवाल है कि आखिर धार्मिक तथा सामुदायिक उद्देश्यों के लिए बनाए गए भवन का इस प्रकार से व्यावसायिक इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है।

मूल उद्देश्य से भटकाव
Haj House की देखरेख करने वाले अधिकारियों का यह कहना है कि भवन का उपयोग “सामुदायिक कार्यों” के लिए भी किया जा सकता है, परन्तु इस प्रकार के निजी आयोजनों को प्राथमिकता देना कहीं न कहीं मूल उद्देश्य से भटक रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भवन का उपयोग शादियों व निजी आयोजनों के लिए होना ही है, तो इसके लिए अलग से नीतियां और शुल्क संरचना बनाई जानी चाहिए। जिससे सरकारी धन से बने हुए भवन का सही और पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित हो सके।

अब सवाल यह भी उठाए जा रहे हैं कि आखिर 52 करोड़ रुपये क्या जनता की सुविधा के लिए खर्च किए गए थे या फिर एक और “मैरेज हॉल” बनाने के लिए? इस पर प्रशासन को जल्द स्पष्ट रुख अपनाने की आवयश्कता है।
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