Ghaziabad News: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा लगाए गए 10 और 15 वर्ष पुराने पेट्रोल और डीज़ल वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध के फैसले के खिलाफ आम जनता का आक्रोश अब मुखर होता जा रहा है। विशेष रूप से निजी वाहन स्वामियों ने इसे अपने अधिकारों के खिलाफ बताया है और इसे अन्यायपूर्ण निर्णय करार दिया है। एक साझा अपील में कई वाहन स्वामियों ने कहा है कि यह निर्णय व्यवसायिक वाहनों के लिए तो समझा जा सकता है, लेकिन निजी वाहनों पर यह नियम लागू करना असंगत है। उन्होंने कहा कि आम आदमी वर्षों की मेहनत और बचत से अपने परिवार की सुविधा के लिए वाहन खरीदता है, और उसकी देखभाल अपने शरीर से भी अधिक करता है।
निजी वाहन स्वामियों का तर्क
Ghaziabad News: “हमारे वाहन ज्यादा नहीं चलते, केवल आवश्यकता होने पर ही हम उन्हें सड़क पर लाते हैं। ऐसे में सिर्फ उम्र के आधार पर वाहनों को कन्डम घोषित करना अनुचित है। जिस तरह इंसान के शरीर का कोई अंग खराब हो जाए तो उसे बदला जाता है, न कि पूरा शरीर, उसी तरह वाहन के किसी पार्ट को बदलकर उसकी कार्यक्षमता बढ़ाई जा सकती है।”
एकता की ज़रूरत
Ghaziabad News: वाहन मालिकों ने सविनय निवेदन किया है कि अब समय आ गया है जब आम जनता को एकजुट होकर ऐसे नियमों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा, “यह फैसला हमारी आवाज को बिना सुने, कुछ लोगों की मीटिंग में लिया गया है। लेकिन अब हम चुप नहीं बैठेंगे। हम सरकार को यह दिखा देंगे कि जनता भी संगठित हो सकती है और अन्याय के विरुद्ध शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली विरोध कर सकती है।”
क्या है नियम
Ghaziabad News: NGT के निर्देशानुसार दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 10 साल पुराने डीज़ल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को चलाना प्रतिबंधित है। इसका मकसद वायु प्रदूषण को कम करना है। हालांकि, वाहन मालिकों का दावा है कि उनकी निजी गाड़ियां प्रदूषण का मुख्य कारण नहीं हैं, और उन्हें तकनीकी जांच के बाद ही प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।