Ghaziabad News: कुछ ही दिनों बाद सावन शुरु होने वाला है जो ना केवल धार्मिक अनुष्ठानों और व्रतों से जुड़ा है, बल्कि स्त्रियों के सौंदर्य, स्वास्थ्य और मानसिक शांति से भी गहरा संबंध रखता है। खास कर की सुहागिन महिलाएं इस माह में जब हरे रंग की चूड़ियां पहनती हैं, तो इसके पीछे केवल परंपरा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, भावनात्मक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी अनेक लाभ छिपे होते हैं।
Ghaziabad News: बिकती है हरे रंग की चूड़ियां
आपको बता दें कि सावन का महीना वर्षा ऋतु का वक्त होता है, जब चारों ओर हरियाली छा जाती है। हरा रंग प्रकृति, नवजीवन और उर्वरता का प्रतीक है। जब सुहागिन महिलाएं हरी चूड़ियां पहनती हैं, तो यह इस बात का प्रतीक होता है कि वे अपने जीवन में भी नई ऊर्जा, प्रेम और समृद्धि चाहती हैं। गाजियाबाद दुकान चालक कासिम बताते है कि सावन के महीने में सबसे ज्यादा खरीदी चूड़ियों की ही होती है।
Ghaziabad News: कासिम ने क्या बताया ?
कासिम के अनुसार, उनकी दुकान पर हर एक तरह की चूड़ियां बिकती है लेकिन सावन के महीने में सबसे ज्यादा खरीदे जाने वाली चूड़ी हरे रंग की है। जिसमें कुछ महिला फैंसी तो कुछ प्लेन कलर की हरे रंग की चूड़ियां ज्यादा खरीद रही है। क्योंकि हरा रंग सौहार्द, उन्नति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। जब महिलाएं हरे रंग की चूड़ियां पहनती हैं, तो यह न केवल उनके दांपत्य जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ाता है, बल्कि पूरे परिवार में आपसी स्नेह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
Ghaziabad News: माता पार्वती को पसंद है हरा रंग
आपको बता दें कि सावन में भगवान शिव के साथ देवी पार्वती की भी पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में ऐसा माना जाता है कि हरा रंग देवी पार्वती को अत्यंत पसंद है। इसलिए स्त्रियां हरी चूड़ियां पहनकर देवी को प्रसन्न करने का प्रयास करती हैं ताकि उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त हो सके।
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