Ghaziabad Breaking : अपनी मांगों को लेकर वेव सिटी योजना से प्रभावित किसानों ने सोमवार को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया।
सैकड़ों की संख्या में एकत्रित किसानों ने जीडीए कार्यालय के बाहर धरना दिया और जमकर नारेबाजी की। किसानों का गुस्सा 2014 में वेव सिटी के साथ हुए समझौते को लागू न करने को लेकर है, जिसके तहत उनकी मांगें पूरी नहीं की जा रही हैं।
Ghaziabad Breaking : जीडीए, प्रशासन और पुलिस के प्रतिनिधि रहे मौजूद
किसान संघर्ष समिति के बैनर तले किए गए इस प्रदर्शन में किसानों ने जीडीए पर गंभीर आरोप लगाए। समिति के सदस्य आनंद गुर्जर ने बताया कि वर्ष 2014 में वेव सिटी और सनसिटी के साथ हुए समझौते में उनकी 14 सूत्रीय मांगें स्वीकार की गई थीं। इस समझौते के समय जीडीए, प्रशासन और पुलिस के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। मुख्य मांगों में किसानों को विकसित प्लॉट और संशोधित मुआवजा देना शामिल था। हालांकि, किसानों का कहना है कि समझौते के बावजूद 11 साल बीत जाने के बाद भी उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, और उन्हें बार-बार केवल तारीखें दी जा रही हैं।
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Ghaziabad Breaking : कई बार महापंचायतों से उठाई आवाज
किसानों ने जीडीए पर आश्वासनों का ढेर लगाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई बार महापंचायतों के जरिए अपनी मांगें उठाई गईं, लेकिन जीडीए ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो वे वेव सिटी और सनसिटी की कंपनियों को क्षेत्र में काम करने से रोक देंगे।

Ghaziabad Breaking : जीडीए कार्यालय पर तनावपूर्ण रहा माहौल
किसानों के इस प्रदर्शन से जीडीए कार्यालय के बाहर तनावपूर्ण माहौल रहा। धरने और नारेबाजी के दौरान किसानों ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए प्रशासन और प्राधिकरण पर दबाव बनाने की कोशिश की। यह प्रदर्शन गाजियाबाद में चल रही वेव सिटी योजना से प्रभावित किसानों की लंबे समय से चली आ रही नाराजगी को दर्शाता है।
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Ghaziabad Breaking : किसानों की क्या हैं मांग ?
किसानों की मांग है कि जीडीए समझौते को तत्काल लागू करवाए और उनकी जमीन के बदले उचित मुआवजा व विकसित प्लॉट उपलब्ध कराए। इस मामले में जीडीए की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और गर्माहट देखने को मिल सकती है, क्योंकि किसानों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी मांगों पर अडिग रहेंगे।
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