Caste Census : केंद्र सरकार ने जातीय जनगणना कराने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री नरेंद्र कश्यप ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह जनगणना वंचित और पिछड़े वर्गों को समाज में उचित पहचान दिलाने में सहायक होगी।
Caste Census : 1931 के बाद पहली बार होगी जातीय जनगणना
मंत्री कश्यप ने बताया कि भारत में अंतिम जातीय जनगणना 1931 में ब्रिटिश शासन के दौरान कराई गई थी। 2021 में जनगणना की योजना थी, लेकिन कोविड महामारी के चलते यह टल गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह निर्णय 140 करोड़ भारतीयों के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। कश्यप ने कहा कि यह जनगणना सरकारी योजनाओं और नौकरियों में पिछड़े वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने में मदद करेगी। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकारें, विशेष रूप से कांग्रेस, केवल आश्वासन देती रहीं लेकिन कभी भी इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया।
Caste Census : कांग्रेस पर लगाया जातीय जनगणना विरोध का आरोप
मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा जातिवार गणना का विरोध किया। उन्होंने कहा कि 2010 में संसद में आश्वासन देने के बावजूद तत्कालीन मनमोहन सरकार ने केवल सामाजिक आर्थिक जातीय सर्वे कराया, जबकि मंत्रिमंडलीय समूह की सिफारिश जातिवार जनगणना की थी। उन्होंने यह भी बताया कि 1980 में मंडल आयोग ने 1931 की जनगणना के आधार पर रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें पिछड़ा वर्ग की आबादी 32% आंकी गई थी। इसके आधार पर सरकारी नौकरी और शैक्षणिक संस्थानों में 27% आरक्षण की सिफारिश की गई थी।
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