Dwarka Hit and Run Case: राजधानी दिल्ली के द्वारका इलाके में हुए भीषण हिट एंड रन (Dwarka Hit and Run Case) हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। 23 वर्षीय साहिल धनेश्रा की मौत के बाद उनकी मां इन्ना माकन सदमे में हैं। आरोपी नाबालिग के पिता ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी, लेकिन दुख से टूटी मां का कहना है-‘सिर्फ ‘सॉरी’ कह देने से क्या मेरा बेटा वापस आ जाएगा?’
3 फरवरी को हुई इस घटना में एक स्कॉर्पियो ने बाइक सवार साहिल को टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर इतनी जोरदार थी कि साहिल को संभलने का मौका तक नहीं मिला। अस्पताल ले जाने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
नाबालिग आरोपी को बोर्ड परीक्षा के लिए जमानत
हादसे के बाद पुलिस ने स्कॉर्पियो चला रहे नाबालिग (Dwarka Hit and Run Case) को हिरासत में लिया। किशोर न्याय बोर्ड के निर्देश पर उसे सुधार गृह भेजा गया था। बाद में 10वीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए उसे अस्थायी जमानत दे दी गई। यही फैसला अब बहस का विषय बन गया है। एक ओर कानून के प्रावधान हैं, तो दूसरी ओर पीड़ित परिवार का दर्द।
मां का दर्द ‘मेरी जिंदगी खत्म हो गई’
इन्ना माकन ने बताया कि 2018 में पति के निधन के बाद साहिल ही उनका एकमात्र सहारा था। वह जल्द ही पोस्टग्रेजुएशन के लिए ब्रिटेन जाने वाला था। मां की आंखों में आंसू हैं और आवाज में टूटन बोली, ‘अब न सुबह का मतलब है, न काम पर जाने की कोई वजह।’
उन्होंने आरोपी के पिता की माफी पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘वो किस बात की माफी मांग रहे हैं? मेरी जिंदगी खत्म करने की? अगर यह उनके बच्चे के साथ होता तो क्या सिर्फ ‘सॉरी’ से सब ठीक हो जाता?’
वीडियो बनाने के आरोपों ने बढ़ाया विवाद
हादसे (Dwarka Hit and Run Case) के समय कार में मौजूद आरोपी की बहन पर वीडियो (रील) बनाने के आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। आरोपी के पिता ने कहा कि आजकल बच्चे वीडियो बनाते हैं, लेकिन उनका दावा है कि वह उस समय दिल्ली (Dwarka Hit and Run Case) में मौजूद नहीं थे और बेटा बिना बताए गाड़ी की चाबी ले गया था। गाड़ी पर पहले से मौजूद चालानों को लेकर भी सवाल उठे। पिता ने सफाई दी कि वे चालान ड्राइवरों के नाम हैं, बेटे के नहीं।
उम्र को लेकर भी विवाद
कुछ रिपोर्ट्स में आरोपी की उम्र 19 साल बताई गई, जिसे पिता ने गलत बताया। उनका कहना है कि बेटा 17 साल कुछ महीने का है और जन्म प्रमाण पत्र मौजूद है।
कानून, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पर सवाल
यह मामला केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि नाबालिग ड्राइविंग, अभिभावकीय जिम्मेदारी और सड़क सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करता है। क्या नाबालिग को वाहन की चाबी तक पहुंच मिलनी चाहिए? क्या बार-बार चालान होने के बाद भी सख्त कदम नहीं उठाए जाने चाहिए थे? साहिल की मां अब न्याय (Dwarka Hit and Run Case) की उम्मीद में हैं। उनका कहना है कि वह चाहती थीं कि बेटा इस देश के हालातों से दूर बेहतर भविष्य बनाए, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था।
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