AI Impact Summit Controversy: नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान एक रोबोडॉग (AI Impact Summit Controversy) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सरकार के उच्च स्तर तक पहुंच गया है। समिट में प्रदर्शित एक रोबोटिक डॉग को लेकर आरोप लगे कि इसे ‘मेक इन इंडिया’ थीम के तहत भारतीय उत्पाद बताकर पेश किया गया, जबकि यह विदेशी कंपनी का मॉडल है। विवाद बढ़ने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव S. Krishnan ने इस मामले पर स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है।
‘मिसइन्फॉर्मेशन को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता’
आईटी सचिव ने कहा कि सरकार की मंशा है कि एक्सपो में केवल वास्तविक और प्रामाणिक कार्य ही प्रदर्शित हों। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी प्रकार की गलत जानकारी को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। नियमों का पालन सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है और किसी भी प्रकार का विवाद आयोजकों के उद्देश्य को प्रभावित करता है।उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस बात में नहीं पड़ना चाहती कि कौन सही है या गलत, लेकिन किसी भी तरह की भ्रामक प्रस्तुति स्वीकार्य नहीं है।
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क्या था पूरा मामला?
दरअसल, एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम, प्रगति मैदान में किया गया था। इस टेक्नोलॉजी एक्सपो में Galgotias University का भी एक स्टॉल लगा था। यहां प्रदर्शित रोबोडॉग ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद विवाद खड़ा हो गया। आरोप लगाए गए कि प्रदर्शित रोबोडॉग चीन की कंपनी Unitree के Go2 मॉडल से मिलता-जुलता है, जिसकी बाजार कीमत लगभग 2.5 लाख रुपये बताई जाती है। समिट की थीम ‘मेक इन इंडिया’ होने के कारण इस पर सवाल उठने लगे कि क्या विदेशी उत्पाद को स्वदेशी नवाचार के रूप में पेश किया गया?
यूनिवर्सिटी की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय (AI Impact Summit Controversy) ने बयान जारी कर कहा कि उत्पाद के तकनीकी स्रोत को लेकर प्रतिनिधि से तथ्यात्मक त्रुटि हो गई थी। संस्थान के अनुसार, संबंधित प्रोफेसर को उत्पाद की तकनीकी उत्पत्ति की पूरी जानकारी नहीं थी और उत्साह में गलत बयान दे दिया गया। विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि वह आयोजकों के निर्णय का सम्मान करता है और उत्पन्न हुई किसी भी भ्रम की स्थिति पर खेद व्यक्त करता है।
समिट से निष्कासन और बढ़ती बहस
मामले के तूल पकड़ने के बाद विश्वविद्यालय को समिट (AI Impact Summit Controversy) से बाहर किए जाने की खबरें भी सामने आईं। हालांकि आयोजकों की ओर से आधिकारिक बयान सीमित रहा, लेकिन इस घटना ने टेक्नोलॉजी एक्सपो में पारदर्शिता और सत्यापन की प्रक्रिया पर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मेक इन इंडिया’ जैसे अभियानों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए प्रदर्शित उत्पादों की पृष्ठभूमि और तकनीकी स्रोत की स्पष्ट जानकारी आवश्यक है।
नवाचार बनाम ब्रांडिंग की चुनौती
यह विवाद केवल एक रोबोडॉग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस बड़े सवाल को सामने लाता है कि क्या भारतीय टेक इकोसिस्टम में आयातित तकनीक को पर्याप्त श्रेय और स्पष्टता के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है? सरकार का रुख साफ है प्रदर्शनी मंच नवाचार दिखाने के लिए है, न कि ब्रांडिंग या भ्रम पैदा करने के लिए।
पारदर्शिता ही विश्वास की कुंजी
एआई इम्पैक्ट समिट (AI Impact Summit Controversy) का उद्देश्य भारत की तकनीकी क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना है। ऐसे में किसी भी प्रकार की गलत जानकारी या भ्रम न केवल आयोजकों, बल्कि देश की छवि को भी प्रभावित कर सकता है। आईटी सचिव का बयान इस दिशा में एक स्पष्ट संदेश है कि भविष्य में तकनीकी आयोजनों में सत्यापन और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
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