Indian Stock Market Crash: भारत के शेयर बाजार में एक बार फिर तेज गिरावट आई है। सेंसेक्स 1,069 पॉइंट्स या 1.28% गिरकर 82,225.92 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 1.12% फिसलकर 25,424.65 पर बंद हुआ। इस गिरावट की वजह से BSE में लिस्टेड कंपनियों का टोटल मार्केट कैप घटकर ₹466 लाख करोड़ रह गया है, और इन्वेस्टर की दौलत में करीब ₹3 लाख करोड़ की कमी आई है।
लेकिन सवाल यह है कि इस गिरावट के पीछे पांच बड़े ‘विलेन’ कौन हैं? आइए डिटेल में समझते हैं।
1. ग्लोबल मार्केट में कमजोरी पहली बड़ी वजह बनी
US और एशियाई मार्केट में कमजोरी का सीधा असर भारतीय मार्केट पर पड़ा। जब विदेशी मार्केट में बिकवाली होती है, तो विदेशी इन्वेस्टर उभरते मार्केट से फंड निकालना शुरू कर देते हैं।
US इंटरेस्ट रेट और बढ़ते बॉन्ड यील्ड को लेकर अनिश्चितता ने इन्वेस्टर्स की रिस्क लेने की क्षमता को कम कर दिया। इसका असर भारत समेत कई उभरते मार्केट में महसूस किया गया।
2. FII सेलिंग से बढ़ा दबाव
फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की लगातार सेलिंग मार्केट के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुई। जब बड़े फंड बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो मार्केट में पैनिक फैल जाता है।
FII की सेलिंग से बैंकिंग, IT और मेटल सेक्टर में तेज गिरावट आई। घरेलू इन्वेस्टर्स ने खरीदने की कोशिश की, लेकिन वे दबाव को पूरी तरह से कम नहीं कर पाए।
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3. मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स में ओवरवैल्यूएशन
पिछले कुछ महीनों में मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स में तेज बढ़ोतरी देखी गई थी। कई स्टॉक्स अपनी असली कीमत से काफी ऊपर ट्रेड कर रहे थे।
जैसे ही मार्केट में कुछ नेगेटिव खबरें आईं, इन स्टॉक्स में प्रॉफिट-बुकिंग शुरू हो गई। इसका असर बड़े मार्केट पर पड़ा, जिससे इंडेक्स में तेज गिरावट आई।
4. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
भारत जैसे इंपोर्ट पर निर्भर देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी चिंता की बात है। महंगा कच्चा तेल महंगाई बढ़ाता है और कॉर्पोरेट कॉस्ट पर असर डालता है।
इससे इन्वेस्टर्स को चिंता है कि भविष्य में कॉर्पोरेट प्रॉफ़िट पर असर पड़ सकता है, जिसका सीधा असर स्टॉक की कीमतों पर पड़ता है।
5. प्रॉफिट-बुकिंग और टेक्निकल कमजोरी
टेक्निकल चार्ट्स पर, निफ्टी एक अहम सपोर्ट लेवल के पास ट्रेड कर रहा था। जैसे ही यह लेवल टूटा, शॉर्ट सेलिंग और स्टॉप-लॉस शुरू हो गए।
इससे मार्केट में तेज बिकवाली हुई, जिससे गिरावट और गहरी हो गई।
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Indian Stock Market Crash: किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई?
- बैंकिंग और फाइनेंशियल स्टॉक्स पर भारी दबाव
- ग्लोबल संकेतों के कारण IT सेक्टर में कमजोरी
- मेटल और ऑटो स्टॉक्स में प्रॉफिट-बुकिंग
- मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स में काफी गिरावट देखी गई
Indian Stock Market Crash: इन्वेस्टर्स को क्या करना चाहिए?
ऐसी गिरावट के दौरान घबराकर फैसले लेना नुकसानदायक हो सकता है।
- लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स को मजबूत फंडामेंटल्स वाले स्टॉक्स में इन्वेस्टेड रहना चाहिए।
- SIP इन्वेस्टर्स को अपनी इंस्टॉलमेंट जारी रखनी चाहिए
- कमजोर और ओवरवैल्यूड स्टॉक्स से बचें।
- पोर्टफोलियो में डाइवर्सिटी बनाए रखें।
याद रखें मार्केट में गिरावट टेम्पररी होती है, लेकिन सब्र से लंबे समय तक चलने वाला फायदा होता है।
Indian Stock Market Crash: क्या यह गिरावट और गहरी हो सकती है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ग्लोबल संकेत कमजोर रहे और FII की सेलिंग जारी रही, तो मार्केट पर और दबाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, भारत की मजबूत इकोनॉमिक स्थिति और घरेलू इन्वेस्टर्स की हिस्सेदारी लॉन्ग-टर्म में मार्केट को सपोर्ट कर सकती है।
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