Indian Stock Market Crash: फ्रांस के पीस बोर्ड में शामिल होने से इनकार करने की जिद और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों ने एक बार फिर वैश्विक शेयर बाजारों में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। ट्रेड वॉर की पुरानी आशंकाएं फिर से सिर उठाने लगी हैं, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कमजोर वैश्विक संकेत और बढ़ती जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बीच मंगलवार का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए बेहद दर्दनाक साबित हुआ। सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार बिकवाली देखने को मिली, जिससे महज एक दिन में निवेशकों की संपत्ति से करीब 9 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए।
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Indian Stock Market Crash: शेयर बाजार में दो दिनों की बड़ी गिरावट
भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट का सिलसिला जारी रहा, जिससे बाजार की धारणा (Sentiment) पूरी तरह कमजोर नजर आई।
• सेंसेक्स कारोबार के दौरान 1,098 अंकों तक टूटकर 82,147.52 के निचले स्तर पर पहुंच गया।
• दिन के अंत में सेंसेक्स करीब 960 अंकों की गिरावट के साथ 82,280 के आसपास बंद हुआ।
वहीं दूसरी ओर,
• निफ्टी 50 में भी भारी दबाव देखने को मिला और यह 351 अंकों की गिरावट के साथ 25,235 के स्तर पर बंद हुआ।
तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि अगर बाजार पर ग्लोबल दबाव ऐसे ही बना रहा, तो आने वाले सत्रों में निफ्टी 25,000 या उससे नीचे फिसल सकता है।
Indian Stock Market Crash: सेक्टरवार असर – आईटी, बैंक और मेटल सबसे ज्यादा दबाव में
इस गिरावट का असर लगभग सभी सेक्टर्स पर देखने को मिला, लेकिन कुछ सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे –
• आईटी सेक्टर: कमजोर आउटलुक और डॉलर की अनिश्चितता के कारण आईटी शेयरों में 1% से ज्यादा गिरावट।
• बैंकिंग सेक्टर: सरकारी बैंकों में जोरदार बिकवाली, पीएसयू बैंक इंडेक्स 1% से ज्यादा टूटा।
• मेटल और ऑटो सेक्टर: वैश्विक मांग को लेकर चिंता के चलते इन शेयरों में भी दबाव दिखा।
सेंसेक्स के लगभग सभी बड़े शेयर लाल निशान में बंद हुए, जिससे बाजार की चौड़ाई भी कमजोर रही।
Indian Stock Market Crash: शेयर बाजार टूटने के 10 बड़े कारण
1. ट्रेड वॉर की बढ़ती चिंता
अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ता तनाव निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को कम कर रहा है। ट्रंप की टैरिफ धमकियों ने पुराने ट्रेड वॉर की यादें ताजा कर दी हैं।
2. एफआईआई की ताबड़तोड़ बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने लगातार 10वें सत्र में बिकवाली की। सोमवार को ही ₹3,262 करोड़ के शेयर बेचे गए।
3. तीसरी तिमाही के कमजोर नतीजे
कई कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे बाजार में निराशा फैली।
4. कमजोर वैश्विक संकेत
एशियाई बाजारों जापान, हांगकांग और चीन में गिरावट ने भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया।
5. इंडिया VIX में उछाल
India VIX 4% बढ़कर 12.34 पर पहुंच गया, जो बाजार में डर और अस्थिरता का संकेत है।
6. रुपये में कमजोरी
डॉलर के मुकाबले रुपया 8 पैसे गिरकर 90.98 पर पहुंच गया, जिससे महंगाई और आयात लागत की चिंता बढ़ी।
7. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला
ट्रंप के टैरिफ से जुड़े मामले पर कोर्ट के फैसले का इंतजार बाजार की अनिश्चितता बढ़ा रहा है।
8. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
ब्रेंट क्रूड 64 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है
9. निफ्टी वीकली एक्सपायरी
वीकली एक्सपायरी के चलते डेरिवेटिव सेगमेंट में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
10. सरकारी बैंकों में बिकवाली
पीएसयू बैंकों में मुनाफावसूली और कमजोरी के चलते इंडेक्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
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Indian Stock Market Crash: निवेशकों के डूबे 9 लाख करोड़ रुपये
• बीएसई का कुल मार्केट कैप ₹4.65 लाख करोड़ से घटकर ₹4.57 लाख करोड़ रह गया।
• यानी सिर्फ एक दिन में निवेशकों की संपत्ति से ₹9.02 लाख करोड़ उड़ गए।
• पिछले दो कारोबारी सत्रों में कुल नुकसान ₹11.50 लाख करोड़ से ज्यादा हो चुका है।
यह गिरावट छोटे निवेशकों के साथ-साथ बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए भी बड़ा झटका मानी जा रही है।
Indian Stock Market Crash: आगे बाजार का क्या रहेगा रुख?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। जब तक वैश्विक ट्रेड टेंशन कम नहीं होती, एफआईआई की बिकवाली थमती नहीं और कॉरपोरेट नतीजों में सुधार नहीं दिखता तब तक बाजार में तेज उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें, लंबी अवधि के निवेश पर फोकस करें और शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग में अतिरिक्त सावधानी बरतें।
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