Gold Silver Price: वैश्विक आर्थिक संकेतकों और अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के चलते पिछले सप्ताह सर्राफा बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल बना रहा। मजबूत डॉलर और उम्मीद से बेहतर आए अमेरिकी श्रम आंकड़ों ने Gold Silver Price की तेजी पर ब्रेक लगा दिया। हालांकि सुरक्षित निवेश की मांग के कारण दोनों की कीमतों में पूरी तरह गिरावट नहीं आई, बल्कि सीमित दायरे में कारोबार होता रहा। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक इस समय अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े प्रमुख आंकड़ों और केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति पर पैनी नजर रखे हुए हैं। इसी कारण बाजार में स्पष्ट दिशा की कमी दिखाई दे रही है।
घरेलू बाजार में मिला-जुला रुख
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर पिछले सप्ताह चांदी के वायदा भाव में गिरावट दर्ज की गई। चांदी करीब 5,500 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक फिसली, जो लगभग 2 प्रतिशत की कमजोरी को दर्शाती है। दूसरी ओर सोने में सीमित बढ़त देखने को मिली और यह मामूली मजबूती के साथ बंद हुआ।
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विश्लेषकों के अनुसार, सोने की कीमतों में पहले आई तेज उछाल के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे ऊपरी स्तरों पर दबाव बना रहा। फरवरी 2026 में सोना 1,80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर से फिसलकर करीब 1,53,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास आ गया। यह Gold Silver Price गिरावट बाजार में ब्याज दरों को लेकर बदली उम्मीदों का परिणाम मानी जा रही है।
क्यों Gold Silver Price थमी तेजी?
अमेरिका से आए मजबूत रोजगार आंकड़ों ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। आंकड़ों से संकेत मिला कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूती से आगे बढ़ रही है। ऐसे में निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है। जब ब्याज दरें ऊंची रहने की उम्मीद होती है, तो बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोना और चांदी पर दबाव बढ़ता है। इसके अलावा अमेरिकी जीडीपी और पर्सनल कंजंप्शन एक्सपेंडिचर (PCE) जैसे महंगाई संकेतकों को लेकर भी बाजार सतर्क है। निवेशक इन आंकड़ों के आधार पर आगे की रणनीति तय करना चाहते हैं, जिससे अस्थिरता बढ़ी हुई है।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव
वैश्विक स्तर पर भी सोने और चांदी में तेज हलचल देखने को मिली। कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स में साप्ताहिक आधार पर बढ़त दर्ज हुई, जबकि चांदी ने भी हल्की मजबूती दिखाई। हालांकि पूरे सप्ताह के दौरान कीमतें ऊंचे और निचले स्तरों के बीच झूलती रहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल नए मौलिक संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठकों और अधिकारियों के बयानों से बाजार की दिशा स्पष्ट हो सकती है। तब तक बुलियन में कंसोलिडेशन का दौर जारी रहने की संभावना है।
भारत-चीन की मांग और ETF मुनाफावसूली का असर
एशियाई बाजारों में फिजिकल डिमांड भी कीमतों को प्रभावित कर रही है। भारत और चीन में मौसमी खरीदारी और त्योहारों से पहले की मांग ने सोने को कुछ सहारा दिया। वहीं दूसरी ओर, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) निवेशकों की मुनाफावसूली और डॉलर इंडेक्स की मजबूती ने तेजी को सीमित रखा।
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चांदी पर अतिरिक्त दबाव औद्योगिक धातुओं में आई कमजोरी से भी पड़ा। वैश्विक इक्विटी बाजारों में तकनीकी और एआई शेयरों की बिकवाली ने जोखिम लेने की प्रवृत्ति को कम किया, जिससे निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
आगे क्या रहेगी रणनीति?
विशेषज्ञों का कहना है कि निकट अवधि में Gold Silver Price सीमित दायरे में रह सकते हैं। जब तक अमेरिकी महंगाई, जीडीपी और श्रम बाजार से जुड़े आंकड़ों में स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक बड़ी तेजी या बड़ी गिरावट की संभावना कम है।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति, वैश्विक आर्थिक हालात और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए रखें। अल्पकालिक ट्रेडिंग में उतार-चढ़ाव के अवसर मिल सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों को संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए।
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सुरक्षित निवेश का बना रहेगा महत्व
वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच Gold Silver Price अब भी सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में अपनी अहमियत बनाए हुए हैं। हालांकि मजबूत डॉलर और सख्त मौद्रिक नीति की आशंकाएं इनकी तेजी को सीमित कर सकती हैं।
सर्राफा बाजार इस समय संतुलन की स्थिति में है। आने वाले सप्ताह में अमेरिकी आंकड़े और केंद्रीय बैंक की टिप्पणियां ही तय करेंगी कि Gold Silver Price नई ऊंचाई की ओर बढ़ेंगे या सीमित दायरे में ही कारोबार करते रहेंगे।
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