Gold ETF: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और शेयर बाजार की भारी उठापटक के बीच भारतीय निवेशकों का रुझान तेजी से सोने की ओर बढ़ रहा है। जनवरी महीने में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी Gold ETF में रिकॉर्ड निवेश दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और रुपये में कमजोरी के कारण सोना एक बार फिर सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्प बनकर उभरा है। यही वजह है कि छोटे निवेशक से लेकर बड़े संस्थागत निवेशक तक Gold ETF में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।
Gold ETF बना सुरक्षित निवेश का ठिकाना
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया के ताजा आंकड़ों के अनुसार जनवरी में Gold ETF में 24 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आया। यह आंकड़ा पिछले महीने के मुकाबले लगभग दोगुना है। दिसंबर में Gold ETF में करीब 11 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ था। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि शेयर बाजार में लगातार हो रही गिरावट और वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया है, जिसमें सोना सबसे आगे दिखाई दे रहा है।
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इक्विटी से भी आगे निकला सोने का निवेश
जनवरी में पहली बार ऐसा हुआ जब Gold ETF में निवेश इक्विटी म्यूचुअल फंड से अधिक रहा। इक्विटी फंड में जहां लगभग 24,028 करोड़ रुपये आए, वहीं Gold ETF ने इसे मामूली अंतर से पीछे छोड़ दिया। यह बदलाव बताता है कि निवेशकों की प्राथमिकता धीरे-धीरे बदल रही है। पहले जहां शेयर बाजार को सबसे आकर्षक माना जाता था, वहीं अब सोना पोर्टफोलियो का जरूरी हिस्सा बनता जा रहा है।
वैश्विक तनाव ने बढ़ाई सोने की मांग
वित्तीय सलाहकारों के अनुसार इसके पीछे कई बड़े कारण हैं। मध्य पूर्व और यूरोप में जारी संघर्ष, अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। घरेलू बाजार में भी पिछले कुछ महीनों से भारी अस्थिरता देखने को मिली है। ऐसे माहौल में सोना एक स्थिर और सुरक्षित विकल्प के रूप में उभरा है।
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डिजिटल सोने की ओर बढ़ता भारत
पहले भारतीय परिवारों में सोने का मतलब गहने और सिक्के हुआ करते थे, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। नई पीढ़ी फिजिकल गोल्ड की जगह डिजिटल गोल्ड और Gold ETF को ज्यादा पसंद कर रही है। इसमें सुरक्षा, पारदर्शिता और लिक्विडिटी जैसे कई फायदे मिलते हैं। निवेशक जब चाहें आसानी से इसे खरीद और बेच सकते हैं। यही वजह है कि छोटे शहरों से भी Gold ETF में निवेश तेजी से बढ़ रहा है।
बेहतर रिटर्न ने खींचा ध्यान
पिछले एक साल में सोने ने इक्विटी और डेट जैसे कई एसेट क्लास से बेहतर प्रदर्शन किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें लगातार ऊपरी स्तर पर बनी हुई हैं। घरेलू बाजार में भी सोना रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब पहुंच चुका है। इस मजबूत प्रदर्शन ने निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया है। कई फंड मैनेजर अब पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने की सलाह दे रहे हैं।
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वित्त वर्ष में 61 हजार करोड़ का निवेश
चालू वित्त वर्ष के आंकड़े भी बेहद उत्साहजनक हैं। अब तक Gold ETF में कुल निवेश 61 हजार करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुका है। लगातार निवेश आने से Gold ETF का प्रबंधनाधीन संपत्ति यानी एयूएम भी तेजी से बढ़ा है। जनवरी के अंत तक यह आंकड़ा 1.84 लाख करोड़ रुपये से ऊपर निकल गया, जो एक साल पहले 1.28 लाख करोड़ रुपये था।
आगे भी जारी रह सकता है ट्रेंड
बाजार जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में भी सोने की चमक बरकरार रह सकती है। अगर वैश्विक परिस्थितियां इसी तरह अनिश्चित रहीं तो गोल्ड ETF में निवेश और बढ़ेगा। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि लंबी अवधि में इक्विटी का महत्व कम नहीं होगा। सोना पोर्टफोलियो को स्थिरता देता है, जबकि इक्विटी ग्रोथ का जरिया है।
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छोटे निवेशकों के लिए आसान रास्ता
Gold ETF की खासियत यह है कि इसमें बहुत कम रकम से भी निवेश शुरू किया जा सकता है। न चोरी का डर, न शुद्धता की चिंता और न ही मेकिंग चार्ज। यही कारण है कि सैलरीड क्लास और नए निवेशक तेजी से इस ओर आकर्षित हो रहे हैं। SIP के जरिये भी अब Gold ETF में नियमित निवेश संभव हो गया है।
बदलते आर्थिक माहौल में निवेश का तरीका भी बदल रहा है। सोना एक बार फिर भारतीय निवेशकों का भरोसेमंद साथी बन गया है। गोल्ड ETF के जरिये यह निवेश पहले से ज्यादा आसान, पारदर्शी और सुरक्षित हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि जो निवेशक अपने पोर्टफोलियो को झटकों से बचाना चाहते हैं, उनके लिए Gold ETF एक मजबूत सहारा साबित हो सकता है।
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