BCCL IPO: कोल सेक्टर की दिग्गज सार्वजनिक कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) BCCL IPO की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी इकाई भारत कोकिंग कोल लिमिटेड BCCL IPO 9 जनवरी से अपना बहुप्रतीक्षित आईपीओ लॉन्च करने जा रही है। कंपनी ने इसके लिए रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है। यह BCCL IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत लाया जा रहा है, जिसमें कोल इंडिया अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बाजार में बेचेगी।
ऑफर फॉर सेल के तहत आएगा IPO
BCCL IPO के आईपीओ में किसी भी तरह के नए शेयर जारी नहीं किए जाएंगे। इसके बजाय कोल इंडिया लिमिटेड अपने पास मौजूद कुल 46.57 करोड़ शेयरों को बिक्री के लिए पेश करेगी। यह कंपनी के कुल पेड-अप कैपिटल का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा है। चूंकि यह पूरी तरह OFS है, इसलिए आईपीओ से मिलने वाली पूरी रकम सीधे कोल इंडिया के खाते में जाएगी और भारत कोकिंग कोल को इससे कोई नई पूंजी प्राप्त नहीं होगी।
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निवेशकों के लिए क्या है खास
कंपनी के अनुसार, इस BCCL IPO का मुख्य उद्देश्य शेयर बाजार में लिस्टिंग कराना और बाजार से जुड़कर पारदर्शिता व वैल्यूएशन को मजबूत करना है। इस इश्यू में कर्मचारियों के लिए 2.32 करोड़ शेयर आरक्षित किए गए हैं, जबकि करीब 4.65 प्रतिशत शेयर मौजूदा शेयरधारकों के लिए सुरक्षित रखे गए हैं। एंकर निवेशकों के लिए बुक 8 जनवरी को खुलेगी, जबकि आम निवेशक 9 जनवरी से 13 जनवरी तक बोली लगा सकेंगे। शेयरों का आवंटन 14 जनवरी तक पूरा होने की संभावना है।
16 जनवरी को होगी लिस्टिंग
BCCL IPO प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारत कोकिंग कोल के शेयर 16 जनवरी को BCCL और एनएसई दोनों प्रमुख शेयर बाजारों में सूचीबद्ध होंगे। इसके बाद निवेशक इन शेयरों की खुले बाजार में खरीद-बिक्री कर सकेंगे। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की मजबूत कंपनी होने के कारण यह आईपीओ निवेशकों के बीच खासा आकर्षण पैदा कर सकता है।
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कोयला उत्पादन में BCCL IPO की मजबूत पकड़
भारत कोकिंग कोल लिमिटेड देश की सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक कंपनी मानी जाती है। FY25 में देश में हुए कुल कोयला उत्पादन में कंपनी की हिस्सेदारी करीब 58.50 प्रतिशत रही है। कोल इंडिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी वाली इस कंपनी का प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में लगातार बेहतर रहा है, जिससे निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा है।
1972 में हुई थी स्थापना
BCCL की स्थापना वर्ष 1972 में हुई थी और इसे केंद्र सरकार की ओर से मिनी रत्न का दर्जा प्राप्त है। कंपनी का मुख्यालय झारखंड में स्थित है और इसका संचालन मुख्य रूप से कोकिंग कोल के उत्पादन पर केंद्रित है, जो स्टील उद्योग के लिए बेहद अहम माना जाता है। घरेलू स्तर पर कंपनी का कोई बड़ा प्रतिद्वंद्वी नहीं है, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी तुलना Alpha Metallurgical Resources और Warrior Met Coal जैसी कंपनियों से की जाती है।
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उत्पादन और खदानों का विस्तार
कंपनी का उत्पादन आंकड़ों के लिहाज से भी मजबूत रहा है। FY22 में जहां BCCL का कोयला उत्पादन 3.05 करोड़ टन था, वहीं FY25 तक यह बढ़कर 4.05 करोड़ टन तक पहुंच गया। वर्तमान में कंपनी के पास 34 ऑपरेशनल माइंस का व्यापक नेटवर्क है, जो इसकी उत्पादन क्षमता और स्थिरता को दर्शाता है।
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निवेशकों की नजर में BCCL IPO
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत कोकिंग कोल का BCCL IPO सरकारी क्षेत्र की कंपनियों में निवेश को लेकर निवेशकों के रुझान को दर्शाने वाला अहम संकेतक साबित हो सकता है। मजबूत बैलेंस शीट, बाजार में एकाधिकार जैसी स्थिति और कोयला क्षेत्र में स्थिर मांग के चलते यह आईपीओ दीर्घकालिक निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर बन सकता है। हालांकि, निवेश से पहले बाजार जोखिमों और कंपनी से जुड़ी शर्तों को समझना जरूरी माना जा रहा है।
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