8th Pay Commission: 8th Pay Commission को लेकर केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के बीच नई बहस छिड़ गई है। इस बार चर्चा सिर्फ फिटमेंट फैक्टर या महंगाई भत्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि वेतन गणना के मूल फॉर्मूले में बदलाव की मांग उठ रही है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि फैमिली यूनिट का दायरा 3 से बढ़ाकर 5 कर दिया जाता है, तो न्यूनतम बेसिक वेतन में तकनीकी रूप से करीब 66 प्रतिशत तक वृद्धि संभव हो सकती है। ऐसे में मौजूदा ₹18,000 की न्यूनतम सैलरी बढ़कर लगभग ₹54,000 तक पहुंचने की मांग जोर पकड़ सकती है।
फैमिली यूनिट बढ़ाने की मांग क्यों?
केंद्रीय कर्मचारी संगठनों के मंच National Council (JCM) (NC-JCM) ने 8वें वेतन आयोग के लिए मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी क्रम में नई दिल्ली में बैठकों का दौर चल रहा है, जहां विभिन्न विभागों की मांगों को समेकित कर एक मास्टर मेमोरेंडम तैयार किया जा रहा है।
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कर्मचारी यूनियनों का तर्क है कि 7वें वेतन आयोग के समय न्यूनतम वेतन की गणना 3 सदस्यों की फैमिली यूनिट पर आधारित थी—कर्मचारी, जीवनसाथी और दो बच्चे। लेकिन वर्तमान सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में यह मॉडल अधूरा साबित हो रहा है। बड़ी संख्या में कर्मचारी अपने आश्रित माता-पिता की जिम्मेदारी भी उठाते हैं। इसलिए यूनियन चाहती हैं कि परिवार की परिभाषा में माता-पिता को शामिल कर कुल यूनिट 5 की जाए।
8th Pay Commission, गणित क्या कहता है?
मांग का आधार सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि गणितीय भी है। यदि परिवार की इकाई 3 से बढ़कर 5 की जाती है, तो गणना के आधार में सीधा बदलाव होगा।
5 ÷ 3 = 1.66
इसका अर्थ है कि वेतन निर्धारण का आधार लगभग 66.67 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि यह कोई मनमाना आंकड़ा नहीं, बल्कि गणना पद्धति में बदलाव का सीधा परिणाम है।
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न्यूनतम वेतन पर संभावित असर
फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक वेतन ₹18,000 है। यदि फैमिली यूनिट का प्रस्ताव स्वीकार होता है और उसी अनुपात में संशोधन किया जाता है, तो न्यूनतम वेतन में उल्लेखनीय उछाल देखने को मिल सकता है।
साथ ही कर्मचारी संगठन फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.25 करने की मांग भी रख रहे हैं। फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है जिसके आधार पर पुरानी सैलरी को नई सैलरी में बदला जाता है। यदि न्यूनतम वेतन का आधार बढ़ेगा, तो उच्च फिटमेंट फैक्टर की मांग को भी मजबूती मिलेगी।
पेंशनर्स के लिए क्यों अहम है 8th Pay Commission?
पेंशन की गणना आखिरी बेसिक वेतन के 50 प्रतिशत के आधार पर होती है। इसलिए यदि बेसिक सैलरी में वृद्धि होती है, तो पेंशन भी उसी अनुपात में बढ़ेगी। यही कारण है कि पेंशनर्स संगठन भी इस प्रस्ताव पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
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यदि न्यूनतम वेतन में बड़ा संशोधन होता है, तो लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारियों की मासिक आय पर भी सीधा असर पड़ेगा। अनुमान है कि वेतन आयोग की सिफारिशों से लगभग 1.2 करोड़ कर्मचारी और पेंशनर्स प्रभावित हो सकते हैं।
कर्मचारी संगठन क्या कह रहे हैं?
यूनियनों का कहना है कि बीते वर्षों में महंगाई की रफ्तार तेज रही है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जीवन-यापन की लागत बढ़ी है। स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास जैसे खर्चों में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है।
उनका तर्क है कि 3 यूनिट का मॉडल आज के परिवार की वास्तविक जरूरतों को नहीं दर्शाता। यदि 8th Pay Commission संरचना को वास्तविक सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं बदला गया, तो कर्मचारियों की क्रय शक्ति पर दबाव बना रहेगा।
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अभी क्या है स्थिति?
फिलहाल NC-JCM विभिन्न विभागों से सुझाव लेकर अंतिम प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसे केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा। सरकार फैमिली यूनिट को 5 करने के प्रस्ताव को स्वीकार करेगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
हालांकि इतना तय है कि यदि यह बदलाव मंजूर होता है, तो सिर्फ न्यूनतम वेतन ही नहीं, बल्कि पूरी वेतन संरचना, भत्तों और पेंशन प्रणाली पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है। 8th Pay Commission कर्मचारियों के लिए महज वेतन संशोधन नहीं, बल्कि आर्थिक संतुलन और सामाजिक जिम्मेदारियों को मान्यता देने का अवसर भी माना जा रहा है।
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