Ramanand Sagar Son Death: हिंदी टेलीविजन जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। प्रतिष्ठित निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर के बेटे आनंद सागर का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 13 फरवरी को उन्होंने अंतिम सांस ली। वे पिछले लगभग 15 वर्षों से पार्किंसन जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन से टीवी इंडस्ट्री और लाखों दर्शकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है।
आनंद सागर ने अपने पिता की विरासत को न सिर्फ संभाला बल्कि उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। खासकर कोरोना काल में जब दूरदर्शन पर ‘रामायण’ का पुनः प्रसारण हुआ, तब उसे फिर से लोकप्रिय बनाने में उनका अहम योगदान रहा।
मुंबई में हुआ अंतिम संस्कार
परिवार ने सोशल मीडिया के जरिए उनके निधन की पुष्टि की। जानकारी के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट में शाम 4:30 बजे किया गया।परिवार की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘काफी दुख के साथ सागर परिवार प्रिय आनंद रामानंद सागर के निधन की सूचना देता है। आज (13 फरवरी) उनका निधन हो गया। वो ‘सागर आर्ट्स’ के दूसरे पीढ़ी के प्रबंधन में शामिल थे। उनकी आत्मा को शांति मिले. ओम शांति.’ (Ramanand Sagar Son Death: )
15 साल से पार्किंसन बीमारी से जूझ रहे थे
आनंद सागर लंबे समय से पार्किंसन रोग से पीड़ित थे, जो एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। पिछले डेढ़ दशक से वे इस बीमारी से संघर्ष कर रहे थे। अंततः वे जिंदगी की इस जंग को हार गए। भारत के सबसे प्रतिष्ठित टीवी शो ‘रामायण’ को घर-घर तक पहुंचाने में जहां रामानंद सागर का योगदान था, वहीं आनंद सागर ने भी इस विरासत को जीवित रखा। कोरोना महामारी के दौरान जब पूरे देश में लॉकडाउन लगा था, तब ‘रामायण’ को दोबारा प्रसारित किया गया। उस समय इस शो ने 1987 की तरह ही रिकॉर्ड तोड़ लोकप्रियता हासिल की। इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने में आनंद सागर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। (Ramanand Sagar Son Death: )

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हमेशा याद किए जाएंगे आनंद सागर
टीवी इंडस्ट्री और दर्शकों के लिए आनंद सागर का जाना एक बड़ी क्षति है। उन्होंने न सिर्फ अपने पिता की विरासत को संभाला बल्कि भारतीय टेलीविजन संस्कृति को मजबूत बनाने में भी योगदान दिया। (Ramanand Sagar Son Death: )



