Jana Nayagan Censor Row: तमिल सुपरस्टार थलपति विजय की आख़िरी फिल्म मानी जा रही ‘जन नायगन’ एक बार फिर कानूनी विवादों के केंद्र में है। फिल्म के सेंसर सर्टिफिकेट को लेकर CBFC (केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड) और मेकर्स के बीच चल रही टकरावपूर्ण लड़ाई पर मद्रास हाईकोर्ट में करीब 5 घंटे तक लंबी सुनवाई हुई, जिसके बाद अदालत ने अपना आदेश रिजर्व कर लिया है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या CBFC ने सिनेमैटोग्राफ एक्ट और नियमों के तहत तय प्रक्रिया का पालन किया, और क्या बोर्ड को एक बार लिए गए फैसले को वापस लेने या रिव्यू के लिए भेजने का अधिकार है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो ‘जन नायगन’ की रिलीज़ की दिशा तय करेगा।
Jana Nayagan Censor Row- क्या है पूरा मामला?
विवाद की जड़ 5 जनवरी को CBFC द्वारा भेजे गए उस संदेश से जुड़ी है, जिसमें फिल्म को रीवाइजिंग कमेटी के पास भेजने की बात कही गई थी। मेकर्स का दावा है कि इससे पहले फिल्म को सर्टिफिकेशन देने का फैसला हो चुका था और जरूरी कट्स भी किए जा चुके थे। वहीं CBFC का कहना है कि यह सिर्फ एक अंतरिम प्रक्रिया थी, अंतिम आदेश नहीं।

‘निर्माताओं को तत्काल राहत का अधिकार नहीं’
CBFC की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ए.आर.एल. सुंदरसन ने दलील दी कि 5 जनवरी को भेजा गया संदेश कोई अंतिम आदेश नहीं था, बल्कि एक अस्थायी कदम था।’ उन्होंने कहा कि एग्ज़ामिनिंग कमेटी ने 14 कट्स सुझाए थे, जिसके बाद मामला बोर्ड के पास गया। इसी दौरान एक शिकायत सामने आई, जिसके चलते सर्टिफिकेशन को होल्ड पर रखा गया। CBFC ने यह भी तर्क दिया कि रिट याचिका में मांगी गई राहत से आगे जाकर सिंगल जज ने आदेश दिया, जो कानूनी रूप से सही नहीं है।
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Jana Nayagan Censor Row- निर्माताओं का पलटवार
फिल्म के निर्माताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट सतीश पराशरण ने कोर्ट में कहा कि CBFC एग्ज़ामिनिंग कमेटी की सर्वसम्मत सिफारिश के बाद फिल्म को सर्टिफिकेट देने का फैसला कर चुका था।’ उनका दावा है कि 5 जनवरी को मैसेज मिला और 6 जनवरी को ई-सिनेप्रमाण पोर्टल पर फैसला अपलोड भी कर दिया गया। ऐसे में बिना सुनवाई का मौका दिए उस फैसले को वापस लेना या रिव्यू के लिए भेजना नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि CBFC के कई आंतरिक दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड ही नहीं किए गए।
Jana Nayagan Censor Row– कोर्ट के सामने सबसे बड़ा सवाल
लंबी बहस के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि उसे यह तय करना होगा कि क्या CBFC को सर्टिफिकेशन देने के बाद फिल्म को रीवाइजिंग कमेटी के पास भेजने का अधिकार है? क्या निर्माताओं को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय दिया गया? और क्या सिंगल जज का आदेश रिट याचिका की सीमा में था? कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि क्या यह मामला एक ही दिन में निपटाया जाना उचित था, या फिर इसमें प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ।
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फैसला सुरक्षित, सबकी नजरें हाईकोर्ट पर
करीब 5 घंटे की सुनवाई के बाद मद्रास हाईकोर्ट ने ‘जन नायगन’ सेंसर विवाद पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। फिलहाल कोई तारीख तय नहीं की गई है। अब CBFC और फिल्म के निर्माताओंदोनों को कोर्ट के अंतिम आदेश का इंतजार है, जो यह तय करेगा कि थलपति विजय की यह फिल्म कब और किस रूप में रिलीज़ होगी।



