Nishant Kumar: बिहार की राजनीति में रविवार को एक नए युग का सूत्रपात हुआ। मुख्यमंत्री और जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के बेटे Nishant Kumar औपचारिक रूप से जनता दल यूनाइटेड (JDU) में शामिल हो गए। दशकों तक ‘परिवारवाद’ के खिलाफ मुखर रहने वाले नीतीश कुमार के इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। निशांत की यह एंट्री ऐसे समय में हुई है जब नीतीश कुमार दो दशकों तक बिहार की सत्ता संभालने के बाद अब मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने की तैयारी कर रहे हैं।
जदयू की सदस्यता ग्रहण करने के बाद एक इंजीनियर की शिक्षा प्राप्त Nishant Kumar ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अपने इरादे स्पष्ट कर दिए। उन्होंने कहा, ‘मैं एक सक्रिय सदस्य के रूप में पार्टी की देखभाल करने की कोशिश करूंगा। मेरे पिता ने राज्यसभा जाने का फैसला किया है, यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है और मैं इसका स्वागत करता हूं। हम उनके मार्गदर्शन में काम करेंगे और संगठन को मजबूत करेंगे।’ वरिष्ठ नेताओं ने निशांत का स्वागत करते हुए इसे कार्यकर्ताओं की इच्छा का सम्मान बताया है।
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Nishant Kumar के राजनीति में आने के साथ ही यह कयास तेज हो गए हैं कि उन्हें भाजपा-जदयू गठबंधन वाली नई सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि नीतीश कुमार के ऊपरी सदन (राज्यसभा) में जाने के बाद बिहार में पहली बार भाजपा का अपना मुख्यमंत्री हो सकता है। ऐसे में जदयू के अस्तित्व को बचाए रखने और वोट बैंक को साधे रखने के लिए निशांत को बड़ी जिम्मेदारी मिलना लगभग तय माना जा रहा है।
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नीतीश कुमार का ‘संसदीय चौक’ पूरा करने का सपना
75 वर्षीय नीतीश कुमार, जिन्हें ‘सुशासन बाबू’ के नाम से जाना जाता है, ने 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। अपनी इस पारी के पीछे का तर्क देते हुए उन्होंने कहा कि वे संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) और राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) का सदस्य बनने का दुर्लभ रिकॉर्ड बनाना चाहते थे। यह उपलब्धि हासिल करने के बाद वे लालू यादव और स्वर्गीय सुशील मोदी जैसे दिग्गज नेताओं की श्रेणी में शामिल हो जाएंगे। (Nishant Kumar)
RJD बोले- ‘नीतीश बने देसी मादुरो’
मुख्य विपक्षी दल आरजेडी ने इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा द्वारा किया गया ‘राजनीतिक अपहरण’ करार दिया है। आरजेडी सांसद मनोज झा ने नीतीश कुमार की तुलना वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से करते हुए इसे ‘सहमति के साथ अपहरण’ बताया। मनोज झा ने कहा, ‘तेजस्वी यादव पहले ही कह चुके थे कि नीतीश कुमार ‘अस्थायी मुख्यमंत्री’ हैं। 21 साल तक सीएम रहने वाला व्यक्ति अब राज्यसभा जाना चाहता है, यह तर्क बचकाना है। बीजेपी ने महाराष्ट्र वाला मॉडल बिहार में थोड़ा बदलकर लागू किया है।’ (Nishant Kumar)
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परिवारवाद पर छिड़ी बहस
दशकों तक लाइमलाइट से दूर रहे निशांत कुमार का अचानक राजनीति में आना नीतीश कुमार की उस विचारधारा पर सवाल उठा रहा है, जिसमें वे हमेशा लालू परिवार और कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि, जदयू समर्थकों का तर्क है कि निशांत एक शिक्षित प्रोफेशनल हैं और उनका आना पार्टी की मजबूती के लिए अनिवार्य था। अब देखना यह होगा कि क्या निशांत बिहार की जटिल जातिगत राजनीति में अपने पिता जैसी पैठ बना पाते हैं या नहीं। (Nishant Kumar)



