Tirumala Darshan Rules: आंध्र प्रदेश सरकार ने तिरुमाला श्री वेंकटेश्वर मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए दर्शन नियमों को और सख्त करने का फैसला किया है। सरकार ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब से सभी निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए। सबसे अहम बदलाव यह है कि यदि कोई गैर-हिंदू व्यक्ति भगवान के दर्शन (Tirumala Darshan Rules) करना चाहता है, तो उसे पहले एक औपचारिक घोषणा पत्र देना अनिवार्य होगा। अब तक यह नियम कागजों में मौजूद था, लेकिन उसका सख्ती से पालन नहीं हो रहा था।
घोषणा पत्र क्यों बना मुद्दा?
तिरुमाला मंदिर प्रशासन के नियमों के अनुसार, गैर-हिंदू श्रद्धालुओं को यह लिखित रूप में घोषित करना होता है कि वे मंदिर की आस्था और परंपराओं का सम्मान करते हैं। हालांकि व्यवहार में कई लोग बिना घोषणा पत्र दिए ही दर्शन (Tirumala Darshan Rules) कर लेते थे। सरकार का मानना है कि हाल के विवादों के बाद मंदिर की पवित्रता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सख्त संदेश देना जरूरी हो गया है। इसलिए अब इस नियम को अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्णय लिया गया है।
Read More: ड्राइवर बने मालिक, अमित शाह का ‘भारत टैक्सी’ मॉडल बदलेगा राइड-हेलिंग बाजार का गणित
विधानसभा में गरमाया तिरुमाला लड्डू विवाद
इन फैसलों के पीछे तिरुमाला लड्डू (Tirumala Darshan Rules) में कथित मिलावट का विवाद भी अहम कारण माना जा रहा है। पिछले एक वर्ष से यह मुद्दा राज्य की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। एसआईटी जांच में घी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे और मिलावट की पुष्टि होने की बात सामने आई। हालांकि विपक्षी दल वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कोई मिलावट नहीं हुई। वर्तमान में विधानसभा सत्र के दौरान यह मुद्दा सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस का कारण बना हुआ है।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू की बैठक और नए कानून की तैयारी
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंत्रियों और अधिकारियों के साथ विशेष बैठक की। बैठक में तिरुमाला में किसी भी प्रकार की अनियमितता रोकने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्वर्ण मंदिर (Tirumala Darshan Rules) से जुड़े अधिनियम का अध्ययन करने का निर्देश दिया। सरकार अब स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर तिरुमाला के लिए भी एक विशेष कानून लाने की योजना बना रही है। यदि यह कानून लागू होता है, तो मंदिर प्रशासन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या नियम उल्लंघन पर आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान किया जा सकेगा।
क्या बदल सकता है नया कानून?
सरकार के सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित कानून में निम्न बिंदुओं पर जोर दिया जा सकता है-
- दर्शन व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन
- प्रसाद निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण के सख्त मानक
- धार्मिक परंपराओं के उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधान
- प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की स्पष्ट व्यवस्था
विधेयक का मसौदा तैयार होने के बाद इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा। पारित होने पर यह तिरुमाला प्रशासन के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करेगा।
आस्था और राजनीति के बीच संतुलन
तिरुमाला केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था (Tirumala Darshan Rules) का केंद्र है। हर वर्ष लाखों भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में मंदिर की पवित्रता और व्यवस्थाओं को लेकर कोई भी विवाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक प्रभाव डालता है। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि मंदिर की धार्मिक परंपराओं की रक्षा करना है। वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक कदम करार दे रहा है।
आगे क्या?
अब सबकी निगाहें उस विधेयक पर टिकी हैं, जिसे सरकार विधानसभा में पेश करने की तैयारी कर रही है। यदि यह कानून पारित होता है, तो तिरुमाला मंदिर प्रशासन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। घोषणा पत्र अनिवार्य करने से लेकर नए सख्त कानून तक आंध्र प्रदेश सरकार (Tirumala Darshan Rules) ने साफ संकेत दे दिया है कि तिरुमाला की पवित्रता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति और धार्मिक विमर्श दोनों में प्रमुख बना रह सकता है।
Also read: CBSE छात्रों के लिए कैम्ब्रिज का दरवाज़ा खुला, अब 12वीं के अंकों से मिल सकेगा दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी में मौका



