Spiritual De-addiction Temple: आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के एक छोटे से गांव उन्थाकल्लू में स्थित पांडुरंगा स्वामी मंदिर इन दिनों खास चर्चा में है। यह मंदिर अब केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं रह गया है, बल्कि यहां लोग शराब की लत से छुटकारा पाने की उम्मीद लेकर आते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर कोई व्यक्ति यहां आकर तुलसी की माला धारण करता है और 41 दिनों तक विशेष नियमों का पालन करता है, तो धीरे-धीरे उसकी शराब की आदत खत्म हो सकती है। यही वजह है कि यह मंदिर अब Spiritual De-addiction और Faith Healing का एक अनोखा उदाहरण बनता जा रहा है।
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Spiritual De-addiction Temple: मंदिर की स्थापना और बढ़ती पहचान
इस मंदिर का निर्माण करीब दो दशक पहले यानी 2005 में हुआ था। शुरुआत में यह एक साधारण धार्मिक स्थल था, लेकिन धीरे-धीरे यहां से जुड़ी एक परंपरा ने इसे अलग पहचान दिला दी। गांव के बुजुर्गों और पुजारियों का कहना है कि यहां आने वाले लोग तुलसी की माला पहनकर भगवान पांडुरंगा के सामने नशा छोड़ने का संकल्प लेते हैं। माना जाता है कि यह संकल्प व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है और उसे शराब से दूर रहने की प्रेरणा देता है। समय के साथ यह परंपरा आसपास के जिलों और दूसरे राज्यों तक फैल गई।
Spiritual De-addiction Temple: 41 दिन की कठिन लेकिन प्रभावी दीक्षा
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को 41 दिनों की विशेष दीक्षा लेनी होती है। इस दौरान उन्हें सादगीपूर्ण जीवन जीना पड़ता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करना, नियमित पूजा और भजन करना, सात्विक भोजन करना और जमीन पर सोना जैसे नियमों का पालन करना अनिवार्य माना जाता है। साथ ही शराब और अन्य नशे से पूरी तरह दूर रहना पड़ता है। मंदिर से जुड़े लोग कहते हैं कि इस दौरान व्यक्ति का शरीर और मन दोनों धीरे-धीरे बदलने लगते हैं। कई लोगों का कहना है कि इस अनुशासन के कारण उनके मन में शराब पीने की इच्छा ही खत्म हो गई।
Spiritual De-addiction Temple: हजारों लोगों की बदली जिंदगी
मंदिर से जुड़े लोगों का दावा है कि यहां आने वाले कई लोगों की जिंदगी इस प्रक्रिया के बाद बदल चुकी है। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो पहले लंबे समय से शराब के आदी थे और उनके परिवार भी इससे परेशान थे। कई परिवारों की आर्थिक स्थिति भी खराब हो चुकी थी। लेकिन जब इन लोगों ने यहां आकर माला पहनकर 41 दिनों की दीक्षा पूरी की, तो उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई दिया। मंदिर के सेवकों का कहना है कि यह बदलाव केवल शरीर में नहीं बल्कि सोच और व्यवहार में भी दिखाई देता है।
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Spiritual De-addiction Temple: एकादशी पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
मंदिर में हर महीने एकादशी के दिन खास आयोजन होता है। इस दिन हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और दीक्षा लेने के लिए माला धारण करते हैं। आंध्र प्रदेश के अलावा कर्नाटक और महाराष्ट्र से भी लोग यहां आते हैं। मंदिर परिसर में भजन, कीर्तन और प्रार्थना का वातावरण रहता है, जो लोगों के मन को शांत करता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस माहौल से उन्हें मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास मिलता है, जिससे वे नशे से दूर रहने में सफल होते हैं।
Spiritual De-addiction Temple: आस्था से जीवनशैली में बड़ा बदलाव
मंदिर की यह परंपरा केवल शराब छोड़ने तक सीमित नहीं है। यहां आने वाले लोग बताते हैं कि 41 दिनों की यह साधना उनके पूरे जीवन को बदल देती है। नियमित प्रार्थना, सात्विक भोजन और अनुशासित दिनचर्या से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं। धीरे-धीरे व्यक्ति में आत्मसंयम और धैर्य बढ़ता है। इसी कारण अब यह छोटा सा गांव देशभर में Addiction Recovery और Holistic Healing के एक अनोखे उदाहरण के रूप में पहचाना जाने लगा है।
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