देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पुलिस मुख्यालय परिसर में हर्षोल्लास और गरिमामय माहौल में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। इस अवसर पर अपर पुलिस आयुक्त (मुख्यालय एवं अपराध) श्री केशव कुमार चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली।
समारोह में उमड़ा जोश, गूंजे राष्ट्रगान के स्वर
ध्वजारोहण के तुरंत बाद राष्ट्रगान की धुन बजते ही पूरा परिसर देशभक्ति के रंग में रंग गया। बड़ी संख्या में मौजूद पुलिसकर्मियों और अधिकारियों ने पूरे अनुशासन के साथ इस ऐतिहासिक क्षण में भागीदारी की। कार्यक्रम के दौरान परिसर को तिरंगे झंडों, बैनरों और रोशनी से आकर्षक ढंग से सजाया गया था, जिसने समारोह की गरिमा को और बढ़ा दिया।
अधिकारी ने पुलिसकर्मियों को दिलाई कर्तव्य-निष्ठा की शपथ
समारोह के दौरान अपर पुलिस आयुक्त श्री केशव कुमार चौधरी ने समस्त उपस्थित पुलिसकर्मियों को राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा हेतु सदैव तत्पर रहने की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पुलिसकर्मी को अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करना चाहिए, ताकि जनता का पुलिस बल पर विश्वास और मजबूत हो सके।
जनसेवा को बताया पुलिस बल का सर्वोच्च धर्म
अपने संबोधन में श्री चौधरी ने जनसेवा को पुलिस विभाग का मूल कर्तव्य बताते हुए कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान ही पुलिस बल की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने पुलिसकर्मियों से अपील की कि वे विषम परिस्थितियों में भी संयम, साहस और व्यावसायिकता का परिचय दें, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने में और अधिक प्रभावशीलता आए।
स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों का किया स्मरण
कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के त्याग और बलिदान को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। अधिकारी ने कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं, वह अनगिनत वीरों के बलिदान का परिणाम है, और उनके सपनों का भारत बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
अनुशासन और समर्पण के साथ संपन्न हुआ कार्यक्रम
समारोह का समापन पूर्ण अनुशासन और उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। इस अवसर पर विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और स्टाफ सदस्य भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने न केवल राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ किया, बल्कि पुलिस बल के भीतर एकता और कर्तव्य-बोध को भी नई ऊर्जा प्रदान की।


