एक मैसेज, एक APK और लाखों का नुकसान
सूरत पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो WhatsApp के जरिए फर्जी APK फाइलें भेजकर लोगों को ठग रहा था। ये मैसेज बैंक, RTO चालान या सरकारी योजनाओं के नाम पर भेजे जाते थे, जिससे लोग आसानी से भरोसा कर फाइल इंस्टॉल कर लेते थे। इंस्टॉल होते ही मोबाइल हैक हो जाता था और आरोपी बैंकिंग जानकारी चुराकर खाते खाली कर देते थे।
जांच में सामने आया बड़ा नेटवर्क
मामला तब खुला जब एक पीड़ित ने 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद सूरत पुलिस ने संदिग्ध APK फाइल की तकनीकी जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क से जुड़ी 336 APK फाइलें अब तक 31 हजार से अधिक मोबाइल डिवाइस में इंस्टॉल हो चुकी थीं, जिनमें से करीब 5,600 डिवाइस पूरी तरह हैक कर लिए गए थे। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए कुल मिलाकर करीब 125 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया।
कानपुर से गिरफ्तार हुआ APK डेवलपर
जांच की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस उत्तर प्रदेश के कानपुर तक पहुंची, जहां से 18 वर्षीय APK डेवलपर रोहित को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि यही युवक फर्जी APK फाइलें तैयार कर आगे गिरोह को सप्लाई करता था।
जामताड़ा से पटना तक फैला जाल
नेटवर्क की मुख्य कड़ी माने जाने वाले जहुरुल अंसारी उर्फ चांद को पुलिस ने ट्रेन यात्रा के दौरान ट्रैक किया। जांच में पता चला कि आरोपी जामताड़ा से देवघर और फिर पटना तक अपना नेटवर्क फैलाए हुए था। पुलिस ने 35 वर्षीय जहुरुल अंसारी सहित एक 19 वर्षीय युवक को भी हिरासत में लिया है।
RTO चालान के नाम पर सबसे ज्यादा ठगी
पुलिस जांच के मुताबिक, गिरोह ने सबसे ज्यादा इस्तेमाल RTO चालान के नाम की फर्जी APK फाइलों का किया। अकेले चांद से जुड़ी 59 RTO चालान APK फाइलें करीब 11,056 डिवाइस में इंस्टॉल पाई गईं। इससे पहले भी झारखंड से एक 26 वर्षीय छात्र को MGL के नाम पर फर्जी APK के जरिए 63 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।
सतर्क रहने की जरूरत
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अनजान नंबर से आई किसी भी APK फाइल को इंस्टॉल करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर कर लें। बैंक या सरकारी संस्थाएं कभी भी WhatsApp पर सीधे APK फाइल नहीं भेजतीं। ऐसे किसी भी मैसेज की सूचना तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर दी जानी चाहिए।


