उत्तर प्रदेश और पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ने और आम लोगों तक बेहतर सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा Digital Health Mission और यू-विन पोर्टल जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का मकसद स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुलभ और प्रभावी बनाना है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई चुनौतियां इनके सफल क्रियान्वयन में बाधा बन रही हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमजोरी, बिजली कटौती और डिजिटल संसाधनों की कमी के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस Mission के सामने ग्रामीण इलाकों की चुनौतियां
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट नेटवर्क की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है। कई गांवों में मोबाइल नेटवर्क कमजोर रहता है, जिससे ऑनलाइन पोर्टल पर डेटा अपलोड करने और स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड तैयार करने में दिक्कत होती है। इसके अंतर्गत बनाए जाने वाले आभा कार्ड और अन्य डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं इसी कारण प्रभावित हो रही हैं।
सांसद नीरज मौर्य द्वारा उठाए गए सवाल में भी इस समस्या को प्रमुखता से सामने रखा गया है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति पर चिंता जताई। उनके अनुसार नेटवर्क की समस्या के कारण स्वास्थ्यकर्मियों और लाभार्थियों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं का डिजिटलीकरण तभी सफल हो सकता है, जब बुनियादी सुविधाएं मजबूत हों। वर्तमान में कई क्षेत्रों में नेटवर्क बाधित होने या सर्वर संबंधी तकनीकी समस्याओं के चलते गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण समय पर नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा बच्चों के टीकाकरण से जुड़ा डेटा भी कई बार समय पर अपडेट नहीं हो पाता।
स्वास्थ्य रिकॉर्ड को ऑनलाइन सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई है, लेकिन इंटरनेट की उपलब्धता न होने पर यह प्रक्रिया प्रभावित होती है। इससे लाभार्थियों को योजनाओं का पूरा लाभ मिलने में देरी हो सकती है।
गरीब परिवार सबसे अधिक प्रभावित
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के पास अक्सर स्मार्टफोन और स्थायी इंटरनेट सुविधा उपलब्ध नहीं होती। ऐसे परिवारों को आभा कार्ड बनवाने, पंजीकरण कराने और स्वास्थ्य रिकॉर्ड अपडेट कराने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों या अन्य लोगों पर निर्भर रहना पड़ता है।
जब तकनीकी दिक्कतें सामने आती हैं, तब इन परिवारों को अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ती है। कई प्रक्रियाएं ऑनलाइन होने के कारण गरीब और वंचित वर्ग सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने के बजाय कई बार तकनीकी बाधाएं नई मुश्किलें खड़ी कर देती हैं।
मजबूत डिजिटल ढांचा जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू कर देने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावी नहीं बन सकतीं। इसके लिए गांवों में उच्च गुणवत्ता वाला इंटरनेट नेटवर्क, निर्बाध बिजली आपूर्ति, पर्याप्त डिजिटल उपकरण और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता आवश्यक है।
यदि इन बुनियादी कमियों को दूर नहीं किया गया तो इसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना चुनौती बना रहेगा। सरकार की मंशा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की है, लेकिन इसके लिए जमीनी स्तर पर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है।
Mission को सफल बनाने के लिए जरूरी कदम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क टावरों की संख्या बढ़ाने, बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने और स्वास्थ्यकर्मियों को तकनीकी प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है। साथ ही डिजिटल पोर्टल्स को अधिक सरल और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया जाना चाहिए ताकि आम नागरिक बिना किसी कठिनाई के सेवाओं का लाभ उठा सकें।
ये Mission देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है, लेकिन इसकी सफलता मजबूत डिजिटल आधारभूत संरचना पर निर्भर करेगी। जब तक गांवों में इंटरनेट और तकनीकी सुविधाएं पर्याप्त नहीं होंगी, तब तक इस महत्वाकांक्षी योजना का पूरा लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना आसान नहीं होगा।
बरेली | रिपोर्ट: सुमित श्रीवास्तव


