Diljit Dosanjh Satluj Movie: दिलजीत दोसांझ की चर्चित फिल्म ‘सतलुज’ एक बार फिर सुर्खियों में है। ओटीटी प्लेटफॉर्म Zee5 पर रिलीज होने के महज दो दिन बाद फिल्म को हटाए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है। अब इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से बड़ा कदम उठाए जाने की खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार, फिल्म से जुड़े पूरे विवाद की समीक्षा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 के तहत गठित अंतर-विभागीय समिति द्वारा की जाएगी।
फिल्म को लेकर उठे सवालों ने न सिर्फ मनोरंजन जगत बल्कि डिजिटल कंटेंट रेगुलेशन को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। ‘सतलुज’ की जांच के फैसले के बाद यह मामला अब केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाले कंटेंट (Diljit Dosanjh Satluj Movie) की निगरानी और जवाबदेही से भी जुड़ गया है।
Zee5 से हटने के बाद बढ़ा विवाद
दिलजीत दोसांझ अभिनीत ‘सतलुज’ 3 जुलाई को Zee5 पर रिलीज हुई थी। लेकिन रिलीज के कुछ ही समय बाद यह फिल्म प्लेटफॉर्म से हटा ली गई। इस फैसले के पीछे सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिया गया था। फिल्म हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ा, जबकि अन्य ने संवेदनशील विषयों पर आधारित (Diljit Dosanjh Satluj Movie) कंटेंट को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत बताई।
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अब अंतर-विभागीय समिति करेगी जांच
सूत्रों के अनुसार, अब इस पूरे मामले की जांच सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत गठित अंतर-विभागीय समिति करेगी। यह समिति डिजिटल समाचार प्रकाशकों और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कंटेंट से जुड़ी शिकायतों की समीक्षा करती है। जांच पूरी होने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यही वजह (Diljit Dosanjh Satluj Movie) है कि अब फिल्म उद्योग और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े लोग इस मामले पर करीब से नजर बनाए हुए हैं।
कमेटी के पास क्या हैं अधिकार?
आईटी नियमों के तहत गठित समिति केवल शिकायतों की जांच ही नहीं करती, बल्कि आवश्यक होने पर कई तरह की सिफारिशें भी कर सकती है। जांच के बाद समिति माफी मांगने, स्पष्टीकरण जारी करने, कंटेंट में संशोधन करने या कुछ हिस्सों को हटाने जैसी सलाह दे सकती है। यदि मामला गंभीर पाया जाता है, तो कंटेंट को पूरी तरह हटाने या ब्लॉक करने की सिफारिश भी की जा सकती है। यानी ‘सतलुज’ (Diljit Dosanjh Satluj Movie) मामले में समिति की रिपोर्ट आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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CBFC और OTT प्लेटफॉर्म के नियमों में अंतर
सिनेमा घरों में रिलीज होने वाली फिल्मों को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होता है। लेकिन ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाले कंटेंट पर अलग नियम लागू होते हैं।
ओटीटी कंटेंट को आईटी नियम, 2021 के पार्ट-III के तहत रेगुलेट किया जाता है। यही कारण है कि ‘सतलुज’ से जुड़ा मामला CBFC के बजाय डिजिटल मीडिया नियमन के दायरे (Diljit Dosanjh Satluj Movie) में देखा जा रहा है।
‘पंजाब 95’ से ‘सतलुज’ तक का सफर
यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित बताई जाती है। शुरुआत में इसे ‘पंजाब 95’ नाम से सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना थी। हालांकि, फिल्म को लेकर CBFC ने लगभग 100 कट्स के सुझाव दिए थे। इसके बाद फिल्म की रिलीज प्रक्रिया लंबी खिंच गई। बाद में निर्माताओं ने फिल्म का नाम बदलकर ‘सतलुज’ कर दिया और इसे सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म (Diljit Dosanjh Satluj Movie) पर रिलीज किया गया।
आगे क्या हो सकता है?
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि मामले की विस्तृत समीक्षा जरूरी है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि फिल्म के प्रसारण में किसी नियम का उल्लंघन हुआ है या नहीं। फिलहाल ‘सतलुज’ को लेकर दर्शकों, फिल्म उद्योग और डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगाहें सरकार की समिति पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में समिति की रिपोर्ट यह तय करेगी कि फिल्म दोबारा उपलब्ध होगी, उसमें बदलाव (Diljit Dosanjh Satluj Movie) किए जाएंगे या फिर कोई अन्य कार्रवाई की जाएगी।
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