Chhattisgarh Cooperative Conference के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सहकारिता केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि किसानों और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक प्रगति का सबसे मजबूत माध्यम है। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मंडपम में आयोजित राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन एवं सहकारी सप्ताह कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुई “सहकार से समृद्धि” की सोच अब जमीन पर दिखाई देने लगी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार सहकारिता के माध्यम से किसानों, वनवासियों, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी पूरा होगा, जब गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और इसमें सहकारिता की सबसे बड़ी भूमिका रहेगी।
Chhattisgarh Cooperative Conference में सीएम ने साझा किया अपना अनुभव
Chhattisgarh Cooperative Conference में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने किसान परिवार से जुड़े अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका बचपन सहकारिता व्यवस्था को करीब से देखते हुए बीता है। उन्होंने कहा कि किसान का बेटा होने के नाते वे जानते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी समितियों का कितना महत्व है।
उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र में सहकारिता मंत्रालय का गठन किया, तब यह केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं था, बल्कि किसानों और ग्रामीण समाज को नई ताकत देने वाला ऐतिहासिक निर्णय था। इससे देशभर में सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा मिली है।
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किसानों की आय बढ़ाने में निभा रही अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाना भी है। उन्होंने बताया कि सहकारिता व्यवस्था के जरिए किसानों को आसान और सस्ता ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पहले किसानों को खेती के लिए 16 से 18 प्रतिशत ब्याज पर ऋण लेना पड़ता था, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता था। अब किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को बिना ब्याज ऋण दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार इस वर्ष राज्य के 15 लाख से अधिक किसानों को 8 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कृषि ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिससे खेती-किसानी के लिए वित्तीय सहायता पहले की तुलना में अधिक आसान हुई है।
Chhattisgarh Cooperative Conference में ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर विशेष जोर
Chhattisgarh Cooperative Conference के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारिता का दायरा केवल खेती तक सीमित नहीं है। पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, वनोपज संग्रहण और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारी मॉडल तेजी से मजबूत हो रहा है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से राज्य में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार पशुपालकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ डेयरी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी तैयार कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण परिवारों की आय के स्रोत बढ़ाने के लिए सरकार बहुआयामी योजनाओं पर काम कर रही है।
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ऑनलाइन पोर्टल से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सहकारिता विभाग के नए ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ भी किया।
उन्होंने बताया कि इस पोर्टल के माध्यम से किसानों का पंजीकरण पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से किया जाएगा। इससे किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।
सरकार का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था से भ्रष्टाचार कम होगा और किसानों तक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचेगा।
तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिली बड़ी सौगात
Chhattisgarh Cooperative Conference के दौरान मुख्यमंत्री ने संग्रहण वर्ष 2023 के 7.14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 162 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि के वितरण की शुरुआत भी की।
इसके अलावा उत्कृष्ट कार्य करने वाली सहकारी समितियों को “सहकार प्रेरणा पुरस्कार” देकर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे अन्य समितियों को भी बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी।
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सहकारिता मंत्री ने गिनाईं उपलब्धियां
राज्य के सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूरे होना पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि 29 जून से 6 जुलाई तक पूरे प्रदेश में सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में सहकारिता क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं और आने वाले वर्षों में यही मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेगा।
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ग्रामीण विकास और रोजगार पर रहेगा फोकस
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सहकारिता व्यवस्था केवल किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण युवाओं, महिला समूहों और छोटे उद्यमियों को भी नए अवसर मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ें, स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिले और किसानों की आय लगातार बढ़ती रहे। इसके लिए सहकारी समितियों को तकनीक और डिजिटल सेवाओं से जोड़ने का काम तेजी से किया जा रहा है।
Chhattisgarh Cooperative Conference से मिला विकास का संदेश
Chhattisgarh Cooperative Conference ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सहकारिता को विकास की मुख्य धुरी बना रही है। किसानों को आसान ऋण, डिजिटल सेवाएं, डेयरी विकास, तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रोत्साहन राशि और महिला समूहों को सशक्त बनाने जैसी पहलें इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सहकारी संस्थाओं को इसी तरह मजबूत किया गया, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ कृषि, ग्रामीण उद्यमिता और रोजगार के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है। Chhattisgarh Cooperative Conference में सरकार ने साफ संकेत दिया कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना किसानों और सहकारिता की मजबूती से ही साकार होगा।
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