Ambala Borewell Incident: हरियाणा के अंबाला जिले के धनौरा गांव में खुले बोरवेल में गिरे चार वर्षीय मासूम निरवैर सिंह (Ambala Borewell Incident) को बचाने के लिए प्रशासन, एनडीआरएफ और अन्य बचाव दलों ने लगभग 19 से 20 घंटे तक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद मासूम की जान नहीं बचाई जा सकी। बोरवेल से बाहर निकालने के बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस दर्दनाक हादसे (Ambala Borewell Incident) ने एक बार फिर खुले और असुरक्षित बोरवेलों को लेकर प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर साल ऐसे हादसों के बावजूद सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होना चिंता का विषय बनता जा रहा है।
रातभर चला रेस्क्यू, लेकिन नहीं बच सकी मासूम की जान
मंगलवार सुबह करीब सात बजे निरवैर खेलते-खेलते खेत में बने खुले बोरवेल में गिर गया था। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। बच्चे को सुरक्षित निकालने के लिए लगातार कई घंटों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।
करीब 20 घंटे से अधिक चले अभियान के बाद बुधवार तड़के लगभग 3:25 बजे बच्चे को बाहर निकाला गया। उसे तुरंत अंबाला के नागरिक अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पूरे गांव की निगाहें सिर्फ एक उम्मीद पर टिकी थीं कि बच्चा जीवित बाहर आ जाएगा, लेकिन अंत में यह उम्मीद टूट गई।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई मौत की वजह
डॉक्टरों के दो सदस्यीय मेडिकल पैनल द्वारा किए गए पोस्टमार्टम में सामने आया कि निरवैर की मौत बोरवेल में गिरने के बाद लगी गंभीर चोटों और दम घुटने के कारण हुई। रिपोर्ट के अनुसार बच्चे के सिर, छाती और दोनों टखनों पर गंभीर चोटें थीं। गिरने के तेज प्रभाव से शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो गए थे। डॉक्टरों का कहना है कि बोरवेल में गिरने के कुछ ही समय बाद उसकी सांसें थम चुकी थीं, जिससे लंबे रेस्क्यू के बावजूद उसकी जान बचाना संभव नहीं हो पाया।
मासूम की अंतिम विदाई में पूरा गांव हुआ भावुक
बुधवार दोपहर जब निरवैर का शव गांव पहुंचा तो पूरे इलाके में मातम छा गया। घर के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई और हर आंख नम थी। लगातार हो रही बारिश के बावजूद गांव के बड़ी संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। श्मशान घाट में धार्मिक प्रार्थना के बाद पिता मंजीत सिंह ने कांपते हाथों से अपने इकलौते बेटे को मुखाग्नि दी।
जिस घर में कुछ समय पहले तक बच्चे की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ सन्नाटा और सिसकियां थीं। मां बेटे का शव देखकर बेसुध हो गईं, जबकि दादा की आंखें पूरी रात उसी उम्मीद में बोरवेल की ओर लगी रहीं कि पोता सुरक्षित बाहर निकल आएगा।
रेस्क्यू के दौरान परिवार की हर पल बढ़ती रही बेचैनी
पूरे रेस्क्यू अभियान के दौरान बच्चे के माता-पिता सदमे में बार-बार बेहोश होते रहे। मौके पर मौजूद ग्रामीण भी लगातार प्रशासन से जल्द से जल्द बच्चे को निकालने की अपील करते रहे। रेस्क्यू टीम ने हर संभव तकनीक और मशीनों का इस्तेमाल किया, लेकिन गहराई, मिट्टी की स्थिति और लगातार हो रही बारिश के कारण अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया।
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लापरवाही पर प्रशासन का एक्शन, तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज
घटना के बाद अंबाला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। उपायुक्त अजय सिंह तोमर के निर्देश पर अंबाला शहर सदर थाना पुलिस ने खेत मालिक हरनेक सिंह और खेत को ठेके पर लेने वाले दिलप्रीत सिंह तथा बलजीत सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार खेत हरनेक सिंह के नाम पर दर्ज है, जो वर्तमान में विदेश में रह रहा है। खेत को आगे ठेके पर दिया गया था। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि खुले बोरवेल को सुरक्षित क्यों नहीं किया गया और सुरक्षा मानकों की अनदेखी किस स्तर पर हुई।
हादसे के बाद भी पूरी तरह बंद नहीं किया गया बोरवेल
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस खुले बोरवेल (Ambala Borewell Incident) में मासूम की जान गई, उसे हादसे के बाद भी पूरी तरह बंद नहीं किया गया। जानकारी के अनुसार दोपहर तक बोरवेल को केवल प्लाई बोर्ड से ढककर अस्थायी रूप से बंद किया गया था। इस स्थिति ने स्थानीय लोगों में नाराजगी भी पैदा की, क्योंकि उनका मानना है कि ऐसी घटनाओं के बाद तत्काल स्थायी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
खुले बोरवेल बन रहे जानलेवा खतरा
देश के कई राज्यों में खुले बोरवेल (Ambala Borewell Incident) में बच्चों के गिरने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। हर हादसे के बाद सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू करने की बात होती है, लेकिन समय बीतने के साथ लापरवाही फिर सामने आ जाती है। जिन बोरवेलों का उपयोग नहीं हो रहा है, उन्हें तत्काल स्थायी रूप से बंद किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
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