Lucknow Coaching Fire: लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में पुरनिया चौराहे के पास सोमवार, 22 जून 2026 को एक बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग के बाद सुरक्षा व्यवस्था और विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल उठे हैं। Lucknow Coaching Fire में कम से कम 15 लोगों की मौत की सूचना सामने आई, जबकि कई घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना अलीगढ़ दौरा बीच में छोड़कर लखनऊ लौटने, घटनास्थल का निरीक्षण करने और हादसे की विस्तृत जांच कराने का निर्देश दिया।
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एक निकास से बढ़ा संकट
प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि Fire Exit Investigation के दौरान इमारत में सुरक्षित निकासी की व्यवस्था की विशेष जांच की जा रही है। आग और धुआं तेजी से फैलने के बाद भवन के भीतर मौजूद कई लोगों को बाहर निकलने में कठिनाई हुई। घटनास्थल से सामने आए दृश्यों में कुछ लोग पहली मंजिल से नीचे कूदकर अपनी जान बचाने का प्रयास करते दिखाई दिए।
इसके अलावा, Emergency Evacuation से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अधिक संख्या में छात्रों और दूसरे लोगों की मौजूदगी वाले भवन में वैकल्पिक निकास मार्ग उपलब्ध था या नहीं। जांच टीम को यह पता लगाना होगा कि सीढ़ियों, खिड़कियों, प्रवेश द्वार और आपातकालीन निकास की वास्तविक स्थिति क्या थी। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले भवन के स्वीकृत मानचित्र और मौके पर किए गए निर्माण का मिलान भी जरूरी होगा।
फायर एनओसी की पड़ताल
हादसे के बाद Fire NOC Status भी जांच का प्रमुख विषय बन गया है। प्रारंभिक स्तर पर यह दावा सामने आया है कि भवन मालिक या संबंधित व्यावसायिक संचालकों ने फायर एनओसी के लिए आवेदन नहीं किया था। हालांकि इस दावे की अंतिम पुष्टि अग्निशमन विभाग के रिकॉर्ड, आवेदन पोर्टल और भवन से संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों की जांच के बाद ही होगी।
खास बात यह है कि Fire Safety Compliance केवल प्रमाणपत्र तक सीमित नहीं होता। किसी व्यावसायिक इमारत में अग्निशमन यंत्र, स्मोक डिटेक्टर, अलार्म, पानी की व्यवस्था, सुरक्षित सीढ़ियां और स्पष्ट निकास संकेत भी महत्वपूर्ण होते हैं। अग्नि सुरक्षा की जांच में आमतौर पर निकास व्यवस्था, हाइड्रेंट, अलार्म, स्प्रिंकलर और अन्य उपकरणों की उपलब्धता देखी जाती है।
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आवासीय भवन में व्यावसायिक गतिविधि
इसी क्रम में, Commercial Use Violation का पहलू भी सामने आया है। शुरुआती सूचनाओं के अनुसार संबंधित इमारत का स्वीकृत उपयोग आवासीय हो सकता है, जबकि उसमें कोचिंग, गेमिंग या दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। इसकी पुष्टि के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण के स्वीकृत मानचित्र, भू-उपयोग और भवन के वास्तविक संचालन की जांच आवश्यक होगी।
वहीं दूसरी ओर, Building Map Approval से यह भी स्पष्ट होगा कि भवन में कितनी मंजिलों और किस प्रकार की गतिविधियों की अनुमति दी गई थी। यदि स्वीकृत मानचित्र और वास्तविक निर्माण में अंतर मिलता है तो संबंधित भवन मालिक, संचालक और निगरानी से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा सकती है। फिलहाल किसी व्यक्ति या विभाग की जिम्मेदारी तय करना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
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मुख्यमंत्री ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना की जानकारी मिलने के बाद CM Yogi Action के तहत वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव अभियान की निगरानी करने का निर्देश दिया। उन्होंने अपना निर्धारित दौरा बीच में छोड़कर लखनऊ लौटने और घटनास्थल का निरीक्षण करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही घायलों के समुचित उपचार और घटना की जांच कराने के निर्देश भी दिए गए।
साथ ही, Administrative Accountability के अंतर्गत यह जांचना जरूरी होगा कि अग्निशमन विभाग, विकास प्राधिकरण, नगर निगम, बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन को भवन में चल रही गतिविधियों की जानकारी थी या नहीं। यदि पहले कोई शिकायत, नोटिस या निरीक्षण हुआ था तो उस पर क्या कार्रवाई हुई, यह सवाल भी जांच का हिस्सा बन सकता है।
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पहले भी दिए गए थे फायर ऑडिट के निर्देश
Lucknow Coaching Fire मामले में गौर करने वाली बात यह है कि UP Fire Audit को लेकर मुख्यमंत्री ने जून 2026 की शुरुआत में अस्पतालों, होटलों, स्कूलों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और बहुमंजिला भवनों की अग्नि सुरक्षा जांच कराने के निर्देश दिए थे। राज्य के कई शहरों में जांच अभियान के दौरान फायर हाइड्रेंट, पंप, स्मोक डिटेक्टर और पानी की पर्याप्त व्यवस्था से जुड़ी कमियां सामने आई थीं।
ऐसे में Departmental Review का बड़ा प्रश्न यह होगा कि पुरनिया क्षेत्र की इस इमारत को हालिया निरीक्षण अभियान में शामिल किया गया था या नहीं। यदि भवन की जांच नहीं हुई थी तो उसके कारणों का पता लगाया जाएगा। वहीं, निरीक्षण होने के बावजूद कमियां दर्ज नहीं की गई थीं तो संबंधित रिपोर्ट और निरीक्षण प्रक्रिया की समीक्षा जरूरी होगी।
Lucknow Coaching Fire: आग लगने की वजह अभी स्पष्ट नहीं
फिलहाल Lucknow Coaching में आग लगने की निश्चित वजह सामने नहीं आई है। शॉर्ट सर्किट, ज्वलनशील सामग्री, विद्युत भार या किसी अन्य कारण की पुष्टि फोरेंसिक जांच और अग्निशमन विभाग की तकनीकी रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। इसलिए बिना आधिकारिक रिपोर्ट के आग लगने की वजह को लेकर कोई निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा।
इसके अलावा, Forensic Fire Report यह बताएगी कि आग किस हिस्से से शुरू हुई और इतनी तेजी से कैसे फैली। जांच में बिजली के तारों, उपकरणों, फर्नीचर, आंतरिक सजावट और इमारत में रखी अन्य सामग्री के नमूनों का परीक्षण किया जा सकता है। सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी घटनाक्रम समझने में महत्वपूर्ण होंगे।
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Lucknow Coaching Fire: जिम्मेदारी जांच के बाद तय होगी
Lucknow Coaching Fire के बाद Safety Accountability केवल भवन मालिक या कोचिंग संचालक तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। संबंधित विभागों के निरीक्षण, लाइसेंस, मानचित्र स्वीकृति, विद्युत सुरक्षा और फायर एनओसी के रिकॉर्ड की संयुक्त समीक्षा जरूरी है। हालांकि किसी अधिकारी या संचालक को जिम्मेदार ठहराने से पहले दस्तावेजी प्रमाण और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए।
अंततः Student Safety Standards को लेकर यह घटना एक गंभीर चेतावनी है। कोचिंग संस्थानों और गेमिंग जोन जैसी जगहों पर बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहते हैं। इसलिए सुरक्षित निकास, नियमित फायर ड्रिल, प्रशिक्षित कर्मचारी और काम करने वाले अग्निशमन उपकरण अनिवार्य होने चाहिए। जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई के साथ ऐसी इमारतों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट भी आवश्यक होगा।
उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा / Fire NOC




