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Telegram Ban Case: टेलीग्राम पर रोक से छिड़ी कानूनी बहस, कोर्ट पहुंचा मामला, जानिए भारत में App Ban Rules क्या कहते हैं?

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-06-18 1:35 pm
Lokhit Kranti Published 2026-06-18
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Telegram logo displayed on a smartphone with legal documents in the background, highlighting the Telegram Ban in India
Telegram logo displayed on a smartphone with legal documents in the background, highlighting the Telegram Ban in India
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Telegram Ban Case: प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को लेकर देश में एक बार फिर बड़ी बहस शुरू हो गई है। इस बार चर्चा के केंद्र में है Telegram Ban Case, जिसने तकनीक, कानून और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्र सरकार द्वारा नीट-यूजी परीक्षा के मद्देनजर टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाए जाने के बाद कंपनी ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी है। अब यह मामला केवल एक ऐप तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह डिजिटल अधिकारों और सरकारी शक्तियों के बीच संतुलन का विषय बन गया है।

Contents
NEET परीक्षा से पहले लगाया गया था अस्थायी प्रतिबंधपावेल ड्यूरोव ने लगाए गंभीर आरोपभारत सरकार के पास किस कानून के तहत है ऐप बंद करने का अधिकार?ब्लॉकिंग रूल्स 2009 क्या हैं और कैसे होती है कार्रवाई?आपातकालीन स्थिति में तुरंत लिया जा सकता है फैसलाक्या पूरा ऐप बंद करना जरूरी है?अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से भी जुड़ा है मामलासुप्रीम कोर्ट पहले दे चुका है अहम फैसलाडिजिटल सुरक्षा और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन की चुनौती

NEET परीक्षा से पहले लगाया गया था अस्थायी प्रतिबंध

देशभर में होने वाली नीट-यूजी परीक्षा के दौरान पेपर लीक और फर्जी प्रश्नपत्रों की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने एहतियात के तौर पर टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया। सरकार का तर्क था कि कुछ चैनलों और समूहों के माध्यम से गलत सूचनाएं और कथित लीक सामग्री प्रसारित की जा रही थी, जिससे लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती थी।

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हालांकि, इस कदम के बाद Telegram Ban Case ने नया मोड़ ले लिया, क्योंकि कंपनी ने इसे अदालत में चुनौती देते हुए सवाल उठाया कि यदि कई अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी ऐसी गतिविधियां संभव हैं, तो कार्रवाई केवल टेलीग्राम पर ही क्यों की गई।

पावेल ड्यूरोव ने लगाए गंभीर आरोप

टेलीग्राम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पावेल ड्यूरोव ने इस पूरे मामले को लेकर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत समेत कई देशों में टेलीग्राम की इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रभावित की जा रही है। उनका दावा है कि कुछ टेलीकॉम नेटवर्क पर उपयोगकर्ताओं को ऐप चलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

इन आरोपों के बाद Telegram Ban Case अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, संबंधित कंपनियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

भारत सरकार के पास किस कानून के तहत है ऐप बंद करने का अधिकार?

भारत में किसी वेबसाइट, मोबाइल ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने का अधिकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 यानी आईटी एक्ट के तहत दिया गया है। विशेष रूप से धारा 69A केंद्र सरकार को यह अधिकार देती है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, संप्रभुता, विदेशी संबंधों या अपराध रोकने जैसे कारणों से किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंच सीमित कर सकती है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि Telegram Ban Case में भी सरकार इसी कानूनी प्रावधान का सहारा ले सकती है। हालांकि, इसके लिए तय प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है।

ब्लॉकिंग रूल्स 2009 क्या हैं और कैसे होती है कार्रवाई?

आईटी एक्ट के साथ-साथ ब्लॉकिंग रूल्स 2009 भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके तहत संबंधित एजेंसियां इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को किसी प्लेटफॉर्म के खिलाफ सिफारिश भेजती हैं। इसके बाद अंतर-मंत्रालयी समिति पूरे मामले की समीक्षा करती है।

यदि समिति को लगता है कि प्लेटफॉर्म या उसकी सामग्री देशहित के खिलाफ है या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकती है, तो ब्लॉकिंग आदेश जारी किया जाता है। इसी प्रक्रिया को लेकर Telegram Ban Case में भी कानूनी बहस तेज हो गई है।

आपातकालीन स्थिति में तुरंत लिया जा सकता है फैसला

यदि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, दंगा, साइबर अपराध या परीक्षा में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी से जुड़ा हो, तो सरकार तत्काल अंतरिम आदेश जारी कर सकती है। इसे इमरजेंसी ब्लॉकिंग कहा जाता है।

हालांकि, इस प्रकार का आदेश स्थायी नहीं होता। बाद में इसकी समीक्षा की जाती है और यदि आवश्यक हो, तभी आगे कार्रवाई जारी रखी जाती है। यही कारण है कि Telegram Ban Case में अस्थायी प्रतिबंध को लेकर कानूनी विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग राय सामने आ रही है।

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क्या पूरा ऐप बंद करना जरूरी है?

कानून में अनुपातिकता यानी Proportionality का सिद्धांत भी लागू होता है। इसका मतलब यह है कि अगर समस्या कुछ विशेष चैनलों या समूहों तक सीमित है, तो पहले उन्हीं पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

विशेषज्ञ मानते हैं कि पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना अंतिम विकल्प होना चाहिए, क्योंकि इससे लाखों सामान्य उपयोगकर्ता भी प्रभावित होते हैं। इसी आधार पर Telegram Ban Case में अदालत के सामने यह सवाल भी अहम हो सकता है कि क्या कुछ चैनलों पर कार्रवाई पर्याप्त थी या पूरे ऐप पर रोक जरूरी थी।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से भी जुड़ा है मामला

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(ए) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म आज केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, व्यापार और संवाद का भी प्रमुख साधन बन चुके हैं।

ऐसे में किसी ऐप पर प्रतिबंध सीधे तौर पर करोड़ों लोगों के डिजिटल अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, संविधान का अनुच्छेद 19(2) सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के हित में उचित प्रतिबंध लगाने का अधिकार भी देता है।

सुप्रीम कोर्ट पहले दे चुका है अहम फैसला

श्रेय सिंघल बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट धारा 69A को संवैधानिक मान चुका है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि सरकार को ऑनलाइन सामग्री या प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने का अधिकार है, लेकिन यह शक्ति मनमाने तरीके से इस्तेमाल नहीं की जा सकती।

यही कारण है कि Telegram Ban Case में अदालत इस बात पर भी विचार कर सकती है कि क्या निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया और क्या प्रतिबंध आवश्यक तथा संतुलित था।

डिजिटल सुरक्षा और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन की चुनौती

नीट-यूजी परीक्षा में लाखों छात्र शामिल होते हैं और किसी भी प्रकार की अफवाह या फर्जी सामग्री उनके भविष्य को प्रभावित कर सकती है। सरकार का तर्क है कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

वहीं दूसरी ओर, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नागरिक अधिकारों से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि तकनीक के दौर में सुरक्षा और स्वतंत्रता दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। फिलहाल Telegram Ban Case पर सभी की निगाहें अदालत के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े कई अन्य मामलों पर भी पड़ सकता है।

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