RBI Removes FCNR Deposit: भारत में विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने और डॉलर भंडार को मजबूत करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने 3 से 5 साल की अवधि वाले नए FCNR(B) डिपॉजिट्स पर ब्याज दर की अधिकतम सीमा को अस्थायी रूप से हटा दिया है। यह फैसला 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेगा और इसका उद्देश्य विदेशों में रहने वाले भारतीयों (NRIs) को भारतीय बैंकों में ज्यादा निवेश के लिए (RBI Removes FCNR Deposit) आकर्षित करना है।
RBI के इस फैसले को रुपये पर बढ़ते दबाव और विदेशी पूंजी आकर्षित करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। अब भारतीय बैंक विदेशी मुद्रा में जमा राशि पर पहले की तुलना में अधिक ब्याज दरों की पेशकश कर सकेंगे, जिससे NRI निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ गई है। (RBI Removes FCNR Deposit)
क्या है FCNR(B) डिपॉजिट?
FCNR(B) यानी Foreign Currency Non-Resident (Bank) Deposit एक विशेष फिक्स्ड डिपॉजिट खाता होता है, जिसमें एनआरआई अपनी विदेशी कमाई को डॉलर, यूरो, पाउंड जैसी विदेशी मुद्राओं में भारत के बैंकों में जमा कर सकते हैं। इस खाते की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें जमा राशि और ब्याज दोनों विदेशी मुद्रा में ही बने रहते हैं, जिससे निवेशकों को रुपये की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का जोखिम नहीं उठाना पड़ता। (RBI Removes FCNR Deposit)
RBI ने क्या बदलाव किया?
RBI ने अपने ताजा सर्कुलर में कहा है कि 17 जून 2026 से 30 सितंबर 2026 तक 3 से 5 वर्ष की अवधि वाले नए FCNR(B) डिपॉजिट्स पर लागू ब्याज दर की सीमा को अस्थायी रूप से हटा दिया गया है। इसके साथ ही 3 साल या उससे अधिक अवधि वाले NRE (Non-Resident External) डिपॉजिट्स पर ब्याज दरों से जुड़ी पाबंदियों को भी 30 सितंबर 2026 तक हटा दिया गया है। यह छूट मैच्योरिटी के बाद रिन्यू किए गए डिपॉजिट्स पर भी लागू होगी। (RBI Removes FCNR Deposit)
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NRI निवेशकों को कैसे होगा फायदा?
RBI के इस फैसले के बाद बैंक विदेशी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें दे सकेंगे। इसका सीधा लाभ एनआरआई निवेशकों को मिलेगा।
प्रमुख फायदे:
- पहले से अधिक ब्याज दर मिलने की संभावना
- विदेशी मुद्रा में सुरक्षित निवेश
- रुपये की कमजोरी का जोखिम नहीं
- भारत में निवेश का आकर्षक विकल्प
- लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम खाड़ी देशों, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और यूरोप में रहने वाले भारतीयों को भारतीय बैंकिंग प्रणाली में अधिक धन निवेश करने के लिए प्रेरित करेगा। (RBI Removes FCNR Deposit)
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डॉलर भंडार बढ़ाने की RBI की रणनीति
हाल के महीनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव देखने को मिला है। ऐसे में RBI विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठा रहा है। इस महीने की शुरुआत में केंद्रीय बैंक ने अधिकृत डीलर (AD) बैंकों को 3-5 साल के नए FCNR(B) डिपॉजिट जुटाने के लिए रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधा देने का भी ऐलान किया था। यह सुविधा 30 सितंबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी।इसका मकसद बैंकों की विदेशी मुद्रा जुटाने की लागत कम करना और विदेशी निवेश को बढ़ावा देना है। (RBI Removes FCNR Deposit)
NRE और NRO खातों पर क्या नियम रहेंगे?
RBI ने स्पष्ट किया है कि NRE और NRO डिपॉजिट्स पर बैंक जितना ब्याज देंगे, वह उनके समान अवधि वाले घरेलू रुपया टर्म डिपॉजिट्स की ब्याज दरों से अधिक नहीं होना चाहिए।
यानी ब्याज सीमा में राहत मिलने के बावजूद बैंकों को नियामकीय ढांचे के भीतर ही काम करना होगा। (RBI Removes FCNR Deposit)
बैंकिंग सेक्टर और अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
विश्लेषकों का मानना है कि RBI का यह कदम भारतीय बैंकिंग प्रणाली में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाने में मदद करेगा। इससे विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा, रुपये को समर्थन मिलेगा और बैंकों की विदेशी मुद्रा जरूरतों को पूरा करने में भी आसानी होगी। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय बैंक NRI ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कितनी प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें पेश करते हैं और इस फैसले का विदेशी मुद्रा प्रवाह पर कितना असर पड़ता है। (RBI Removes FCNR Deposit)
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