Fake Investment Fraud Case: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां लोगों को निवेश का झांसा देकर उन्हें फंसाया गया और फिर उनसे लाखों रुपये की लूट कर ली गई। इस केस में यूपी पुलिस का एक सिपाही समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक CRPF से जुड़ा अधिकारी और एक अन्य आरोपी अभी फरार चल रहे हैं।
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Fake Investment Fraud Case: निवेश के नाम पर रची गई चाल
जानकारी के अनुसार, पीड़ितों को एक निजी कंपनी में निवेश करने का प्रस्ताव दिया गया था। उन्हें यह भरोसा दिलाया गया कि कम समय में उनका पैसा दोगुना हो जाएगा।
इसी भरोसे पर दो व्यक्तियों को बातचीत के लिए एक स्थान पर बुलाया गया। लेकिन वहां पहुंचते ही पूरा मामला बदल गया। आरोप है कि उन्हें बंधक बनाकर दबाव में लिया गया और उनसे करीब 5 लाख रुपये नकद छीन लिए गए। विरोध करने पर मारपीट भी की गई।
Fake Investment Fraud Case: शिकायत के बाद दर्ज हुआ मामला
यह घटना 11 जून की बताई जा रही है, जब वृंदावन कॉलोनी निवासी प्रभाकर सिंह ने चिनहट थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि उनके भाई दिवाकर सिंह और मित्र अनूप शुक्ला को निवेश के बहाने बुलाकर धोखा दिया गया और उनके साथ लूट की गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
Fake Investment Fraud Case: जांच में सामने आया संगठित गिरोह
पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई साधारण लूट नहीं बल्कि एक संगठित गिरोह द्वारा की गई कार्रवाई थी। यह गिरोह लोगों को निवेश का लालच देकर बुलाता था और फिर खुद को पुलिस या अन्य सुरक्षा एजेंसियों से जुड़ा बताकर डराता था। इसके बाद पीड़ितों से पैसे वसूले जाते थे और कई मामलों में धमकी और मारपीट भी की जाती थी।
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Fake Investment Fraud Case: पुलिसकर्मी की संलिप्तता से मचा हड़कंप
इस मामले में सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि गिरोह में यूपी पुलिस का सिपाही पूरन सिंह भी शामिल था। इसके अलावा CRPF से जुड़े अधिकारी जय प्रकाश यादव और एक अन्य आरोपी आनंद दुबे का नाम भी सामने आया है, जो फिलहाल फरार हैं। इन खुलासों के बाद पुलिस विभाग और सुरक्षा एजेंसियों में हलचल मच गई है।
Fake Investment Fraud Case: गिरफ्तारी कैसे हुई
पुलिस ने तकनीकी निगरानी और सूचना तंत्र की मदद से आरोपियों की लोकेशन ट्रैक की। इसके बाद 12 जून की रात हरदासीखेड़ा नहर पुलिया के पास छापेमारी कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में गोरखपुर निवासी जावेद हुसैन, आसिफ, संतकबीरनगर निवासी प्रवेश त्रिपाठी और राजस्थान निवासी सिपाही पूरन सिंह शामिल हैं।
Fake Investment Fraud Case: पूछताछ में खुला गिरोह का तरीका
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे एक संगठित सिंडिकेट की तरह काम करते थे। उनका तरीका लोगों को निवेश का लालच देना, फिर उन्हें डराकर पैसे वसूलना और खुद को पुलिस अधिकारी बताकर प्रभावित करना था।
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Fake Investment Fraud Case: फरार आरोपियों की तलाश जारी
इस मामले में CRPF अधिकारी जय प्रकाश यादव और आनंद दुबे अभी भी फरार हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है और कई टीमें लगाई गई हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह ने पहले कितने लोगों को इसी तरह ठगी का शिकार बनाया है।
Fake Investment Fraud Case: विभागीय स्तर पर जांच शुरू
मामले में पुलिसकर्मी की भूमिका सामने आने के बाद विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी कर्मचारी इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Fake Investment Fraud Case: जांच जारी, कई सवाल अनसुलझे
फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क कब से सक्रिय था और इसके पीछे और कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि संगठित अपराध किस तरह भरोसे और पहचान का गलत इस्तेमाल कर आम लोगों को निशाना बनाते हैं।
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