Admission Scam: प्रयागराज स्थित Uttar Pradesh Rajarshi Tandon Open University एक बार फिर सुर्खियों में है। विश्वविद्यालय में वर्ष 2015-16 से 2019-20 के बीच प्रवेश प्रक्रिया और परीक्षा संचालन से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने तूल पकड़ लिया है। शिकायतों के आधार पर अब उत्तर प्रदेश शासन ने पूरे मामले की जांच शुरू करा दी है। आरोप है कि ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों से प्राप्त शुल्क और विश्वविद्यालय के खातों में जमा धनराशि के बीच करोड़ों रुपये का अंतर पाया गया, जिससे एक बड़े Admission Scam की आशंका जताई जा रही है।
CBI तक पहुंची शिकायत, फिर राज्य सरकार को भेजा गया मामला
Admission Scam की शुरुआत तब हुई जब कौशांबी जिले के कड़ा अलीपुरजीता निवासी आनंद कुमार ने विस्तृत शिकायत तैयार कर केंद्रीय जांच एजेंसी तक पहुंचाई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय में कई वर्षों तक चली प्रवेश प्रक्रिया के दौरान प्राप्त फीस का पूरा हिसाब विश्वविद्यालय के खातों में दर्ज नहीं किया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं बल्कि सुनियोजित वित्तीय अनियमितता का मामला हो सकता है। शिकायत CBI को भेजी गई थी, लेकिन प्रारंभिक स्तर पर मामले को राज्य सरकार के पास भेज दिया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए।
रातभर रेलवे और बस स्टैंड पर डटे रहे अभ्यर्थी, केंद्र तक पहुंचने के लिए स्कैन करते दिखे कोड
पांच वर्षों की प्रवेश प्रक्रिया पर उठे सवाल
शिकायत के अनुसार वर्ष 2015 से 2019 के बीच विश्वविद्यालय की ऑनलाइन प्रवेश व्यवस्था के माध्यम से बड़ी संख्या में छात्रों ने विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया था। आरोप है कि विद्यार्थियों द्वारा जमा कराई गई फीस और विश्वविद्यालय के आधिकारिक खातों में दर्ज राशि के बीच बड़ा अंतर मौजूद है।
दस्तावेजों के आधार पर दावा किया गया है कि कुल ₹7,37,30,757 की राशि का स्पष्ट लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि इस पूरे मामले को अब संभावित Admission Scam के रूप में देखा जा रहा है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रदेश के उच्च शिक्षा क्षेत्र के सबसे बड़े वित्तीय मामलों में शामिल हो सकता है।
परीक्षा संचालन और प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी जांच के दायरे में
Admission Scam केवल प्रवेश शुल्क तक सीमित नहीं है। शिकायत में परीक्षा संचालन और उससे जुड़ी वित्तीय प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि प्रवेश और परीक्षा से संबंधित विभिन्न मदों में प्राप्त राशि का समुचित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि कथित वित्तीय अंतर किसी तकनीकी त्रुटि का परिणाम है या फिर प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की अनियमितता हुई है। इसी वजह से विश्वविद्यालय के कई विभागों से रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेज मांगे गए हैं।
Read: 2027 में फिर बनेगी भाजपा सरकार, मेरठ में बोले पंडित सुनील भराला
अधिकारियों के नाम भी आए सामने
शिकायत में विश्वविद्यालय के तत्कालीन प्रवेश प्रभारी और वर्तमान परीक्षा नियंत्रक डॉ. जी.के. द्विवेदी सहित कुछ अन्य अधिकारियों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि अभी तक किसी भी अधिकारी को दोषी नहीं ठहराया गया है और जांच पूरी होने तक सभी आरोप प्रारंभिक स्तर के माने जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी Admission Scam की पुष्टि केवल विस्तृत वित्तीय ऑडिट और आधिकारिक जांच के बाद ही संभव है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
शासन ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूरे मामले पर विस्तृत आख्या मांगी है। शासन स्तर पर यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि प्रवेश प्रक्रिया के दौरान प्राप्त फीस, बैंक खातों में जमा राशि और वास्तविक छात्र संख्या के आंकड़ों में कोई विसंगति है या नहीं।
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन भी शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच कर रहा है। यदि प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो आगे व्यापक वित्तीय जांच या विशेष ऑडिट कराया जा सकता है।
विश्वविद्यालय और छात्रों के बीच बढ़ी चिंता
इस प्रकरण के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय से जुड़े शिक्षण संस्थानों, अध्ययन केंद्रों और विद्यार्थियों के बीच भी चिंता बढ़ गई है। कई छात्र संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए ताकि उच्च शिक्षा संस्थानों की विश्वसनीयता बनी रहे।
फिलहाल पूरे Admission Scam की जांच जारी है और शासन की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि यह केवल लेखा संबंधी गड़बड़ी थी या फिर वास्तव में करोड़ों रुपये का बड़ा Admission Scam हुआ था।
पढ़े ताजा अपडेट : Hindi News, Today Hindi News, Breaking




