Saket Building Collapse: दक्षिण दिल्ली के साकेत इलाके में शनिवार शाम एक बड़ा हादसा होते-होते और भी भयावह रूप ले सकता था। साकेत मेट्रो स्टेशन के पास स्थित सैदुलाजाब इलाके में एक पांच मंजिला व्यावसायिक इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इमारत के ढहते (Saket Building Collapse) ही आसपास का इलाका धूल और मलबे के गुबार से भर गया, जबकि मौके पर मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई। सबसे राहत की बात यह रही कि जिस इमारत में कई कार्यालय संचालित होते थे, वह सप्ताहांत होने की वजह से लगभग खाली थी। हालांकि गिरती हुई इमारत का मलबा बगल की एक अन्य बिल्डिंग पर जा गिरा, जिससे वहां मौजूद लोगों की जान खतरे में पड़ गई।
लाइब्रेरी में पढ़ रहे छात्रों ने दिखाई फुर्ती
हादसे (Saket Building Collapse) का सबसे संवेदनशील पहलू यह था कि जिस इमारत पर मलबा गिरा, उसमें एक लाइब्रेरी संचालित की जा रही थी। यहां विदेशों से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे छात्र मेडिकल लाइसेंस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत में अचानक कंपन महसूस होने के बाद कई छात्रों ने तेजी से बाहर निकलने की कोशिश की। कुछ ही पलों में पूरी इमारत का एक हिस्सा मलबे की चपेट में आ गया। अगर छात्रों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिलता, तो स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि छात्रों की सतर्कता और त्वरित प्रतिक्रिया ने बड़ी संख्या में जानें बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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सबसे ज्यादा नुकसान कैंटीन को हुआ
लाइब्रेरी के नीचे एक महिला द्वारा संचालित कैंटीन थी, जहां उस समय कुछ छात्र भोजन कर रहे थे। हादसे (Saket Building Collapse) के दौरान पूरी कैंटीन मलबे में तब्दील हो गई। जानकारी के मुताबिक, डिनर कर रहे कुछ छात्रों के मलबे में दबे होने की आशंका के चलते राहत एवं बचाव कार्य तुरंत शुरू किया गया। कैंटीन का पूरा ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया और अंदर रखा सामान भी पूरी तरह नष्ट हो गया। राहत एजेंसियां विशेष रूप से कैंटीन वाले हिस्से में सघन तलाशी अभियान चला रही हैं, क्योंकि यहीं सबसे ज्यादा लोगों के फंसे होने की संभावना जताई जा रही है।
युद्ध स्तर पर चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना (Saket Building Collapse) की सूचना मिलते ही फायर विभाग, पुलिस, आपदा प्रबंधन एजेंसियां और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गईं। भारी मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाने का कार्य लगातार जारी है। अधिकारियों के अनुसार अब तक नौ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। बचाव दल बेहद सावधानी के साथ मलबा हटा रहा है ताकि यदि कोई व्यक्ति अंदर फंसा हो तो उसे सुरक्षित निकाला जा सके। रात होते ही इलाके में अतिरिक्त रोशनी की व्यवस्था की गई और बचाव कार्य को बिना किसी रुकावट के जारी रखा गया।
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शनिवार होने से टला बड़ा नुकसान
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जिस पांच मंजिला इमारत (Saket Building Collapse) का ढांचा गिरा वह एक कमर्शियल बिल्डिंग थी। सामान्य दिनों में यहां बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं, लेकिन शनिवार होने के कारण अधिकांश कार्यालय बंद थे। यदि यह हादसा किसी कार्यदिवस पर होता तो प्रभावित लोगों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी। इस लिहाज से सप्ताहांत का दिन कई लोगों के लिए राहत का कारण साबित हुआ।
सीएम रेखा गुप्ता ने जताई चिंता
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना (Saket Building Collapse) पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राहत और बचाव कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मलबे में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित निकालना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने घायलों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने और स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
इमारत की मजबूती पर उठे सवाल
हादसे के बाद इलाके (Saket Building Collapse) में निर्माण मानकों और भवन सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई इलाकों में पुरानी इमारतें और अवैध निर्माण लंबे समय से चिंता का विषय बने हुए हैं। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इमारत गिरने की वजह निर्माण संबंधी खामी थी, संरचनात्मक कमजोरी थी या कोई अन्य तकनीकी कारण। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
सुरक्षा व्यवस्था पर फिर शुरू हुई बहस
साकेत जैसी व्यस्त और घनी आबादी वाले इलाके में हुई इस घटना ने एक बार फिर भवन सुरक्षा और नियमित निरीक्षण की आवश्यकता को उजागर किया है। फिलहाल राहत एजेंसियों का पूरा ध्यान मलबे में फंसे संभावित लोगों को सुरक्षित निकालने पर है। हालांकि इस हादसे ने यह भी दिखा दिया कि कई बार कुछ सेकंड की सतर्कता और त्वरित प्रतिक्रिया बड़ी त्रासदी को टाल सकती है। साकेत में छात्रों का समय रहते बाहर निकलना इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।
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