Ram Rahim Parole: हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर पैरोल पर रिहा किए गए हैं। साध्वियों के यौन शोषण मामले में सजा काट रहे राम रहीम को 30 दिनों की पैरोल (Ram Rahim Parole) दी गई है। यह उनकी 16वीं अस्थायी रिहाई है, जिसने एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा को जन्म दे दिया है। सूत्रों के अनुसार, उन्हें पंजाब में शहरी स्थानीय निकाय चुनाव के दिन ही सुबह-सुबह जेल से बाहर लाया गया।
2017 से जेल में बंद, लेकिन बार-बार मिल रही अस्थायी राहत
गुरमीत राम रहीम 25 अगस्त 2017 से रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं, जब सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें दो साध्वियों के यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा सुनाई थी। हालांकि, अपनी सजा के दौरान वह कई बार पैरोल (Ram Rahim Parole) और फरलो पर जेल से बाहर आ चुके हैं। नवीनतम 30 दिन की रिहाई को जोड़कर अब तक वह लगभग 454 दिन जेल से बाहर रह चुके हैं। यह आंकड़ा उनके कुल सजा अवधि के एक बड़े हिस्से को दर्शाता है।
चुनावों और आयोजनों से जुड़ी टाइमिंग पर उठते सवाल
राम रहीम की पैरोल (Ram Rahim Parole) अक्सर चुनावी समय या डेरा सच्चा सौदा के बड़े आयोजनों के आसपास दी जाती रही है। इसी कारण हर बार उनकी रिहाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो जाती है। इस बार भी उनकी रिहाई की टाइमिंग पंजाब के स्थानीय निकाय चुनाव के साथ मेल खाने पर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले भी हरियाणा और पंजाब विधानसभा, नगर निगम और पंचायत चुनावों से ठीक पहले उन्हें पैरोल या फरलो मिल चुकी है।
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पहले भी कई बार मिल चुकी है पैरोल और फरलो
पिछले कुछ वर्षों में उनकी अस्थायी रिहाई (Ram Rahim Parole) की सूची काफी लंबी रही है। कुछ प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं-
- जनवरी 2025 – 30 दिन की पैरोल
- जनवरी 2024 – 50 दिन की रिहाई
- अगस्त 2024 – 21 दिन की पैरोल
- अक्टूबर 2023 – हरियाणा चुनाव से पहले 20 दिन की पैरोल
- जुलाई 2023 – 30 दिन की पैरोल
- 2022–2023 – पंजाब, राजस्थान और हरियाणा चुनावों से पहले कई बार फरलो
इसके अलावा, डेरा सच्चा सौदा के स्थापना दिवस और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान भी उन्हें अस्थायी रिहाई मिलती रही है।
जेल मैन्युअल के तहत मिलती है पैरोल और फरलो
प्रशासन के अनुसार, पैरोल और फरलो जेल नियमों के तहत दिए जाते हैं और यह एक निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा है। पैरोल का उद्देश्य कैदी को विशेष परिस्थितियों जैसे परिवारिक कारण, बीमारी या अन्य जरूरी स्थितियों में अस्थायी राहत देना होता है। यह अवधि सजा में शामिल की जाती है। वहीं फरलो का उद्देश्य कैदियों के मानसिक संतुलन और समाज से संपर्क बनाए रखना होता है। इसके लिए किसी विशेष कारण की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन जेल में अच्छा व्यवहार और तय सजा अवधि पूरी होना जरूरी है।
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प्रक्रिया और मंजूरी का सिस्टम
जेल प्रशासन के अनुसार, पैरोल या फरलो के लिए आवेदन करने के बाद संबंधित जेल प्रबंधन को पांच दिनों के भीतर निर्णय लेना होता है। इसके बाद जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों की मंजूरी के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि हर मामला नियमों और सुरक्षा आकलन के आधार पर तय किया जाता है, ताकि किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
लगातार रिहाई पर उठते राजनीतिक और सामाजिक सवाल
राम रहीम की बार-बार होने वाली रिहाई को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि चुनावों और बड़े आयोजनों के आसपास उनकी पैरोल की टाइमिंग संदेह पैदा करती है। वहीं दूसरी ओर, प्रशासन का तर्क है कि सभी फैसले जेल मैन्युअल और कानूनी प्रावधानों के तहत लिए जाते हैं।
बहस के केंद्र में फिर वही मुद्दा
इस ताजा पैरोल के बाद एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा में है कि क्या जेल से अस्थायी रिहाई की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है या इसमें समय और परिस्थितियों का प्रभाव भी दिखता है। फिलहाल राम रहीम 30 दिन के लिए जेल से बाहर हैं और डेरा सच्चा सौदा से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी की संभावना जताई जा रही है।
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