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Lokhitkranti > उत्तराखंड > Climate Change पर देहरादून में बड़ा मंथन, Greenhouse Gas Inventory System मजबूत करने की दिशा में अहम पहल
उत्तराखंड

Climate Change पर देहरादून में बड़ा मंथन, Greenhouse Gas Inventory System मजबूत करने की दिशा में अहम पहल

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-05-23 6:46 am
Lokhit Kranti Published 2026-05-23
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Climate Change
Climate Change पर देहरादून में बड़ा मंथन, Greenhouse Gas Inventory System मजबूत करने की दिशा में अहम पहल
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Climate Change यानी जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने सबसे गंभीर चुनौतियों में शामिल हो चुका है। बढ़ते तापमान, अनियमित मौसम, ग्लेशियरों के पिघलने और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाओं ने देशों को नई रणनीति बनाने के लिए मजबूर कर दिया है। भारत भी इस वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए लगातार अपने कदम तेज कर रहा है। इसी दिशा में देहरादून स्थित वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) में Greenhouse Gas Inventory System को मजबूत बनाने के लिए तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई।

Contents
BTR-1 के बाद अब BTR-2 की तैयारीदेशभर के वैज्ञानिकों और संस्थानों ने लिया हिस्साClimate Change से निपटने के लिए डेटा सिस्टम जरूरीऊर्जा और इंडस्ट्रियल सेक्टर पर खास फोकसEthanol Blending पर भी हुई अहम चर्चा2028 तक तय किए गए बड़े लक्ष्य

20 से 22 मई 2026 तक आयोजित इस कार्यशाला का आयोजन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और CSIR-IIP के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस दौरान देशभर के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और नीति विशेषज्ञों ने Climate Change से जुड़े आंकड़ों, रिपोर्टिंग सिस्टम और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की।

BTR-1 के बाद अब BTR-2 की तैयारी

हाल ही में भारत ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन यानी UNFCCC को अपनी पहली Biennial Transparency Report (BTR-1) सौंपी है। यह रिपोर्ट ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और जलवायु लक्ष्यों की दिशा में देश की प्रगति को दर्शाती है।

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अब भारत BTR-2 की तैयारी में जुट गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए देहरादून में आयोजित कार्यशाला में Greenhouse Gas Inventory System को और अधिक सटीक, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में Climate Change से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग और जवाबदेही और अधिक कड़ी होने वाली है। ऐसे में भारत के लिए वैज्ञानिक आंकड़ों और विश्वसनीय डेटा सिस्टम का होना बेहद जरूरी है।

देशभर के वैज्ञानिकों और संस्थानों ने लिया हिस्सा

इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देश के कई प्रमुख संस्थानों के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ शामिल हुए। इनमें CSIR-CIMFR, CMPDI, CII, IIT-ISM धनबाद, NIAS, AEEE और जादवपुर विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

विशेषज्ञों ने ऊर्जा क्षेत्र, औद्योगिक इकाइयों और परिवहन से होने वाले Greenhouse Gas Emissions के आंकड़ों पर चर्चा की। साथ ही उत्सर्जन के बेहतर आकलन और निगरानी के लिए नई तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों पर भी विचार साझा किए गए।

कार्यशाला के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि भारत जैसे तेजी से विकसित हो रहे देश के लिए आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।

Climate Change से निपटने के लिए डेटा सिस्टम जरूरी

CSIR-IIP के निदेशक डॉ. हरेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि आने वाले समय में Climate Change दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल होगा। उन्होंने कहा कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को सही तरीके से मापना और उसे कम करने के लिए नई तकनीकों पर काम करना बेहद जरूरी है।

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उन्होंने कहा कि भारत विकास की गति को बनाए रखते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए भी गंभीरता से काम कर रहा है। इसी वजह से देश Greenhouse Gas Inventory System को अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाने पर विशेष ध्यान दे रहा है।

विशेषज्ञों ने बताया कि यदि सही डेटा उपलब्ध हो तो नीति निर्माण अधिक प्रभावी हो सकता है और उत्सर्जन कम करने के लिए बेहतर योजनाएं बनाई जा सकती हैं।

ऊर्जा और इंडस्ट्रियल सेक्टर पर खास फोकस

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में ऊर्जा और इंडस्ट्रियल प्रोसेसेज एंड प्रोडक्ट यूज (IPPU) सेक्टर पर विशेष चर्चा हुई। इसमें आयरन एंड स्टील इंडस्ट्री, रोड ट्रांसपोर्ट, पाइपलाइन ट्रांसपोर्ट और विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाले उत्सर्जन का विस्तृत विश्लेषण किया गया।

विशेषज्ञों ने कहा कि भारत के औद्योगिक और परिवहन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहे हैं। ऐसे में Carbon Emissions को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक तकनीक, स्वच्छ ईंधन और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम की जरूरत बढ़ती जा रही है।

सत्रों में इस बात पर भी जोर दिया गया कि डेटा संग्रह और रिपोर्टिंग प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जाए, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर अपनी Climate Change Strategy को और मजबूत कर सके।

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Ethanol Blending पर भी हुई अहम चर्चा

कार्यशाला में Ethanol Blending को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने से Carbon Emissions को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इसके अलावा इससे भारत की विदेशी ईंधन पर निर्भरता भी घटेगी और आयात बिल कम करने में मदद मिलेगी। सरकार पहले से ही Ethanol Blending Program को तेजी से आगे बढ़ा रही है और इसे विकसित भारत 2047 के विजन से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बायोफ्यूल और ग्रीन एनर्जी जैसे विकल्प भविष्य में Climate Change के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभाएंगे।

2028 तक तय किए गए बड़े लक्ष्य

तीन दिनों तक चली इस कार्यशाला के समापन पर कई महत्वपूर्ण लक्ष्य तय किए गए। विशेषज्ञों ने BTR-2 को वर्ष 2026 के अंत तक तैयार करने और BTR-3 को 2028 तक पूरा करने का रोडमैप तैयार किया। इसके साथ ही Greenhouse Gas Inventory System को अधिक डिजिटल, वैज्ञानिक और डेटा आधारित बनाने पर सहमति बनी।

विशेषज्ञों ने कहा कि Climate Change केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय बन चुका है। ऐसे में सरकार, वैज्ञानिक संस्थानों और उद्योग जगत को मिलकर काम करना होगा।

देहरादून में आयोजित यह कार्यशाला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो भारत को जलवायु परिवर्तन से निपटने की वैश्विक रणनीति में और मजबूत बनाएगी।

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