Mount Everest Indian Climbers Death: दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर फतह हासिल करना हर पर्वतारोही का सपना होता है, लेकिन कई बार यह सपना जानलेवा भी साबित हो जाता है। Mount Everest Indian Climbers Death की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया है। नेपाल की तरफ से माउंट एवरेस्ट पर सफल चढ़ाई करने वाले दो भारतीय पर्वतारोहियों की वापसी के दौरान मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब एवरेस्ट पर एक दिन में सबसे ज्यादा लोगों के पहुंचने का नया रिकॉर्ड भी बना।
274 पर्वतारोहियों ने बनाया था नया वर्ल्ड रिकॉर्ड
बुधवार को नेपाल की ओर से कुल 274 पर्वतारोहियों ने 8,848.86 मीटर ऊंची माउंट एवरेस्ट की चोटी पर सफलतापूर्वक पहुंचकर नया इतिहास रच दिया। इस टीम में तीन भारतीय पर्वतारोही भी शामिल थे। यह पहली बार था जब एक ही दिन में इतने अधिक लोगों ने एवरेस्ट फतह किया।
लेकिन इस ऐतिहासिक उपलब्धि के तुरंत बाद Mount Everest Indian Climbers Death की दुखद खबर सामने आई। रिकॉर्ड बनाने वाली टीम में शामिल भारतीय पर्वतारोही संदीप अरे और अरुण कुमार तिवारी वापसी के दौरान जिंदगी की जंग हार गए।
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Mount Everest Indian Climbers Death: कौन थे अरुण कुमार तिवारी और संदीप अरे?
नेपाल एक्सपीडिशन ऑपरेटर्स एसोसिएशन के महासचिव ऋषि भंडारी के अनुसार, मृतकों की पहचान अरुण कुमार तिवारी और संदीप अरे के रूप में हुई है। बताया गया कि दोनों पर्वतारोही चोटी से नीचे उतरते समय बेहद थक चुके थे। गाइडों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन खराब शारीरिक स्थिति और ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। संदीप अरे की मौत गुरुवार को हुई, जबकि अरुण तिवारी की मौत का समय स्पष्ट नहीं हो पाया है।
गाइडों ने बचाने के लिए की थी पूरी कोशिश
ऋषि भंडारी ने कहा कि गाइडों ने दोनों पर्वतारोहियों को नीचे लाने के लिए ‘बहुत कड़ी मेहनत’ की। एवरेस्ट पर चढ़ाई जितनी मुश्किल होती है, उससे कहीं ज्यादा खतरनाक वापसी मानी जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, शिखर पर पहुंचने के बाद शरीर पूरी तरह थक चुका होता है। ऐसे में ऑक्सीजन लेवल गिरने, खराब मौसम और बर्फीली हवाओं के कारण हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि Mount Everest Indian Climbers Death जैसी घटनाएं अक्सर वापसी के दौरान होती हैं।
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Mount Everest Indian Climbers Death: भारत समेत दुनिया भर में शोक
इस हादसे के बाद पर्वतारोहण जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया पर लोग दोनों भारतीय पर्वतारोहियों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। कई लोगों ने इसे ‘सपनों की कीमत’ बताया है। रिकॉर्ड बनाने वाली टीम में भारतीय पर्वतारोही तुलसी रेड्डी पालपुनूरी और अजय पाल सिंह धालीवाल भी शामिल थे। वहीं, अगले दिन भारत की लक्ष्मीकांता मंडल ने भी एवरेस्ट फतह कर देश का नाम रोशन किया।
एवरेस्ट पर क्यों बढ़ रहे हैं हादसे?
विशेषज्ञ मानते हैं कि एवरेस्ट पर बढ़ती भीड़ भी हादसों का बड़ा कारण बन रही है। इस साल वसंत सीजन में 502 पर्वतारोहियों को चढ़ाई की अनुमति दी गई थी। बड़ी संख्या में पर्वतारोहियों के एक साथ चढ़ने से ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति बन जाती है। ऐसे में ऑक्सीजन खत्म होने, लंबा इंतजार और अत्यधिक थकान जानलेवा साबित हो सकती है। Mount Everest Indian Climbers Death ने एक बार फिर एवरेस्ट अभियान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दुनिया की सबसे ऊंची चोटी, लेकिन सबसे बड़ा खतरा भी
माउंट एवरेस्ट को फतह करना गौरव की बात मानी जाती है, लेकिन यहां हर कदम मौत के खतरे से भरा होता है। बेहद कम तापमान, ऑक्सीजन की कमी और अचानक बदलता मौसम पर्वतारोहियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होते हैं। फिलहाल, Mount Everest Indian Climbers Death की घटना ने पूरे देश को भावुक कर दिया है। दो भारतीय पर्वतारोहियों ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा लहराया, लेकिन वापसी में अपनी जान गंवा दी।
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