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Lokhitkranti > उत्तराखंड > Uttarakhand Homestay Policy 2026: बदले होम स्टे के नियम, अब गांव मिलकर बनेंगे नए टूरिज्म हब
उत्तराखंड

Uttarakhand Homestay Policy 2026: बदले होम स्टे के नियम, अब गांव मिलकर बनेंगे नए टूरिज्म हब

Lokhit Kranti
Last updated: 2026-05-21 7:14 am
Lokhit Kranti Published 2026-05-21
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Uttarakhand Homestay Policy 2026
Uttarakhand Homestay Policy 2026: बदले होम स्टे के नियम, अब गांव मिलकर बनेंगे नए टूरिज्म हब
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Homestay Policy Uttarakhand: उत्तराखंड सरकार ने राज्य की चर्चित Homestay Policy Uttarakhand में बड़े बदलाव करते हुए इसे नए स्वरूप में लागू करने का फैसला लिया है। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और पलायन रोकने के उद्देश्य से शुरू की गई होम स्टे योजना अब “कम्युनिटी टूरिज्म मॉडल” के साथ आगे बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि नई नीति से न केवल गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय संस्कृति, खानपान और पारंपरिक जीवनशैली को भी नई पहचान मिलेगी।

Contents
2015 में शुरू हुई थी होम स्टे योजनाक्यों जरूरी पड़ा नियमों में बदलाव?अब 6 नहीं, 8 कमरे तक मिल सकेगी अनुमतिकेवल स्थानीय निवासी ही चला सकेंगे होम स्टेपहली बार कम्युनिटी टूरिज्म मॉडल लागूगांवों को मिलेगा नई पहचान का मौकाऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और सेल्फ रिन्यूअल की सुविधाBnB और अन्य पर्यटन इकाइयों को भी शामिल किया गयाहोम स्टे संचालकों में उत्साहपलायन रोकने में मददगार साबित होगी नई नीति

पर्यटन विभाग के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में होम स्टे योजना तेजी से लोकप्रिय हुई, लेकिन इसके साथ कई जगहों पर नियमों का दुरुपयोग भी सामने आया। इसी को देखते हुए सरकार ने नई Homestay Policy Uttarakhand तैयार कर कई अहम संशोधन किए हैं। अब केवल स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता मिलेगी और सामुदायिक पर्यटन को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जाएगा।

2015 में शुरू हुई थी होम स्टे योजना

उत्तराखंड में Homestay Policy Uttarakhand की शुरुआत साल 2015 में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने और युवाओं को गांव में ही स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को अपने घरों में पर्यटकों के लिए आवास और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराने का अवसर मिला।

इस मॉडल की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अलग-अलग सरकारों ने इसे लगातार आगे बढ़ाया। पहले हरीश रावत सरकार और बाद में त्रिवेंद्र सिंह रावत तथा पुष्कर सिंह धामी सरकार ने भी इस योजना को प्राथमिकता दी।  आज राज्य में 5 हजार से अधिक पंजीकृत होम स्टे संचालित हो रहे हैं। इससे हजारों ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ी है और स्थानीय उत्पादों को भी बाजार मिला है।

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क्यों जरूरी पड़ा नियमों में बदलाव?

पर्यटन विभाग के मुताबिक Homestay Policy Uttarakhand का उद्देश्य ग्रामीण लोगों को रोजगार देना था, लेकिन धीरे-धीरे बाहरी लोगों ने भी इसका फायदा उठाना शुरू कर दिया। कई जगहों पर नियमों के खिलाफ व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने लगीं।

इसी कारण सरकार ने नियमों को और सख्त तथा व्यवस्थित बनाने का फैसला लिया। पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने बताया कि नई नीति में पारदर्शिता, डिजिटल रजिस्ट्रेशन और सामुदायिक भागीदारी पर विशेष फोकस किया गया है।

अब 6 नहीं, 8 कमरे तक मिल सकेगी अनुमति

नई Homestay Policy Uttarakhand के तहत सबसे बड़ा बदलाव कमरों की संख्या में किया गया है। पहले होम स्टे में अधिकतम 6 कमरे रखने की अनुमति थी, जिसे अब बढ़ाकर 8 कर दिया गया है।

हालांकि कुल बेड की संख्या 24 से अधिक नहीं होगी। सरकार का कहना है कि इससे छोटे स्तर पर काम करने वाले संचालकों को फायदा मिलेगा और पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

केवल स्थानीय निवासी ही चला सकेंगे होम स्टे

नई नीति के अनुसार अब केवल उत्तराखंड के स्थायी निवासी ही अपने आवासीय भवन में होम स्टे संचालित कर सकेंगे। भवन स्वामी या उसका परिवार उसी परिसर में निवासरत होना जरूरी होगा। सरकार का मानना है कि इससे योजना का असली लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचेगा और बाहरी निवेशकों द्वारा दुरुपयोग की संभावना कम होगी।

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पहली बार कम्युनिटी टूरिज्म मॉडल लागू

Homestay Policy Uttarakhand में इस बार सबसे खास पहल “सामुदायिक आधारित पर्यटन इकाई” को माना जा रहा है। इसके तहत 8 से 10 होम स्टे इकाइयों को मिलाकर एक समूह बनाया जाएगा।

यह समूह किसी एक गांव या 3 से 6 गांवों के क्लस्टर के रूप में काम करेगा। उद्देश्य यह है कि पूरा गांव पर्यटन गतिविधियों से जुड़े और सामूहिक रूप से आर्थिक लाभ प्राप्त करे। उत्तराखंड पर्यटन विभाग की अपर निदेशक पूनम चंद के अनुसार, अब गांव केवल एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि “कम्युनिटी टूरिज्म डेस्टिनेशन” के रूप में विकसित किए जाएंगे।

गांवों को मिलेगा नई पहचान का मौका

नई Homestay Policy Uttarakhand के तहत गांव अपने पारंपरिक खानपान, लोक संस्कृति, रीति-रिवाज और प्राकृतिक सुंदरता को पर्यटन से जोड़ सकेंगे।

इससे स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, ट्रांसपोर्ट, फूड सर्विस और एडवेंचर गतिविधियों में नए रोजगार अवसर बनेंगे। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि सामुदायिक मॉडल के जरिए अब छोटे और दूरस्थ गांव भी पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना पाएंगे।

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ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और सेल्फ रिन्यूअल की सुविधा

नई Homestay Policy Uttarakhand में डिजिटल सिस्टम को भी प्राथमिकता दी गई है। अब रजिस्ट्रेशन, वेरिफिकेशन और रिन्यूअल की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी।

पहले हर पांच साल में संचालकों को लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, लेकिन अब सेल्फ रिन्यूअल की सुविधा दी गई है। संचालक ऑनलाइन फीस जमा कर अपने दस्तावेज अपडेट कर सकेंगे। इससे लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक आसान होगी।

BnB और अन्य पर्यटन इकाइयों को भी शामिल किया गया

नई नीति में Bed and Breakfast (BnB) इकाइयों को भी औपचारिक रूप से पर्यटन इकाई की श्रेणी में शामिल किया गया है। इसके अलावा मोटर कारवां, टेंट कॉलोनी, योग और आयुर्वेद रिसॉर्ट, हेरिटेज होटल और पर्यटक ग्राम जैसी इकाइयों को भी नीति का हिस्सा बनाया गया है। सरकार का उद्देश्य राज्य में पर्यटन को विविध रूप देना और नए निवेश को आकर्षित करना है।

होम स्टे संचालकों में उत्साह

लैंसडाउन क्षेत्र के होम स्टे संचालक सूर्यकांत बड़थ्वाल का कहना है कि नई Homestay Policy Uttarakhand से गांवों में रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि इस योजना ने कई युवाओं को शहर छोड़कर वापस गांव लौटने के लिए प्रेरित किया है। अब लोग अपने गांव में ही सम्मानजनक आमदनी कमा पा रहे हैं।

पलायन रोकने में मददगार साबित होगी नई नीति

विशेषज्ञों का मानना है कि नई Homestay Policy Uttarakhand राज्य में पलायन रोकने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। सामुदायिक पर्यटन मॉडल गांवों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।

सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में उत्तराखंड के अधिक से अधिक गांवों को पर्यटन से जोड़ना है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो और स्थानीय युवाओं को अपने ही गांव में रोजगार मिल सके।

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