Supreme Court VLTD Order: Supreme Court of India ने देशभर में सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। इसी को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने बड़ा आदेश जारी किया है।
अब बस, टैक्सी, स्कूल वैन और दूसरे पब्लिक सर्विस वाहनों में सुरक्षा उपकरण लगाना जरूरी होगा। अदालत का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल से सड़क हादसों और अपराधों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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Supreme Court VLTD Order: परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए जरूरी होंगे सुरक्षा उपकरण
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अब किसी भी सार्वजनिक वाहन को फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट तभी दिया जाएगा, जब उसमें Vehicle Location Tracking Device (VLTD) और इमरजेंसी पैनिक बटन मौजूद होंगे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि इन उपकरणों का पूरा रिकॉर्ड वाहन डेटाबेस में दर्ज होना चाहिए। अगर वाहन मालिक इन नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो ऐसे वाहनों को सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
Supreme Court VLTD Order: पुराने और नए सभी वाहनों पर लागू होगा नियम
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह नियम केवल नए वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। पहले से चल रहे पुराने पब्लिक वाहनों में भी यह सुरक्षा व्यवस्था लागू करनी होगी।
कोर्ट ने सभी राज्यों और परिवहन विभागों को निर्देश दिया है कि तय समय के अंदर सभी वाहनों में ये उपकरण लगवाए जाएं। इससे देशभर में सार्वजनिक परिवहन को ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
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Supreme Court VLTD Order: कैसे काम करेगा ट्रैकिंग सिस्टम
VLTD एक आधुनिक ट्रैकिंग डिवाइस है, जिसकी मदद से वाहन की लाइव लोकेशन देखी जा सकती है। इससे प्रशासन को यह जानकारी मिलती रहेगी कि वाहन कहां है और किस दिशा में जा रहा है।
अगर किसी वाहन के साथ हादसा होता है या कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है, तो तुरंत कार्रवाई करना आसान हो जाएगा। कोर्ट ने कहा कि यह तकनीक यात्रियों की सुरक्षा के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।
Supreme Court VLTD Order: पैनिक बटन से तुरंत पहुंचेगी मदद
इमरजेंसी पैनिक बटन को यात्रियों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी माना गया है। अगर किसी यात्री को यात्रा के दौरान खतरा महसूस होता है, तो वह सिर्फ एक बटन दबाकर मदद मांग सकेगा।
इस अलर्ट की जानकारी सीधे कंट्रोल रूम और पुलिस तक पहुंचेगी। अदालत ने कहा कि यह सुविधा महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित होगी।
Supreme Court VLTD Order: सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि नियम बनने के बावजूद अब तक बड़ी संख्या में सार्वजनिक वाहनों में सुरक्षा उपकरण नहीं लगाए गए हैं।
कोर्ट ने कहा कि कई राज्यों में इस काम की रफ्तार बेहद धीमी है। अदालत के अनुसार यह स्थिति यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है और इसे तुरंत सुधारने की जरूरत है।
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Supreme Court VLTD Order: सड़क अनुशासन पर भी की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा के साथ-साथ ट्रैफिक अनुशासन पर भी चिंता जताई। जस्टिस जे. बी. पारदीवाला ने कहा कि भारत में लेन ड्राइविंग की आदत बहुत कम है, जिसकी वजह से सड़क हादसे बढ़ रहे हैं। कोर्ट ने लोगों से ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील की और कहा कि सड़क सुरक्षा सिर्फ सरकार की नहीं बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
Supreme Court VLTD Order: राज्यों को दिए गए सख्त निर्देश
अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि वे सार्वजनिक वाहनों में सुरक्षा उपकरण लगाने का काम जल्द पूरा करें। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि सभी वाहनों को ‘वाहन’ डेटाबेस से जोड़ा जाए ताकि उनकी रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सके। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
Supreme Court VLTD Order: वाहन कंपनियों पर भी बढ़ सकती है जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने यह संकेत भी दिया कि भविष्य में वाहन निर्माता कंपनियों को सुरक्षा उपकरण पहले से लगाकर वाहन बाजार में उतारने पड़ सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो वाहन खरीदने वाले लोगों को अलग से सिस्टम लगवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और शुरुआत से ही वाहन ज्यादा सुरक्षित होंगे।
Supreme Court VLTD Order: यात्रियों को मिलेगा सुरक्षित सफर
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे सार्वजनिक परिवहन में सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों को फायदा मिल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन नियमों को सख्ती से लागू किया गया, तो महिलाओं की सुरक्षा मजबूत होगी, अपराधों में कमी आएगी और हादसों के समय तुरंत मदद पहुंचाना आसान हो जाएगा।
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