Tamil Nadu and West Bengal election: देश के दो अहम राज्यों तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए चुनाव प्रचार मंगलवार को समाप्त हो गया। अब दोनों राज्यों में 23 अप्रैल को मतदान होगा। Tamil Nadu and West Bengal election को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर रही और आखिरी दिन तक सभी दलों ने पूरी ताकत झोंक दी।
तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर एक ही चरण में मतदान
दक्षिण भारत के अहम राज्य Tamil Nadu में इस बार सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान कराया जाएगा। निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत मतदान से 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार थम गया।
इस चुनाव में सत्ताधारी Dravida Munnetra Kazhagam के नेतृत्व वाला गठबंधन और विपक्षी Bharatiya Janata Party के नेतृत्व वाला एनडीए आमने-सामने हैं। Tamil Nadu and West Bengal election के तहत यह मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है।
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कांग्रेस-डीएमके गठबंधन पर टिकी नजरें
तमिलनाडु में Indian National Congress, डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर गठबंधन का हिस्सा है और इस बार 28 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पिछली बार पार्टी ने 25 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें उसे 18 सीटों पर जीत मिली थी।
मुख्यमंत्री M. K. Stalin के नेतृत्व में गठबंधन एक बार फिर सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रहा है। हालांकि सीट बंटवारे को लेकर शुरुआती दौर में कांग्रेस और डीएमके के बीच मतभेद भी देखने को मिले थे, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान दोनों दल एकजुट नजर आए।
राहुल गांधी और खड़गे ने संभाली कमान
कांग्रेस के चुनाव प्रचार में Rahul Gandhi और Mallikarjun Kharge ने प्रमुख भूमिका निभाई। दोनों नेताओं ने राज्य में कई रैलियां कर भाजपा और उसके सहयोगियों पर जमकर हमला बोला।
हालांकि राहुल गांधी अपने व्यस्त कार्यक्रम के चलते स्टालिन के साथ साझा मंच पर नजर नहीं आए, लेकिन खड़गे ने डीएमके नेतृत्व के साथ मंच साझा कर गठबंधन की मजबूती का संदेश दिया। Tamil Nadu and West Bengal election के दौरान यह एक अहम राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
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भाजपा और एआईएडीएमके गठबंधन भी मैदान में
तमिलनाडु में भाजपा ने All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam सहित अन्य दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव मैदान में उतरकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
कांग्रेस और डीएमके के नेताओं ने अपने भाषणों में भाजपा पर दक्षिण भारत में विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं भाजपा ने भी राज्य सरकार की नीतियों और कामकाज को मुद्दा बनाकर जनता के बीच जाने की कोशिश की।
पश्चिम बंगाल में पहले चरण के लिए तैयारियां पूरी
पूर्वी राज्य West Bengal में भी पहले चरण के मतदान के लिए प्रचार समाप्त हो चुका है। यहां 23 अप्रैल को पहले चरण और 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग होगी।
पश्चिम बंगाल में इस बार मुकाबला मुख्य रूप से सत्ताधारी All India Trinamool Congress और भाजपा के बीच माना जा रहा है, लेकिन कांग्रेस भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस पहली बार अकेले मैदान में
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस इस बार सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही है। इससे पहले 2021 में उसने वाम दलों के साथ गठबंधन किया था, लेकिन उसे एक भी सीट नहीं मिली थी और वोट शेयर भी काफी कम रहा था।
अब पार्टी को उम्मीद है कि Tamil Nadu and West Bengal election में उसका प्रदर्शन बेहतर रहेगा और वह कुछ सीटें जीतकर विधानसभा में अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगी।
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स्टार प्रचारकों ने झोंकी ताकत
चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और Sachin Pilot समेत कई बड़े नेताओं ने रैलियां कीं। राहुल गांधी ने 14 अप्रैल को राज्य में तीन जनसभाएं कर भाजपा और तृणमूल दोनों पर निशाना साधा। कांग्रेस का फोकस मालदा, मुर्शिदाबाद, नॉर्थ दिनाजपुर और कूच बिहार जैसे क्षेत्रों पर रहा, जहां पार्टी को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।
मुद्दों पर केंद्रित रहा चुनाव प्रचार
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने रोजगार, महंगाई और स्थानीय उद्योग जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। पार्टी नेताओं का दावा है कि जनता बदलाव चाहती है और इसका असर मतदान में देखने को मिलेगा। हालांकि कुछ स्थानों पर कांग्रेस को रैलियों की अनुमति न मिलने की शिकायत भी सामने आई, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया।
तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों में चुनाव प्रचार के दौरान जबरदस्त राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिलीं। अब सभी की नजरें 23 अप्रैल को होने वाले मतदान पर टिकी हैं।
Tamil Nadu and West Bengal election के नतीजे न केवल इन राज्यों की राजनीति तय करेंगे, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
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