Haryana Baisakhi Festival Kurukshetra: कुरुक्षेत्र के मेला ग्राउंड में इस बार बैसाखी केवल एक त्योहार नहीं बल्कि हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन बन गया। प्रदेश स्तरीय बैसाखी महोत्सव का आगाज़ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रिबन काटकर किया। पहली बार राज्य सरकार ने बैसाखी को इस स्तर पर बड़े सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाने की पहल की है, जो 13 और 14 अप्रैल तक लोगों को आकर्षित करेगा। यह आयोजन (Haryana Baisakhi Festival Kurukshetra) केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि ग्रामीण जीवन, परंपराओं और लोककला का जीवंत मंच बन गया है, जहां हर उम्र के लोग अपनी जड़ों से जुड़ते नजर आए।
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पतंगबाजी और ड्रोन शो ने बढ़ाया उत्साह
उद्घाटन समारोह में सबसे खास आकर्षण मुख्यमंत्री द्वारा उड़ाई गई 6 फीट लंबी रंग-बिरंगी पतंग रही, जिसे विशेष रूप से तैयार किया गया था। जैसे ही यह पतंग आसमान में पहुंची, पूरा मैदान तालियों से गूंज उठा। इसके साथ ही रात के समय आयोजित ड्रोन शो ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रोशनी और तकनीक के इस अनोखे मेल ने बैसाखी महोत्सव को पारंपरिक से आधुनिक अनुभव में बदल दिया।
खेल, परंपरा और लोककला का जीवंत मंच
महोत्सव (Haryana Baisakhi Festival Kurukshetra) में केवल मनोरंजन ही नहीं बल्कि हरियाणा की खेल और परंपरागत विरासत भी देखने को मिली। मुख्यमंत्री ने महिला और पुरुष कुश्ती दंगल का उद्घाटन किया और खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। इसके अलावा सर्कल कबड्डी, गतका, पगड़ी बांधने की पारंपरिक कला और दस्तारबंदी जैसी सांस्कृतिक गतिविधियों ने लोगों का ध्यान खींचा। ग्रामीण खेलों की ऊर्जा और युवाओं का जोश पूरे मैदान में देखने लायक था।
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हरियाणा की सांस्कृतिक झलक दिखाते स्टॉल्स
मेला परिसर में लगाए गए विभिन्न स्टॉल्स ने हरियाणा की लोकसंस्कृति को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया। पारंपरिक हस्तशिल्प, देसी खानपान और ग्रामीण जीवनशैली से जुड़ी झलकियों ने आगंतुकों को खास अनुभव दिया। मुख्यमंत्री ने स्वयं इन स्टॉल्स का निरीक्षण किया और आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं।
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लोक कलाकारों की प्रस्तुति ने बांधा समां
सांस्कृतिक मंच पर लगातार लोक संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों का आयोजन किया जा रहा है। 13 अप्रैल की शाम प्रसिद्ध कलाकार लखविंद्र वडाली की प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया, जबकि 14 अप्रैल को कुलविंद्र बिल्ला अपने गीतों से समापन समारोह को खास बनाएंगे। पूरे आयोजन के दौरान संगीत, नृत्य और लोकधुनों ने माहौल को पूरी तरह उत्सवमय बना दिया।
नई परंपरा की शुरुआत की ओर कदम
इस बैसाखी महोत्सव (Haryana Baisakhi Festival Kurukshetra) ने न केवल त्योहार को नई पहचान दी है बल्कि हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर एक नई ऊर्जा के साथ प्रस्तुत किया है। आधुनिक तकनीक, पारंपरिक खेल और लोककला का यह संगम आने वाले वर्षों में इस आयोजन को और भी भव्य बनाने की दिशा में एक मजबूत शुरुआत माना जा रहा है।
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