Omar Abdullah Trump Iran Conflict: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए तनाव को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति पर सवाल उठाए। उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah Trump Iran Conflict) ने कहा कि इस संघर्ष से अमेरिका और पूरी दुनिया को वास्तविक रूप से क्या फायदा हुआ, यह समझना मुश्किल है। उन्होंने ट्रंप की भाषा और उनके बयानों की अनियमितता पर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि सुबह एक बात, दोपहर दूसरी और शाम को तीसरी बात कहना किसी भी देश के राष्ट्रपति के लिए उपयुक्त नहीं है। उन्होंने कहा ‘जो भाषा वह इस्तेमाल करते हैं, वह सिर्फ अमेरिका के राष्ट्रपति के लिए ही नहीं, बल्कि किसी के लिए भी शोभा नहीं देती’।
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राष्ट्रपति के पद का सम्मान जरूरी
उमर अब्दुल्ला ने ट्रंप (Omar Abdullah Trump Iran Conflict) को याद दिलाया कि वह अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और उनके शब्दों का वजन बहुत है। उन्होंने कहा, ‘अगर हम सोशल मीडिया पर गाली-गलौज करते हैं तो हमारा अकाउंट बंद कर दिया जाता है। लेकिन राष्ट्रपति होने के नाते उनके शब्दों के कोई सीमाएं नहीं हैं। यही असंतुलन चिंता का विषय है।’ उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार धमकी देना और शब्दों का अनुचित प्रयोग सिर्फ तनाव को बढ़ाता है और शांति प्रयासों को कमजोर करता है।
सीजफायर के बाद विवाद
उमर (Omar Abdullah Trump Iran Conflict) ने सवाल उठाया कि अमेरिका ने हाल ही में कहा कि हॉर्मुज स्ट्रेट खुला है और यह उनके लिए बड़ी कामयाबी थी। लेकिन वास्तव में, हॉर्मुज स्ट्रेट पहले से ही सभी के लिए खुला था। उनके अनुसार, इस संघर्ष से ईरान को अब नए अवसर मिले हैं, जैसे कि टोल टैक्स लेना। उन्होंने पूछा ‘तो फिर असली हासिल क्या हुआ?।’
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इज़राइल और लेबनान पर नियंत्रण की आवश्यकता
नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता ने यह भी कहा कि ट्रंप को इज़राइल पर नियंत्रण करना होगा। उन्होंने लेबनान में नागरिकों पर हो रहे हमलों का हवाला देते हुए कहा कि अगर संघर्षविराम सफल नहीं होता तो इसका जिम्मेदार ईरान नहीं बल्कि इज़राइल होगा। उमर (Omar Abdullah Trump Iran Conflict) ने जोर देकर कहा कि युद्ध और धमकी से समाधान नहीं निकलता। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय नेताओं को जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए और किसी भी शब्द या कदम का वैश्विक असर हमेशा ध्यान में रखना चाहिए।
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उमर अब्दुल्ला ने ट्रंप पर उठाए गंभीर सवाल, कहा भरोसा नहीं किया जा सकता
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah Trump Iran Conflict) ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भरोसा करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि शायद खुद ट्रंप भी नहीं जानते कि वे अगले कदम में क्या करने वाले हैं। मीडिया से बातचीत में उमर ने कहा, ‘शायद अमेरिकी राष्ट्रपति को खुद भी नहीं पता कि वे क्या कर रहे हैं। सुबह एक बात कहते हैं, दोपहर में दूसरी और शाम को कुछ और ही बोलते हैं।’
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सबसे पहले ट्रंप को दुनिया को स्पष्ट करना चाहिए कि पश्चिम एशिया में युद्ध क्यों शुरू हुआ। उनका कहना था कि इस संघर्ष की शुरुआत ईरान ने नहीं की थी, बल्कि यह उन पर थोप दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि यदि युद्धविराम की घोषणा हो चुकी है, तो अमेरिका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह स्थायी और प्रभावी रहे। उमर (Omar Abdullah Trump Iran Conflict) ने जोर देकर कहा कि ट्रंप को इजरायल पर नियंत्रण रखना चाहिए, क्योंकि वह लगातार लेबनान पर बमबारी कर रहा है और निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं।उमर अब्दुल्ला का मानना है कि सैन्य शक्ति और धमकी से समाधान नहीं निकल सकता। उनकी राय में अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व जिम्मेदारी और संतुलित कूटनीति के माध्यम से ही शांति बनाए रख सकता है।
उमर अब्दुल्ला का संदेश
उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah Trump Iran Conflict) ने अपने बयान में साफ किया कि राजनीतिक बयानबाजी और धमकी का खेल किसी के लिए फायदेमंद नहीं है। उन्होंने अमेरिका से अपेक्षा जताई कि वह केवल सैन्य ताकत नहीं बल्कि कूटनीति और संतुलन के माध्यम से ही क्षेत्रीय तनाव को कम करे। उनका यह बयान खासकर सोशल मीडिया और वैश्विक राजनीति के संदर्भ में ध्यान आकर्षित करता है, क्योंकि यह दिखाता है कि बड़े नेताओं की भाषा और फैसले कितने व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं। उमर का यह दृष्टिकोण यह भी इंगित करता है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद में सामान्य नागरिकों की सुरक्षा और स्थिरता को सर्वोपरि रखना चाहिए। उनकी आलोचना यह समझाने का प्रयास है कि दबाव और धमकी के बजाय संवाद और संयम ही लंबे समय तक शांति बनाए रख सकता है।
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