Amit Shah Lok Sabha Speech: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में उस वक्त सियासी पारा चढ़ गया जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष द्वारा स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर तीखा प्रहार किया। शाह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की सदन में अनुपस्थिति और उनके विदेश दौरों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा का मौका आता है, तो राहुल गांधी जर्मनी या लंदन में होते हैं। उन्होंने विपक्षी दलों को नसीहत दी कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत के मुखिया यानी स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाना पूरी दुनिया में भारत की लोकतांत्रिक साख को चोट पहुँचाने जैसा है।
गृह मंत्री ने करीब चार दशक बाद स्पीकर के खिलाफ लाए गए इस अविश्वास प्रस्ताव को ‘अफसोसजनक’ करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्पीकर किसी एक दल का नहीं, बल्कि पूरे सदन का संरक्षक होता है। शाह ने विपक्ष के उन आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि विपक्षी सांसदों का माइक बंद कर दिया जाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो सदस्य नियमों का पालन नहीं करते, उनका माइक बंद होना ही चाहिए और यह अधिकार किसी नई सरकार ने नहीं, बल्कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के समय से चले आ रहे नियमों के तहत स्पीकर को प्राप्त है।
40 साल बाद की ‘अलोकतांत्रिक’ घटना
अमित शाह ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ यह प्रस्ताव लाना विपक्ष की हताशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा, ‘करीब 4 दशक बाद एक बार फिर से लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया है। ये अफसोसजनक घटना है। स्पीकर किसी दल के नहीं बल्कि सदन के होते हैं। वे सदन के सभी सदस्यों के अधिकारों के संरक्षक होते हैं।’ शाह ने याद दिलाया कि जब स्पीकर की नियुक्ति हुई थी, तब पक्ष और विपक्ष दोनों ने मिलकर उन्हें आसन पर बिठाया था, जिसका अर्थ है कि उन्हें सबका समर्थन प्राप्त था। (Amit Shah Lok Sabha Speech)
नियमों की मर्यादा पर जोर
विपक्ष द्वारा सदन की कार्यवाही में बाधा डालने पर शाह ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि लोकसभा कोई मनोरंजन का स्थान नहीं है। उन्होंने कहा, ’75 साल से दोनों सदनों ने लोकतंत्र की नींव को गहरा बनाया है लेकिन विपक्ष ने इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सदन आपसी विश्वास से चलता है। सदन कोई मेला नहीं, यहां नियम के हिसाब से बोलना होता है।’ उन्होंने स्पष्ट किया कि असंसदीय शब्दों को कार्यवाही से हटाना और नियम तोड़ने वालों को टोकना स्पीकर का संवैधानिक दायित्व है। (Amit Shah Lok Sabha Speech)
राहुल गांधी की अनुपस्थिति पर बड़ा हमला
राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए शाह ने उनके ‘अटेंडेंस’ और विदेशी दौरों का कच्चा चिट्ठा खोल दिया। उन्होंने कहा, ‘ये लोग चर्चा करना ही नहीं चाहते। जब बोलने का मौका आता है तो राहुल गांधी जर्मनी, लंदन में होते हैं। विपक्ष के नेता कहते हैं कि उनको बोलने नहीं दिया जाता, जबकि सच यह है कि 18वीं लोकसभा में कांग्रेस के सदस्य 157 घंटे से ज्यादा बोले हैं।’ शाह ने आगे कहा कि राहुल गांधी ने न तो राष्ट्रपति के अभिभाषण में हिस्सा लिया और न ही किसी महत्वपूर्ण सरकारी विधेयक पर चर्चा की, फिर भी वे बाहर जाकर लोकतंत्र की दुहाई देते हैं। (Amit Shah Lok Sabha Speech)
अनुशासन पर दो-टूक
विपक्ष के ‘माइक म्यूट’ वाले आरोपों पर शाह ने कहा कि सदन में अनुशासन सर्वोपरि है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, ‘कुछ सदस्यों ने कहा कि माइक बंद हो रहा है, इसलिए अविश्वास प्रस्ताव लाए हैं। अभी गिरिराज सिंह का माइक बंद हुआ। जो नियम से नहीं चलेगा उसका माइक बंद होता है और बंद होना ही चाहिए। नियम का उल्लंघन करने पर स्पीकर को अधिकार है कि उनको बैठा दे।’ (Amit Shah Lok Sabha Speech)
ओम बिरला के ‘नैतिक आधार’ का बचाव
अमित शाह ने विपक्षी सांसदों को स्पीकर ओम बिरला को नैतिकता न सिखाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान भी मर्यादा बनाए रखना बिरला जी की खासियत है। उन्होंने कहा, ‘बिरला साहब को मोरल ग्राउंड मत सिखाइए। जो प्रस्ताव ये लाए हैं, वह नियम अनुसार ही नहीं है, फिर भी उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया गया।’ (Amit Shah Lok Sabha Speech)



