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Lokhitkranti > Blog > राष्ट्रीय > Manipur News: मणिपुर हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, जांच कमिटी को ₹10-₹10 लाख देने का आदेश
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Manipur News: मणिपुर हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, जांच कमिटी को ₹10-₹10 लाख देने का आदेश

ShreeJi
Last updated: 2026-02-26 7:57 अपराह्न
ShreeJi Published 2026-02-26
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Manipur Violence Supreme Court
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Manipur Violence Supreme Court: भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा मामले की सुनवाई करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने पाया कि हिंसा पर नजर रखने के लिए बनाई गई जांच कमिटी के सदस्यों को उनके आने-जाने का खर्च और दूसरी बकाया रकम समय पर नहीं दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि यह न सिर्फ एडमिनिस्ट्रेटिव लापरवाही है बल्कि इससे न्यायिक प्रक्रिया में भी रुकावट आती है।

Contents
Manipur Violence Supreme Court: जांच कमिटी का क्या है रोल?Manipur Violence Supreme Court: CBI और SIT को सख्त निर्देशManipur Violence Supreme Court: SLSA को फ्री लीगल एड देने का दिया निर्देशManipur Violence Supreme Court: मणिपुर हिंसा – बैकग्राउंडManipur Violence Supreme Court: कोर्ट की सख्त टिप्पणीManipur Violence Supreme Court: पीड़ितों के अधिकारों पर जोरManipur Violence Supreme Court: आगे क्या होगा?

कोर्ट ने कमिटी के हर सदस्य को तुरंत ₹10 लाख का अंतरिम पेमेंट करने का आदेश दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि जिन लोगों को न्याय की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन्हें पैसे की तंगी नहीं दी जा सकती।

Manipur Violence Supreme Court: जांच कमिटी का क्या है रोल?

मणिपुर में हुई हिंसा की घटनाओं की निष्पक्ष जांच और निगरानी के लिए शीर्ष अदालत ने एक विशेष समिति का गठन किया था। इस समिति का मकसद हिंसा से जुड़े मामलों की प्रोग्रेस पर नजर रखना, पीड़ितों की सुरक्षा और अधिकार पक्का करना और जांच के लिए की गई कार्रवाई पर नजर रखना था, लेकिन जब कमेटी को ही बेसिक रिसोर्स और पेमेंट नहीं मिला, तो सवाल उठना स्वाभाविक था।

Manipur Violence Supreme Court: CBI और SIT को सख्त निर्देश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को भी जरूरी निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि, चार्जशीट की कॉपी सभी पीड़ितों और उनके परिवारों को दी जानी चाहिए। जांच प्रोसेस में ट्रांसपेरेंसी पक्की की जानी चाहिए। केस के स्टेटस पर रेगुलर अपडेट दिए जाने चाहिए।

यह कदम इसलिए जरूरी है क्योंकि कई पीड़ित परिवारों ने शिकायत की है कि उन्हें केस की प्रोग्रेस के बारे में जानकारी नहीं मिल रही है।

Read : AI समिट प्रदर्शन केस में बड़ा मोड़, दिल्ली पुलिस ने मांगी 5 दिन की रिमांड, कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

Manipur Violence Supreme Court: SLSA को फ्री लीगल एड देने का दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (SLSA) को हिंसा से प्रभावित लोगों को मुफ़्त कानूनी मदद देने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर या बेघर हुए पीड़ितों को न्याय दिलाने की ज़िम्मेदारी राज्य की है। मुफ्त कानूनी मदद पक्का करने से पीड़ितों को कोर्ट में अपने अधिकारों के लिए लड़ने में मदद मिलेगी।

Manipur Violence Supreme Court: मणिपुर हिंसा – बैकग्राउंड

हाल के महीनों में मणिपुर में जातीय तनाव और हिंसा की कई घटनाएं हुई हैं। हजारों लोग बेघर हो गए, सैकड़ों घर जल गए, और कई परिवारों ने अपनों को खो दिया।

हिंसा की गंभीरता को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया और मामले की निगरानी की। कोर्ट का मानना है कि जब राज्य का सिस्टम कमजोर होता है, तो न्यायपालिका की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

Manipur Violence Supreme Court: कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर जांच करने वाली कमेटी ही रिसोर्स के लिए संघर्ष करेगी, तो पीड़ितों को न्याय कैसे मिलेगा? कोर्ट ने साफ किया कि, ‘न्यायिक प्रक्रिया में देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।’ इस टिप्पणी से प्रशासन को साफ संदेश जाता है कि कोर्ट इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रहा है।

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Manipur Violence Supreme Court: पीड़ितों के अधिकारों पर जोर

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि चार्जशीट की कॉपी देना सिर्फ एक फॉर्मेलिटी नहीं है, बल्कि पीड़ितों का कानूनी हक है। इससे पीड़ित अपने केस की प्रोग्रेस को ट्रैक कर सकेंगे, अपने वकीलों के साथ स्ट्रेटेजी बना सकेंगे, और ज्यूडिशियल प्रोसेस में एक्टिवली हिस्सा ले सकेंगे।

Manipur Violence Supreme Court: आगे क्या होगा?

अब सबकी नजरें इन बातों पर हैं कि, क्या जांच एजेंसियां डेडलाइन के अंदर अपना काम पूरा कर पाएंगी? क्या पीड़ितों को समय पर कानूनी मदद मिलेगी? क्या दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी? सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह रेगुलर तौर पर मामले की निगरानी करेगा और जरूरत पड़ने पर और सख्त आदेश जारी कर सकता है।

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