Delhi Air Quality Monitoring: राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने की रणनीति अब और अधिक डेटा आधारित होने जा रही है। दिल्ली सरकार ने 6 नए सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (CAAQMS) शुरू किए हैं। इसके साथ ही शहर में ऐसे स्टेशनों की कुल संख्या बढ़कर 46 हो गई है, जो देश में सबसे अधिक मानी जा रही है। सरकार का दावा है कि यह विस्तार केवल आंकड़ों की बढ़ोतरी नहीं, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण (Delhi Air Quality Monitoring) के लिए एक सशक्त तकनीकी ढांचा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
किन-किन जगहों पर लगाए गए नए स्टेशन?
नए स्टेशन प्रमुख शैक्षणिक और रणनीतिक स्थलों पर स्थापित किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं-
- जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU)
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU)
- ISRO अर्थ स्टेशन, मलचा महल (सेंट्रल रिज के पास)
- दिल्ली कैंट
- कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स
- नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (वेस्ट कैंपस)
इन सभी स्टेशनों से प्राप्त लाइव डेटा अब दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की वेबसाइट पर देखा जा सकता है।
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जल्द ही CPCB नेटवर्क से जुड़ेंगे
अधिकारियों के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर इन स्टेशनों का पूरा डेटा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) नेटवर्क से जोड़ दिया जाएगा। इससे राष्ट्रीय स्तर पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) की सटीकता और बढ़ेगी। डेटा के केंद्रीकृत होने से न केवल दिल्ली बल्कि पूरे एनसीआर क्षेत्र की हवा की गुणवत्ता का बेहतर विश्लेषण संभव होगा।
डेटा आधारित कार्रवाई पर जोर
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि नए स्टेशन प्रदूषण के खिलाफ ‘डेटा आधारित कार्रवाई’ को मजबूती देंगे। उनके अनुसार, लाइव डेटा मिलने से तुरंत निर्णय लेना आसान होगा, चाहे बात वाहनों के उत्सर्जन की हो या निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण की। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही जनता का भरोसा मजबूत होता है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में मॉनिटरिंग और मिटिगेशन (Delhi Air Quality Monitoring) दोनों क्षेत्रों में तेजी लाई जा रही है।
हाइपर-लोकल डेटा से क्या होगा फायदा?
नए CAAQMS स्टेशन PM2.5, PM10 और अन्य प्रदूषकों के स्तर की हाइपर-लोकल जानकारी देंगे। इससे अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण (Delhi Air Quality Monitoring) के स्रोतों की पहचान करना आसान होगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी विशेष क्षेत्र में PM2.5 का स्तर अचानक बढ़ता है, तो संबंधित एजेंसियां तुरंत निरीक्षण कर कारणों की जांच कर सकती हैं। इससे कार्रवाई अधिक सटीक और प्रभावी होगी।
‘वायु रक्षक अभियान’ और आगे की योजना
सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण (Delhi Air Quality Monitoring) के लिए ‘वायु रक्षक अभियान’ भी शुरू किया है, जिसके तहत 100 प्रवर्तन कर्मी तैनात किए गए हैं। ये टीमें निर्माण स्थलों, औद्योगिक इकाइयों और सड़कों पर धूल नियंत्रण उपायों की निगरानी करेंगी। इसके अलावा 14 और नए मॉनिटरिंग स्टेशन लगाने की योजना है, ताकि पूरे वर्ष प्रदूषण पर व्यापक नजर रखी जा सके।
दिल्ली की अग्रणी भूमिका
दिल्ली पहले ही प्रदूषण (Delhi Air Quality Monitoring) से जूझने वाले प्रमुख महानगरों में गिनी जाती है। ऐसे में 46 स्टेशनों का नेटवर्क इसे शहरी वायु गुणवत्ता प्रबंधन में अग्रणी बनाता है। केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि सटीक डेटा और सतत निगरानी ही दीर्घकालिक समाधान का आधार हैं। नए स्टेशन इसी दिशा में मजबूत कदम माने जा रहे हैं। राजधानी में साफ हवा की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है, लेकिन तकनीक और पारदर्शिता के सहारे समाधान की राह जरूर मजबूत होती दिख रही है।
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