Himachal Climate Report: हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को लेकर राज्य सरकार ने गंभीरता दिखाते हुए एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने मंगलवार को ‘साइंटिफिक असेसमेंट ऑफ टैकलिंग नॉन कार्बनडाईऑक्साइड एमीशंसः पाथवेज फॉर हिमाचल प्रदेश’ शीर्षक से एक विस्तृत Himachal Climate Report जारी की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि Climate Change अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्थिरता से जुड़ी चुनौती बन चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में राज्य ने अप्रत्याशित बादल फटने, अचानक बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियरों के सिकुड़ने जैसी घटनाओं का सामना किया है। उन्होंने वर्ष 2023 की आपदा का उल्लेख करते हुए बताया कि उस प्राकृतिक संकट में 23 हजार से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए थे। उनके अनुसार, इन घटनाओं को चेतावनी के रूप में लेते हुए दीर्घकालिक और वैज्ञानिक रणनीति अपनाने की आवश्यकता है।
हिमालय की संवेदनशीलता पर चिंता
सीएम सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश केवल एक राज्य नहीं, बल्कि हिमालयी पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां के ग्लेशियर, नदियां, वन और पर्वत न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश की जल और पर्यावरणीय सुरक्षा से जुड़े हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि हिमालयी क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता के दूरगामी दुष्परिणाम हो सकते हैं।
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उन्होंने जल संसाधनों से जुड़े लंबित मुद्दों का भी उल्लेख किया और कहा कि जब तक पड़ोसी राज्य भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के बकाया मामलों पर स्पष्ट आश्वासन नहीं देते, तब तक किशाऊ और रेणुका बांध जैसी परियोजनाओं पर आगे बढ़ना संभव नहीं होगा। हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि इस दिशा में कुछ सकारात्मक बातचीत हुई है।
औषधीय पौधों की खेती को नई दिशा
Himachal Climate Report कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार ने निजी क्षेत्र के साथ मिलकर औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौते किए। Dabur India Limited के साथ हुए समझौते के तहत प्रदेश के किसानों को हर वर्ष 12 लाख गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। अगले दस वर्षों में कुल 1.20 करोड़ पौधों का वितरण किया जाएगा, जिससे स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने और पारिस्थितिक संतुलन को मजबूत करने का लक्ष्य है।
निम्न और मध्य पहाड़ी क्षेत्रों में आंवला, हरड़, बहेड़ा, काकड़ासिंगी और लोधर जैसी प्रजातियों के पौधे वितरित किए जाएंगे। वहीं मध्य और उच्च पहाड़ी क्षेत्रों में जटामांसी, कुटकी, सुगंधबाला, पदम काष्ठ और पुष्करमूल जैसी प्रजातियों को बढ़ावा दिया जाएगा। अल्पाइन क्षेत्रों में अतीस और विष जैसी दुर्लभ जड़ी-बूटियों की खेती को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
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महिला किसानों पर विशेष फोकस
दूसरा समझौता मैसर्स करण सिंह वैद्य, सोलन के साथ पांच वर्षों के लिए किया गया है। इस पहल के तहत चयनित औषधीय पौधों की खेती, संरक्षण और मूल्य श्रृंखला विकास पर काम किया जाएगा। हल्दी, अश्वगंधा, शतावरी, तुलसी, चिरायता और हिमालयन जेंटियन जैसी प्रजातियों की खेती को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रारंभिक चरण में 108 बीघा से अधिक भूमि पर यह परियोजना शुरू की जाएगी, जिसमें कम से कम 225 महिला किसानों को शामिल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को कृषि आधारित उद्यमों से जोड़कर उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ाना है।
ग्रीन एनर्जी स्टेट बनने की दिशा में कदम
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को देश का पहला हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि तीन वर्ष पहले तय किए गए इस लक्ष्य की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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वर्तमान वर्ष के लिए 200 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। युवाओं को सौर परियोजनाएं स्थापित करने के लिए सब्सिडी दी जा रही है, ताकि स्थानीय स्तर पर ऊर्जा उत्पादन और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिल सके।
ग्रीन हाइड्रोजन में भी पहल
नालागढ़ में Oil India Limited के सहयोग से एक मेगावाट क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में हिमाचल प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में उभरेगा।
संतुलित विकास पर जोर
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना ही भविष्य की कुंजी है। राज्य सरकार वैज्ञानिक अनुसंधान, हरित ऊर्जा, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के माध्यम से Climate Change का सामना करने की रणनीति पर काम कर रही है।
Himachal Climate Report का विमोचन और औषधीय खेती व हरित ऊर्जा से जुड़ी घोषणाएं इस बात का संकेत हैं कि हिमाचल प्रदेश Climate Change की चुनौती से निपटने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रहा है। आने वाले समय में इन पहलों का प्रभाव राज्य की पर्यावरणीय और आर्थिक स्थिति दोनों पर देखने को मिल सकता है।
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