Bharat Taxi Cooperative Ride India: देश के राइड-हेलिंग बाजार में एक बड़ा बदलाव दस्तक दे चुका है। अमित शाह ने दिल्ली में देश का पहला कोऑपरेटिव-बेस्ड राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म भारत टैक्सी लॉन्च (Bharat Taxi Cooperative Ride India) कर ड्राइवरों को सीधा मालिक बनाने की पहल की है। यह पहल न केवल पारंपरिक ऐप-आधारित टैक्सी कंपनियों को चुनौती देती है, बल्कि ड्राइवरों को आर्थिक भागीदारी का नया मॉडल भी देती है।
क्या है ‘भारत टैक्सी’ का नया मॉडल?
‘भारत टैक्सी’ को मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट, 2002 के तहत रजिस्टर किया गया है और 6 जून 2025 से इसकी औपचारिक शुरुआत हुई। दो महीने के सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद इसे पहले चरण में दिल्ली-एनसीआर और गुजरात (Bharat Taxi Cooperative Ride India) में शुरू किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों में इसे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तारित किया जाए। इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खासियत है जीरो कमीशन और सर्ज-फ्री प्राइसिंग मॉडल। यानी ड्राइवरों की कमाई पर 20-30 प्रतिशत तक का कट नहीं लगेगा और यात्रियों को सर्ज प्राइसिंग का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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‘जो मेहनत करे, वही मालिक बने’ – अमित शाह
टैक्सी ड्राइवरों से संवाद करते हुए अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा राइड-हेलिंग कंपनियों का मॉडल मालिकों को अमीर बनाने पर आधारित है, जबकि भारत टैक्सी का मकसद ड्राइवरों को मालिक बनाना है। उन्होंने कहा, ‘कॉन्सेप्ट यह है कि जो मेहनत कर रहा है, उसे प्रॉफिट मिलना चाहिए, किसी अमीर आदमी को नहीं। फर्क सिर्फ इतना है कि आप मालिक हैं।’ यह बयान सीधे तौर पर निजी राइड-हेलिंग कंपनियों (Bharat Taxi Cooperative Ride India) के बिजनेस मॉडल पर सवाल खड़ा करता है और सहकारी ढांचे को वैकल्पिक आर्थिक मॉडल के रूप में पेश करता है।
सिर्फ 500 रुपये में हिस्सेदारी
भारत टैक्सी से जुड़ने के लिए ड्राइवरों को केवल 500 रुपये का निवेश करना होगा। यह निवेश उन्हें प्लेटफॉर्म में हिस्सेदार बनाता है। अमित शाह ने समझाया कि यदि तीन साल में भारत टैक्सी 25 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाती है, तो उसका 20 प्रतिशत यानी 5 करोड़ रुपये प्लेटफॉर्म के पूंजी खाते में जमा होगा और 80 प्रतिशत राशि ड्राइवरों के खातों में उनकी भागीदारी के आधार पर वितरित की जाएगी। मुनाफे का वितरण इस बात पर निर्भर करेगा कि किस ड्राइवर की टैक्सी कितने किलोमीटर चली। यानी जितना अधिक काम, उतना अधिक लाभांश।
तीन साल का धैर्य, फिर मुनाफे में हिस्सेदारी
अभी ड्राइवरों को तय किराया मिलेगा, लेकिन उन्हें तीन साल तक मुनाफे के वितरण के लिए इंतजार करना होगा। शाह ने कहा कि मालिक होने के नाते ड्राइवरों को लाभ में हिस्सा मिलना चाहिए, और यह हिस्सा तय समय के बाद दिया जाएगा। यह मॉडल दीर्घकालिक भागीदारी और स्थिरता पर आधारित है।
मौजूदा कंपनियों को सीधी चुनौती
फिलहाल देश के राइड-हेलिंग बाजार में Uber, Ola और Rapido जैसे निजी प्लेयर्स का दबदबा है। इन कंपनियों पर अक्सर उच्च कमीशन, सर्ज प्राइसिंग और ड्राइवरों की आय में अस्थिरता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। भारत टैक्सी (Bharat Taxi Cooperative Ride India) खुद को विदेशी निवेश वाले प्लेटफॉर्म्स के मुकाबले ‘देसी विकल्प’ के रूप में पेश कर रही है। सहकारी मॉडल के जरिए यह ड्राइवरों को आर्थिक स्वायत्तता और सामूहिक स्वामित्व का संदेश देती है।
क्या बदलेगा बाजार का समीकरण?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल होता है तो यह गिग इकॉनमी (Bharat Taxi Cooperative Ride India) के ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकता है। ड्राइवरों की आय में पारदर्शिता, निश्चित किराया और लाभांश का वादा इस पहल को अलग बनाता है। हालांकि, असली परीक्षा इसके विस्तार और तकनीकी दक्षता में होगी। ऐप की विश्वसनीयता, ग्राहक अनुभव और सेवा की निरंतरता ही तय करेगी कि भारत टैक्सी निजी कंपनियों को कितनी टक्कर दे पाती है। फिलहाल इतना तय है कि ‘ड्राइवर से मालिक’ का यह नारा देश के राइड-हेलिंग सेक्टर में नई बहस और नई उम्मीद दोनों लेकर आया है।
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