Javed Akhtar React Taliban New law: अफगानिस्तान में लागू किए गए तालिबान के नए कानूनों ने एक बार फिर महिलाओं की स्थिति को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता की लहर पैदा कर दी है। इन नियमों के तहत घरेलू हिंसा को कुछ शर्तों के साथ कानूनी मान्यता दिए जाने की खबर सामने आने के बाद मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे महिलाओं की गरिमा और स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार बताया है। इस फैसले को लेकर दुनिया भर में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
भारत के प्रसिद्ध गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी नाराजगी जताई है। उन्होंने इस कानून को ‘शर्मनाक’ बताते हुए मुस्लिम धर्मगुरुओं से अपील की है कि वे धर्म के नाम पर लागू किए जा रहे ऐसे नियमों की बिना शर्त निंदा करें और महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में आगे आएं।
क्या कहता है तालिबान का नया कानून?
रिपोर्ट्स के अनुसार, तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने 90 पन्नों की नई दंड संहिता को मंजूरी दी है। इस कानून में पति द्वारा पत्नी की पिटाई को कुछ परिस्थितियों में स्वीकार्य माना गया है। नियमों के मुताबिक, यदि मारपीट से गंभीर चोट या हड्डी टूटने जैसी स्थिति नहीं बनती, तो इसे अपराध नहीं माना जाएगा। सबसे विवादास्पद पहलू यह है कि पिटाई को साबित करने की जिम्मेदारी भी महिला पर ही डाली गई है। इतना ही नहीं, यदि पति दोषी पाया जाता है, तो भी उसके लिए 15 दिन की सजा का प्रावधान रखा गया है। (Javed Akhtar React Taliban New law)
महिलाओं की स्वतंत्रता पर भी लगाम
नए नियम केवल घरेलू हिंसा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को भी सीमित करते नजर आते हैं। कानून के तहत यदि कोई महिला पति की अनुमति के बिना घर छोड़ती है या मायके जाती है, तो उसे तीन महीने तक जेल की सजा हो सकती है। इतना ही नहीं, ऐसी महिला को शरण देने वाले रिश्तेदारों को भी अपराधी माना जा सकता है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ये नियम महिलाओं की आवाजाही, निर्णय लेने की क्षमता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लगभग समाप्त करने जैसे हैं। (Javed Akhtar React Taliban New law)

जावेद अख्तर की कड़ी प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि धर्म के नाम पर महिलाओं के खिलाफ ऐसे कानून लागू करना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने मुस्लिम धर्मगुरुओं से अपील की कि वे इस मुद्दे पर चुप्पी न साधें और खुलकर इसकी निंदा करें। उनका मानना है कि यह सिर्फ एक देश का मामला नहीं, बल्कि महिलाओं के मूल अधिकारों और मानव गरिमा से जुड़ा वैश्विक प्रश्न है। (Javed Akhtar React Taliban New law)
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वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता
मानवाधिकार संगठनों ने इस कानून को महिलाओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता के खिलाफ अब तक के सबसे खतरनाक कदमों में से एक बताया है। उनका कहना है कि इससे महिलाओं के खिलाफ हिंसा को संस्थागत वैधता मिल सकती है और न्याय की प्रक्रिया और भी कठिन हो सकती है। (Javed Akhtar React Taliban New law)



