Lashkar-e-Taiba Women Terror Wing: साउथ एशिया में एक बार फिर आतंकी साजिशें चर्चा में हैं। इंटेलिजेंस सूत्रों के मुताबिक, जैश-ए-मोहम्मद के बाद अब लश्कर-ए-तैयबा अपने संगठन में महिला विंग शुरू करने की तैयारी कर रहा है। खबर है कि पाकिस्तान में दो नए ट्रेनिंग सेंटर बनाए जा रहे हैं, जहां महिलाओं को खास आतंकी ट्रेनिंग मिलेगी।
इस कदम को सिर्फ एक स्ट्रेटेजिक बदलाव ही नहीं, बल्कि आतंकवाद के नेचर में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
Lashkar-e-Taiba Women Terror Wing: क्या है पूरा मामला?
इंटेलिजेंस एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा अब अपनी एक्टिविटी को नए तरीके से बढ़ाने की प्लानिंग कर रहा है। इस प्लान के तहत, संगठन महिलाओं को भर्ती करेगा और उन्हें आतंकी एक्टिविटी के लिए ट्रेन करेगा। सूत्रों के मुताबिक –
- पाकिस्तान के अंदर दो स्पेशल ट्रेनिंग कैंप बनाए जा रहे हैं।
- महिलाओं को हथियार चलाने, एक्सप्लोसिव बनाने और सीक्रेट ऑपरेशन की ट्रेनिंग दी जाएगी।
- सोशल मीडिया और धार्मिक प्रचार के जरिए भर्ती अभियान चलाए जाएंगे।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि महिला विंग के जरिए, संगठन सिक्योरिटी एजेंसियों की निगरानी से बचने की कोशिश कर सकता है।
Lashkar-e-Taiba Women Terror Wing: महिला टेररिस्ट विंग क्यों?
समय के साथ टेररिस्ट संगठनों की स्ट्रैटेजी बदल गई है। पहले, वे ज़्यादातर पुरुषों को भर्ती करते थे, लेकिन अब महिला विंग बनाने के कई संभावित कारण बताए जा रहे हैं –
- सिक्योरिटी चेक के दौरान कम शक – महिलाएं अक्सर कम संवेदनशील होती हैं।
- प्रोपेगैंडा का असर – संगठन अपने प्रोपेगैंडा के लिए महिला आतंकवादियों का इस्तेमाल कर सकता है।
- नई पीढ़ी को जोड़ना – युवा महिलाओं को कट्टरपंथी विचारधारा में ढालने की कोशिश।
एनालिस्ट का कहना है कि इस स्ट्रैटेजी से इंटरनेशनल चिंताएं बढ़ सकती हैं।
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Lashkar-e-Taiba Women Terror Wing: पाकिस्तान में बनाए जा रहे हैं कैंप
रिपोर्ट के मुताबिक, तैयार किए जा रहे दो सेंटर बॉर्डर एरिया के पास बताए जा रहे हैं। इन कैंप में शामिल हैं हथियारों की ट्रेनिंग, सर्विलांस से बचने के तरीके, साइबर कम्युनिकेशन ट्रेनिंग और कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार। सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह प्लान पूरी तरह से लागू हो गया, तो यह इलाके की सिक्योरिटी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
Lashkar-e-Taiba Women Terror Wing: भारत और इंटरनेशनल कम्युनिटी के लिए खतरा
भारत लंबे समय से क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म का सामना कर रहा है। अगर महिला विंग एक्टिव हो जाती है, तो यह एक नई चुनौती बन सकती है।
- सिक्योरिटी एजेंसियों को नई स्ट्रेटेजी बनानी होंगी।
- एयरपोर्ट और बॉर्डर चेकपॉइंट पर नए प्रोटोकॉल लागू किए जा सकते हैं।
- पाकिस्तान पर इंटरनेशनल प्रेशर बढ़ सकता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह के कदम से साउथ एशिया में अस्थिरता बढ़ सकती है।
Lashkar-e-Taiba Women Terror Wing: रेडिकलाइजेशन और सोशल मीडिया की भूमिका
आज के समय में, सोशल मीडिया आतंकवादी संगठनों के लिए एक बड़ा हथियार बन गया है। महिला विंग के लिए भर्ती में एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स, धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले वीडियो और फेक नैरेटिव का इस्तेमाल किया जा सकता है।
युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से बचाने के लिए जागरूकता और डिजिटल मॉनिटरिंग को जरूरी माना जाता है।
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Lashkar-e-Taiba Women Terror Wing: सिक्योरिटी एजेंसियां क्या कह रही हैं?
इस मामले पर कोई ऑफिशियल बयान नहीं आया है, लेकिन सिक्योरिटी एजेंसियां कथित तौर पर अलर्ट पर हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार महिला आतंकवादी नेटवर्क का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। लोकल मॉड्यूल के साथ कोऑर्डिनेशन बढ़ सकता है। फंडिंग और लॉजिस्टिक्स बदल सकते हैं।
Lashkar-e-Taiba Women Terror Wing: इंटरनेशनल दबाव और डिप्लोमेसी
दुनिया पहले से ही आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान पर करीब से नजर रख रही है। अगर महिला विंग कन्फर्म हो जाती है, तो इससे ग्लोबल स्टेज पर नई बहस शुरू हो सकती है। यूनाइटेड नेशंस और दूसरे इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की मांग कर रहे हैं। इस कदम से पाकिस्तान की इमेज पर असर पड़ सकता है।
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