India AI Impact Summit 2026: राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित India AI Impact Summit 2026 ने वैश्विक स्तर पर भारत की डिजिटल सोच और तकनीकी नेतृत्व को नई पहचान दी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) जैसे भविष्यनिर्माता विषय पर यह वैश्विक सम्मेलन विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों की भागीदारी और चिंताओं को केंद्र में रखा गया।
India AI Impact Summit 2026 का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत के लिए एआई केवल आर्थिक लाभ का माध्यम नहीं, बल्कि जनकल्याण का उपकरण है। उन्होंने कहा कि भारत की एआई नीति ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर आधारित होगी।
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मानव-केंद्रित एआई: विकास का नया मॉडल
प्रधानमंत्री ने एआई को सभ्यता के चौराहे पर खड़ी तकनीक बताया। उनका कहना था कि यह तकनीक मानव क्षमताओं को अभूतपूर्व विस्तार दे सकती है, लेकिन यदि इसे जिम्मेदारी से न अपनाया जाए तो यह सामाजिक असंतुलन भी पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि इस समिट में ‘इम्पैक्ट’ शब्द को जानबूझकर केंद्र में रखा गया है। तकनीक का अंतिम उद्देश्य मानवता की सेवा होना चाहिए, न कि उसका प्रतिस्थापन। भारत एआई को मानव-केंद्रित बनाकर ऐसा मॉडल विकसित करना चाहता है जो नवाचार के साथ-साथ सामाजिक समानता को भी बढ़ावा दे।
ग्लोबल साउथ की आवाज को प्राथमिकता
India AI Impact Summit 2026 की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसने ‘ग्लोबल साउथ’ की चिंताओं को विश्व पटल पर मजबूती से रखा। शिखर सम्मेलन में यह स्पष्ट किया गया कि एआई केवल विकसित देशों की जागीर नहीं होनी चाहिए। AI गवर्नेंस और निष्पक्ष डेटा सेट पर चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि तकनीकी मॉडल में स्थानीय संस्कृतियों और भाषाओं का समावेश अनिवार्य है।
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विशेषकर कृषि उत्पादकता बढ़ाने और भाषाई बाधाओं को दूर करने के लिए एआई के इस्तेमाल पर जो रोडमैप तैयार किया गया, वह विकासशील राष्ट्रों के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा। भारत ने यह संदेश दिया कि एआई का असली प्रभाव तभी दिखेगा जब यह तकनीक गरीब से गरीब देश के नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी।
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‘विकसित भारत 2047’ में एआई की भूमिका
प्रधानमंत्री ने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में एआई की भूमिका को निर्णायक बताया। उनके अनुसार, एआई शहरी और ग्रामीण भारत के बीच की खाई को पाटने का सशक्त माध्यम बन सकता है।
शिक्षा और स्वास्थ्य में बदलाव
उन्होंने बताया कि भारतीय भाषाओं में संचालित AI प्लेटफॉर्म ग्रामीण क्षेत्रों और सरकारी स्कूलों के छात्रों को व्यक्तिगत शिक्षण सहायता प्रदान कर रहे हैं। इससे डिजिटल साक्षरता और सीखने की गुणवत्ता दोनों में सुधार हो रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में AI आधारित तकनीकें दूरदराज के गांवों तक सटीक चिकित्सा सलाह पहुंचाने में मदद कर रही हैं। टेलीमेडिसिन और एआई आधारित डायग्नोस्टिक सिस्टम के जरिए विशेषज्ञ सेवाएं सुलभ हो रही हैं।
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सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण
भारत अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा को डिजिटल माध्यम से संरक्षित करने के लिए भी AI का उपयोग कर रहा है। प्राचीन ग्रंथों का डिजिटलीकरण और सटीक अनुवाद कर उन्हें वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है। यह परंपरा और तकनीक का अनूठा संगम है।
भविष्य की दिशा और वैश्विक नेतृत्व
India AI Impact Summit 2026 के समापन पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में भारतीय एआई स्टार्टअप वैश्विक स्तर पर बड़ी कंपनियों के रूप में उभरेंगे और लाखों गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजित करेंगे। भारत की AI-संचालित सार्वजनिक सेवाएं पारदर्शी और प्रभावी प्रशासन का वैश्विक मानक बन सकती हैं। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि एआई को रोजगार के लिए खतरे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे मानव क्षमताओं को बढ़ाने वाले सहयोगी के रूप में अपनाना चाहिए। India AI Impact Summit 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत एआई युग में केवल भागीदारी ही नहीं, बल्कि नैतिक और विकासोन्मुख नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार है — ‘सर्वजन हिताय’ के मूल मंत्र के साथ।
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